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*प्रकाशनार्थ*
*जबर्दस्त का ठेंगा, जबर मारे रोबन न दे!*
*(आलेख : राजेंद्र शर्मा)*
भारतीय शासन का खासतौर पर पड़ोसी देशों के प्रति, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है, जो व्यवहार है, उसे देखते हुए, खुद भारत का भी 'अंदरूनी मामलों' की दलील देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बनता है। इसके अलावा, इससे कैसे इंकार किया जा सकता है कि मानवता ने अब तक जो सार्वभौम मानव अधिकार स्वीकार किए हैं, जिसका एक रूप संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार घोषणाएं हैं और जो सर्वस्वीकृत मानव मूल्य हैं।
सच्चाई और पानी की खासियत एक जैसी मानी गयी है। उन्हें दबाने की जितनी कोशिश की जाती है, वे उतने ही वेग से निकल कर सामने आते हैं। कुछ ऐसा ही किस्सा मोदीशाही के भारत में अल्पसंख्यकों और खासतौर पर मुसलमानों के खिलाफ बढ़ते भेदभाव, अन्याय और अत्याचारों का और इनमें शासन की बढ़ती हिस्सेदारी का है। और यह सिलसिला अगर डबल इंजन सरकारों के रूप में, कानून-व्यवस्था पर मोदीशाही के प्रत्यक्ष नियंत्रण का दायरा लगातार बढ़ने के साथ, मस्जिदों-मजारों पर हमलों तक नहीं पहुंच रहा होता, तो ही आश्चर्य की बात होती।
और अब जबकि यह सिलसिला तेजी पकड़ रहा है, इस सच्चाई को दबाने की सारी कोशिशों के बावजूद, न सिर्फ इस अन्याय का सच सामने आ रहा है, बल्कि प्रसंगवश यह सच भी सामने आ रहा है कि मोदीशाही में मुख्यधारा की राजनीति में, जिसमें सत्तापक्ष ही नहीं, विपक्ष भी शामिल है, अल्पसंख्यकों और खासतौर पर मुसलमानों की चिंताओं के लिए, कितनी कम जगह बची है। वैसे तो ताजा संदर्भ बंगाल की फतेह से बढ़े हुए जोश के साथ, 'मुस्लिम मिरर' की रिपोर्ट के अनुसार छ: भाजपा-शासित राज्यों में पिछले करीब डेढ़ महीने में 23 से ज्यादा मस्जिदों, मदरसों, ईदगाहों तथा दरगाहों के ध्वस्त किए जाने का है। फिर भी इस क्रम में प्रधानमंत्री मोदी के चुनाव क्षेत्र, वाराणसी की गंज शहीदां मस्जिद के प्रकरण ने, अपने प्रकट अन्याय के लिए खासतौर पर देश में ही नहीं, देश के बाहर भी लोगों का ध्यान खींचा है। स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार, इस मस्जिद के एक हजार वर्ष पुरानी होने को बहुत गंभीरता से नहीं भी लिया जाए तब भी, मस्जिद की इंतजामिया कमेटी के इसके दावों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है कि 1883-84 के बंदोबस्ती नक्शों में और उससे पहले के राजस्व रिकार्डों में, इस जगह पर मस्जिद की मौजूदगी दर्ज है। संक्षेप में यह कि जिस काशी रेलवे स्टेशन के निकट स्थित होने के आधार पर, स्टेशन के पुनर्विकास तथा विस्तार के लिए, इस मस्जिद की जमीन की जरूरत का दावा किया जा रहा है और मस्जिद को रेलवे की जमीन पर काबिज बताया जा रहा है, मस्जिद उससे पुरानी ही ठहरेगी।
इसके बावजूद, जैसा कि अब भाजपा-शासित राज्यों में नियम ही हो गया है, इस मामले में रेलवे अधिकारियों द्वारा 17 जून को नोटिस चस्पां कर, 20 जून तक यानी तीन दिन में मस्जिद को हटाने का आदेश दे दिया। दिलचस्प है कि रेल प्रशासन के उसी नोटिस में यह दलील दी गयी है कि इस संबंध में मस्जिद इंतजामिया कमेटी का दावा स्थानीय सिविल अदालत में, अगस्त 2024 में खारिज कर दिया गया था। दो साल पहले के फैसले को रेलवे प्रशासन तीन दिन के नोटिस पर लागू कराने के लिए उतावला था! इससे पहले, वाराणसी में ही इसी रेलवे स्टेशन के परिसर में स्थित, अज़गैब शहीद मस्जिद को भारी पुलिस बल तैनात कर, 2 जून की रात को बुलडोजरों से ध्वस्त कर दिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मस्जिद भी दो सौ साल पुरानी थी, जिसकी काफी धार्मिक मान्यता थी।
