'ब्राह्मण विधायकों ने दोबारा मीटिंग की तो एक्शन लूंगा':पंकज चौधरी की दूसरी बार चेतावनी; 4 दिन पहले 50 MLA ने की थी बैठक
यूपी में भाजपा के ब्राह्मण विधायकों की बैठक से पार्टी में खलबली मची है। भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी बेहद नाराज हैं। उन्होंने 48 घंटे में दूसरी बार विधायकों को चेताया। मथुरा पहुंचे चौधरी ने कहा, “भाजपा सर्व समाज की पार्टी है। हमारा संविधान अनुमति नहीं देता कि भाजपा के जनप्रतिनिधि जातीय आधार पर बैठक करें, इसलिए उन्हें चेतावनी दी है। बात भी की है। विधायकों से कहा है कि आगे ऐसी बैठक कतई न करें, जो पार्टी के खिलाफ हो।” इससे पहले 25 दिसंबर को भी चौधरी ने ब्राह्मण विधायकों की क्लास लगाई थी। कहा था- किसी तरह की नकारात्मक राजनीति का शिकार न बनें। इस तरह की गतिविधि दोहराई गई तो इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा। बता दें कि दैनिक भास्कर ने 23 दिसंबर को प्रमुखता से लखनऊ में हुई ब्राह्मण विधायकों की बैठक का खुलासा किया था। बैठक की वजह और इसकी अगुआई किसने की थी, यह भी बताया था। यूपी BJP अध्यक्ष बनने के बाद प्रदेश यात्रा पर निकले हैं चौधरी
पंकज चौधरी यूपी भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार प्रदेश की यात्रा पर निकले हैं। शनिवार सुबह सबसे पहले मथुरा पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने शॉल ओढ़ाकर और माला पहनाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद वह बांके बिहारी मंदिर पहुंचे और दर्शन-पूजन किए। उन्होंने कहा- प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद तय कर लिया था कि बिहारीजी के आशीर्वाद के साथ ही यात्रा शुरू करूंगा। आज बिहारी जी का आशीर्वाद भी लिया। उनसे कामना की है कि इतनी शक्ति दें कि सभी कार्यकर्ताओं को लेकर 2027 में प्रचंड बहुमत से भाजपा की सरकार दोबारा बने। SIR पर कहा- बिहार में भी हुआ था, वहां भी हम जीते
यूपी में SIR में 2.89 करोड़ वोटर्स के नाम कटने के सवाल पर पंकज चौधरी ने कहा- चुनाव आयोग की संवैधानिक व्यवस्था के हिसाब से काम चल रहा है। बिहार में भी SIR हुआ, वहां पर प्रचंड बहुमत से सरकार बनी। यहां भी हम जीतेंगे। आगे बढ़ने से पहले पोल में हिस्सा लेकर राय दें- अब जानिए कहां और क्यों हुई थी बैठक... 50 ब्राह्मण विधायक एक साथ आए, शिवपाल ने दिया बड़ा ऑफर
23 दिसंबर को विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के बीच कुशीनगर के भाजपा विधायक पीएन पाठक (पंचानंद पाठक) की पत्नी के जन्मदिन के नाम पर उनके लखनऊ आवास पर बैठक हुई। इसमें पूर्वांचल और बुंदेलखंड के 45 से 50 ब्राह्मण विधायक शामिल हुए। विधायकों को लिट्टी-चोखा और मंगलवार व्रत का फलाहार परोसा। खास बात है कि बैठक में अन्य पार्टियों के भी ब्राह्मण विधायक पहुंचे थे। मीटिंग के बाद सरकार में हलचल मच गई। सूत्रों के मुताबिक, सीएम के OSD सरवन बघेल ने बीजेपी विधायक पीएन पाठक को कॉल कर मामले की जानकारी ली। पाठक ने उन्हें बताया कि कोई राजनीतिक बैठक नहीं थी। मैंने सहभोज रखा था। बताया गया कि आरएसएस और भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी भी इस मामले को शांत कराने में जुट गए थे। इस बीच, शिवपाल यादव ने कहा था- भाजपा के लोग जाति में बांटते हैं। बीजेपी से नाराज ब्राह्मण विधायक सपा में आ जाएं। पूरा सम्मान मिलेगा। यूपी विधानसभा में इस समय 52 ब्राह्मण विधायक हैं, इनमें 46 भाजपा के हैं। विधानमंडल के मानसून सत्र में ठाकुर समाज के विधायकों ने कुटुंब परिवार के नाम पर बैठक कर तेवर दिखाए थे। अब ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने भाजपा और योगी सरकार की चुनौती बढ़ा दी।
बैठक की जरूरत क्यों पड़ी?
सूत्रों का कहना है, बैठक में कहा गया कि अलग-अलग जाति के खांचों में कई जातियां तो पावरफुल हो गईं, लेकिन ब्राह्मण पिछड़ गए। जाति की राजनीति में ब्राह्मणों की आवाज दबती जा रही है। उन्हें अनसुना कर दिया गया। ब्राह्मणों के मुद्दों को उठाने जोर-शोर से उठाने के लिए यह बैठक हुई। इन विधायकों का मानना है कि उनके समाज से डिप्टी सीएम तो हैं, लेकिन उनको ताकत नहीं दी गई। मीटिंग में कौन-कौन ब्राह्मण नेता पहुंचा था, जानिए प्रमुख मुद्दे जिन पर चर्चा की गई... 1-संघ, सरकार और भाजपा में सुनवाई नहीं
ब्राह्मण विधायकों की बैठक में चर्चा हुई कि समाज के लोगों की आरएसएस, भाजपा और सरकार में कोई सुनने वाला नहीं है। संघ, भाजपा और संगठन में ब्राह्मण समाज का ऐसा कोई बड़ा या जिम्मेदार पदाधिकारी नहीं है, जिसके पास जाकर समाज के लोग अपनी बात रख सकें। समाज के विधायकों, सांसदों और नेताओं की समस्या सुनने वाला कोई नहीं है। एक जाति विशेष के लोगों को खास तवज्जो दी जाती है, उस जाति के लोगों ने लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराने का काम किया था। जबकि ब्राह्मणों की आबादी उनसे ज्यादा है और समाज हमेशा भाजपा के साथ रहा है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि संगठन और सरकार में लगातार ब्राह्मणों की कद घटाया जा रहा है। बीजेपी में भी ब्राह्मण पदाधिकारियों की संख्या कम की गई है। 2- डिप्टी सीएम को ताकत नहीं
बैठक में मौजूद ब्राह्मण विधायकों का मानना था कि पार्टी ने समाज के विधायक ब्रजेश पाठक को डिप्टी सीएम बनाया है। लेकिन सरकार ने उन्हें ताकत नहीं दी है। 3- सुनील भराला नामांकन दाखिल नहीं हो सका था
भाजपा के ब्राह्मण नेता सुनील भराला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में नामांकन दाखिल करने पहुंच गए थे। उनके पास पर्याप्त संख्या में ब्राह्मण और अन्य जातियों के प्रस्तावक भी थे। जानकारों का मानना है कि भराला ने ब्राह्मण समाज को मौका नहीं मिलने से नाराज होने के बाद ही नामांकन दाखिल करने का निर्णय किया था। पार्टी के कई ब्राह्मण नेताओं ने उन्हें समर्थन भी दिया था। लेकिन एन वक्त पर पार्टी नेतृत्व के दखल के कारण उन्होंने नामांकन दाखिल नहीं किया। पंकज चौधरी का पल-पल का अपडेट जानने के लिए नीचे लगे ब्लॉग से गुजर जाइए...
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