याद रहे कि योगी राज में उत्तर प्रदेश, मस्जिदों तथा अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर बुलडोजर चलवाने के मामले में भाजपा-शासित राज्यों में भी सबसे आगे रहा है। इन 45 दिनों में ही उत्तर प्रदेश में अकेले संभल में एक मस्जिद, एक ईदगाह तथा एक दरगाह को और इटावा में एक मजार, सैयद शाहबाबा दरगाह को ध्वस्त किया जा चुका था।
इस पृष्ठभूमि में गंज शहीदां मस्जिद के ढहाए जाने के नोटिस पर व्यापक और तीखी प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक था। यहां तक कि यह खबर पाकिस्तान तक पहुंची और स्वाभाविक रूप से पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इसे भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के साथ ज्यादती का उदाहरण बनाते हुए, एक सार्वजनिक बयान जारी कर दिया। बयान में पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने न सिर्फ ऐतिहासिक मुस्लिम स्थलों के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयां रोके जाने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों तथा साझा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने की मांग की, बल्कि यह चेतावनी भी दी कि मौजूदा रास्ता बिखराव तथा चिर अशांति की ओर ले जाएगा।
हैरानी की बात नहीं है कि भारत सरकार की ओर से अपनी तीखी प्रतिक्रिया में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पाकिस्तान को अपने गरेबां में झांकने की नसीहत दे डाली। किसी से छुपा हुआ नहीं है कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के मामले में अपने खराब रिकार्ड को देखते हुए, पाकिस्तान को किसी दूसरे देश को अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने का उपदेश देने का नैतिक अधिकार तो नहीं ही है। और उसके अपने ऐसे रिकार्ड को इसके बावजूद माफ नहीं किया जा सकता है कि वह एक इस्लामी राज्य है, न कि भारत की तरह एक धर्मनिरपेक्ष राज्य।
लेकिन, भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया अल्पसंख्यकों के अधिकार के प्रश्न पर बोलने के पाकिस्तान के नैतिक अधिकार पर सवाल उठाने पर ही रुक नहीं गयी। उसमें न सिर्फ जरदारी की टिप्पणियों को दो-टूक तरीके से खारिज किया गया, बल्कि यह दलील भी दी गयी कि 'ये भारत के अंदरूनी मामले हैं, जिन पर बोलने का उनको कोई अधिकार नहीं है।' जाहिर है कि भारत-पाकिस्तान के रिश्तों के संदर्भ में हमारे 'अंदरूनी मामले' की यह दलील सामान्य से ज्यादा आक्रामक हो जाती है। लेकिन, एक यही मामला नहीं है, जिसमें हमें 'अंदरूनी मामलों' की यह दलील सुनाई दे रही है। बात इससे उलट है। अल्पसंख्यकों के अधिकारों के संबंध में मोदी राज की हरेक अंतर्राष्ट्रीय आलोचना को ठीक इसी दलील से खारिज किया जाता रहा है। यहां तक कि अमेरिका के साथ मातहती के अपने सारे रिश्तों के बावजूद, मोदी राज की 'अंदरूनी मामलों' की इस झाडू ने कभी भी अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) तक की आलोचनाओं को नहीं बख्शा है। 'अंदरूनी मामलों' की इस दुहाई को मोदी राज में तमाम अंतर्राष्ट्रीय संगठनों तथा अध्ययनों को नकारे जाने की बेतुकी हद तक पहुंचा दिया गया है।
लेकिन, यहां एक विडंबना की ओर ध्यान खींचे बिना नहीं रहा जा सकता है। ऐसा लगता है कि मोदी राज की नजरों में, 'अंदरूनी मामलों' के लिए यह सुरक्षा, भारत का ही विशेष अधिकार है। दूसरे देशों और खासतौर पर पड़ोसी देशों के ऐसे ही 'अंदरूनी मामलों' में आए दिन टिप्पणी करना, यही सरकार अपना विशेषाधिकार ही नहीं, बल्कि कर्तव्य भी समझती है। यह सिर्फ पाकिस्तान तथा बांग्लादेश में (अफगानिस्तान के साथ अब रिश्ते सुधारे जा रहे हैं, इसलिए वह अब इससे बाहर है) अल्पसंख्यकों के अधिकारों के सवाल उठाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नेपाल, भूटान आदि अन्य पड़ोसी देशों की अन्य अंदरूनी नीतियों में दादागीरी के अंदाज में दखलंदाजी की कोशिशों तक जाता है, जिसके चक्कर में ही मोदी राज में अधिकांश पड़ोसी देशों से भारत के रिश्ते ठंडे से ठंडे होते गए हैं।
फिर भी बात सिर्फ इतनी नहीं है कि वर्तमान भारतीय शासन का खासतौर पर पड़ोसी देशों के प्रति, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है, जो व्यवहार है उसे देखते हुए, खुद भारत का भी 'अंदरूनी मामलों' की दलील देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बनता है। इसके अलावा, इससे कैसे इंकार किया जा सकता है कि मानवता ने अब तक जो सार्वभौम मानव अधिकार स्वीकार किए हैं, जिसका एक रूप संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार घोषणाएं हैं और जो सर्वस्वीकृत मानव मूल्य हैं, उनके हिसाब से समाजों तथा देशों की जांच-परख और उससे निकली आलोचनाओं को, समुदायों और देशों की सीमाओं में बंद नहीं किया जा सकता है। इस विमर्श को ऐसी तंग सीमाओं में बंद करना तो मानवता के विकास के ही रास्ते बंद करना होगा।
बेशक, राष्ट्रों तथा समुदायों की संप्रभुता का सम्मान किया जाना भी जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर सार्वभौम मानव अधिकारों तथा मूल्यों की अविभाज्यता की ओर से नजरें नहीं फेरी जा सकती हैं। इस लिहाज से देखें, तो धर्मनिरपेक्षता के हमारे अमल की, पाकिस्तान की या बांग्लादेश की भी आलोचनाओं को सिर्फ इस आधार पर हमारा खारिज करना उचित नहीं होगा कि वे एक धार्मिक राज्य से आती है और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के मामले में उनका अपना रिकार्ड उदाहरणीय नहीं है। आलोचनाओं को इस तरह नकारना आसान तो है, लेकिन उससे सच्चाई तो बदल नहीं जाएगी। इसके विपरीत, अगर हम अपने धर्मनिरपेक्षता तथा जनतंत्र के दावों को सच होते देखने के प्रति गंभीर हैं, तो यह हमारे अपने हित में है कि हरेक आलोचना को टटोलकर देखें कि उसमें कहीं सच्चाई का कोई अंश तो नहीं है।
जरदारी के बयान का हमारा खंडन मौजूदा निजाम के रुख का शास्त्रीय उदाहरण है। बयान का खंडन तो कर दिया, पर उसमें जिस हजार साल पुरानी मस्जिद के ध्वस्त किए जाने के खतरे का जिक्र है, क्या विदेश मंत्रालय का बयान उसका भी खंडन करता है या कर सकता है? खंडन जरदारी के बयान का है, अल्पसंख्यकों के साथ ज्यादती की सच्चाई का नहीं।
इस ज्यादती की सच्चाई का एक और महत्वपूर्ण पहलू है, जो इसी विवाद के क्रम में सामने आया है। एक प्रतिष्ठित दैनिक ने इसी संबंध में तीन मुस्लिम सांसदों की टिप्पणियों का जिक्र किया है, जो इस अर्थ में बहुत ही विंडबनापूर्ण हैं कि उनमें इतना भर कहने के लिए कि 'प्रशासन को ऐतिहासिक तथा विरासती निर्माणों के भेदभावपूर्ण ध्वस्तीकरण से बाज आना चाहिए, क्योंकि उससे धार्मिक व सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन होता है', साथ में यह जोड़ना जरूरी समझा गया है कि इससे हमारे बाहरी विरोधियों को भारत के अंदरूनी मामलों में बोलने का मौका मिलता है! वास्तव में तीनों मुस्लिम सांसदों को यह कहना बहुत जरूरी लगा है कि, 'दूसरे देशों को या शासनाध्यक्षों को भारत के अंदरूनी मामलों पर टिप्पणी करने कोई अधिकार नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय को पाकिस्तान के नेता से सीखने की जरूरत नहीं है। इन सांसदों ने न सिर्फ यह मुद्दा उठाने के लिए जरदारी की बाकायदा निंदा की, बल्कि रिपोर्ट से पता चलता है कि कम से कम एक सांसद ने आगे बढ़कर उत्तर प्रदेश में एक प्रकार से 'सब चंगा सी' का सर्टिफिकेट देना भी जरूरी समझा!
सीधे-सरल शब्दों में कहें तो यह अन्याय के उस मुकाम पर पहुंच जाने का मामला है, जहां अन्याय के विरोध की आवाजें तक घुटकर रह जाती हैं। यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण होगा कि ऐसेे अन्याय के खिलाफ विरोध की आवाजें, संबंधित अल्पसंख्यक समुदाय तक ही सीमित होकर रह जाएं। इसे देखते हुए यह तसल्ली देने वाली बात है कि राजस्थान में, जहां केंद्रीय गृहमंत्री के हाल के दौरे के बाद, पाकिस्तान से लगते हुए सीमावर्ती इलाकों में मुस्लिम धार्मिक स्थलों के ध्वस्तीकरण की इकतरफा मुहिम छेड़ी गयी है, राज्य के पूर्व-मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने, न केवल इस ध्वस्तीकरण का खुलकर विरोध किया है, बल्कि इसे सीमावर्ती क्षेत्र की साझा धार्मिक परंपराओं व संस्कृति पर और हिंदू-मुस्लिम एकता पर हमला करार दिया है। याद रहे कि साझा धार्मिक परंपराएं व संस्कृति ही सबसे बढ़कर मौजूदा विभाजनकारी संघ-भाजपा निजाम के निशाने पर हैं।
*(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और साप्ताहिक पत्रिका 'लोकलहर' के संपादक हैं।)*
Jitendra: *शाम की देश राज्यों से बड़ी खबरें*
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*1* 60 सेकेंड में दो भूकंप,वेनेजुएला की राजधानी मलबे में तब्दील, घर-इमारतें जमींदोज, अस्पताल तबाह हुए, सड़कों पर ही घायलों का इलाज
*2* वेनेजुएला के भूकंप पर पीएम मोदी का बयान: संवेदनाएं जताकर बोले प्रधानमंत्री, भारत करेगा हरसंभव मदद
*3* पीएम मोदी ने कलकत्ता गोदाम हादसे का संज्ञान लिया: मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हुई, मुआवजे का भी एलान
*4* 'न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के प्रति समर्पित भारत बनाएंगे', इमरजेंसी की बरसी पर बोले पीएम मोदी
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*5* राष्ट्रपति मुर्मू से मिले गृह मंत्री शाह, मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकल हुई तेज
*6* 'जिनकी नाकामी से पेपर लीक हुए, वो छात्रों को 'दहशतगर्द' बता रहे हैं'; धर्मेंद्र प्रधान पर भड़के राहुल गांधी, मांगा इस्तीफा और माफी
*7* राहुल गांधी ने एक बार फिर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा और उन पर करोड़ों छात्रों के अपमान का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों को शिक्षा मंत्री ने दहशतगर्द कहा। ये सरकार के अहंकार को दिखाता है।
*8* NCERT के सिलेबस में 1975-1977 इमरजेंसी सेक्शन शामिल, कक्षा 9वीं को पढ़ाया जाएगा; इलेक्शंस चैप्टर में चुनाव आयोग की भी तारीफ
*9* सरकार ने कहा- पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज, नागरिकता का प्रमाण नहीं, कांग्रेस ने पूछा- फिर सबूत क्या है
*10* सांसद ने राममंदिर जमीन घोटाले के सबूत SIT को दिए, संजय सिंह ने 12 मिनट में एसआईटी अध्यक्ष को 11 सबूत सौंपे; पूछा- अब तक FIR क्यों नहीं हुई
*11* दोषियों को 4 महीने में मिले सजा... राम मंदिर चंदा विवाद पर भड़के VHP प्रमुख आलोक कुमार; तुरंत FIR की मांग
*12* सीबीआई ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए देश के 16 राज्यों में 80 ठिकानों पर छापेमारी अभियान चलाया है। यह कार्रवाई डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े मामले में की गई है
*13* उज्जैन: मोहर्रम जुलूस में 40 फीट ऊंचाई पर वैन लटकाकर किया धमाका, Video वायरल होने के बाद छिड़ा विवाद; चार पर FIR
*14* महाराष्ट्र में नीट छात्र ने आत्महत्या की, वीडियो में बोला- मां माफ कर देना; 42 दिनों में 11 राज्यों के 22 स्टूडेंट्स का सुसाइड
*15* केतन को रास्ते से हटाने को एक दिन पहले सिया-चेतन ने कैफे में बनाई थी प्लानिंग, CCTV कैमरे से खुली पोल
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*16* सेंसेक्स 109 अंक चढ़कर 77,100 पर बंद, निफ्टी 34 अंक ऊपर 24,056 पर पहुंचा; ऑटो और FMCG शेयरों में खरीदारी
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[25/06, 6:02 pm] +91 70600 83068: 2000 करोड़ का भी गड़बड़ हो जाए तो मेरी आस्था नहीं टूटेगी,,, मंदिर की चोरी का इतना दुख किसी राम भक्त को नहीं है, जिनकी आस्था नहीं है मंदिर मै वो लोग इसपर राजनीति कर रहे है, सनातन को बदनाम करने की चाल है,,जिन्होंने देश का कोयला खा लिया नेशनल हेराल्ड मै सरकारी प्रॉपर्टी खा ली,, कॉमन वेल्थ मै करोड़ो खा लिए,,देश मै अरबो,करोड़ो खा लिया,,2G 3 G 4 G ना जाने कितने घोटाले देखे हमने,, ये तो फिर मंदिर का पैसा था, हम हिन्दुओ का था, जो रिकवर हो जाएगा।
देश का पैसा तो सबकी संपत्ति है,जिसे विपक्ष ने लूट खाया 70 साल,,,,,राम मेरी आस्था है,, जो पैसे से नहीं टूटेगी,, जो मेरी साँसों के साथ ही खत्म होगी,, मै राम द्रोहियों के किसी एजेंडे मै फंसने वाली नहीं हु,,ये केवल चुनावी हवा बाजी है,, जरूर इस मै इनकी साजिश होगी,, सरकार निष्पक्ष होकर जांच कर रही है,, जो भी दोषी होगा बचेगा नहीं,,फिर भी गड़बड़ की जिम्मेवार सरकार नहीं है,।
राम जन्म भूमि एक ट्रस्ट है,, अगर गड़बड़ हुई है तो सरकार सख्त नियम बनाएगी,, वैसे तिल का ताड़ बनाया जा रहा है,जिन ने राम मंदिर का विरोध किया जिन ने राम भक्तों पर गोलियां चलबाई, एक रुपया चंदा नहीं दिया उन रामद्रोहियों, गुंडों को चंदा का हिसाब माँगने का कोई अधिकार नहीं।
आशा है, बहुत जल्द योगी जी इसपर अपनी बात रखेंगे,,
जय हिंद जय श्री राम
Kitna: अयोध्या में राम मंदिर दान में लूट प्रकरण के बीच निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास महाराज के बयान से संघी पाखंड पुनः उजागर हुआ है।
महंत दिनेंद्र दास महाराज राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं, जिन्हें मंदिर ट्रस्ट ने शुरू से हाशिए पर रखा। कारण वे संघ परिवार की विचारधारा के नहीं हैं। जबकि पूरी व्यवस्था संघ व विहिप से जुड़े तीन लोगों के हाथों में चलती रही। जिसमें गोपाल राव व ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय के करीबी राम शंकर यादव टिन्नू जैसे बाहरी लोगों का दबदबा कायम रहा है।
महंत दिनेंद दास सरल स्वभाव के संत हैं। उन्होंने कभी किसी पद की लालसा नहीं दिखाई। वे कहते हैं कि मैं रामजी के दर्शन मिलने से ही संतुष्ट रहा।
उन्होंने बताया कि एसआईटी ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट तैयार कर पेश कर दिया है परंतु अभी तक उनसे कोई पूछताछ नहीं की गई है।
Jitendra Kumar: RSS वाले पिछले 50 साल से यह झूठ फैला रहे हैं कि इंदिरा गांधी ने आपातकाल इसलिए लगा दिया था क्योंकि उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी गई थी।
यह देखिए तब के RSS प्रमुख बालासाहब देवरस का इंदिरा गाँधी को लिखा पत्र जिसमें वह ख़ुद इंदिरा गाँधी को बधाई दे रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों की पीठ ने श्रीमती इंदिरा गांधी के निर्वाचन को वैध ठहराया है।
अब समय आ गया है कि 50 साल के झूठ से पर्दा हटाया जाय।
Tej raftar news: *शिवराज के बेटे से जुड़े मानहानि केस में राहुल गांधी ने कोर्ट में जताया खेद, जानें क्या है पनामा पेपर्स से जुड़ा यह विवाद*
*लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मानहानि मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लिखित रूप से खेद व्यक्त किया है।*
* मामले की सुनवाई 25 जून को जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ के समक्ष होगी।
*यह मामला कार्तिकेय सिंह चौहान द्वारा दायर मानहानि परिवाद से जुड़ा है।*
* कार्तिकेय चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र हैं।
* विवाद की शुरुआत 2018 विधानसभा चुनाव के दौरान झाबुआ की एक चुनावी सभा से हुई थी।
* राहुल गांधी ने उस सभा में कथित तौर पर Panama Papers का जिक्र करते हुए कार्तिकेय चौहान का नाम लिया था।
* कार्तिकेय चौहान का दावा है कि उनका नाम पनामा पेपर्स में नहीं था और इस बयान से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
* राहुल गांधी ने अपने आवेदन में कहा कि यह बयान शिकायतकर्ता के संदर्भ में नहीं था और गलती से उनका नाम लिया गया था।
* हाईकोर्ट अब राहुल गांधी के खेद-पत्र और मामले के अन्य कानूनी पहलुओं पर विचार करेगा।
*यह मामला चुनावी भाषणों में दिए गए बयानों की जवाबदेही और तथ्यों की सटीकता को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।*
*कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ देशभर में कुल 32 कानूनी मामले दर्ज है.*
* उन्होंने हाल ही में एक बयान में इन मुकदमों का जिक्र करते हुए कहा है कि उन्हें इन मामलों से कोई डर नहीं लगता, बल्कि वे इन 32 मामलों को अपने लिए 'मेडल' (सम्मान) की तरह मानते हैं.
*इन दर्ज 32 मामलों में से कई मामले मानहानि (Defamation) से जुड़े हैं, जो विभिन्न राज्यों में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े नेताओं द्वारा दायर किए गए हैं. इसके अलावा नेशनल हेराल्ड केस (National Herald case) जैसे कुछ अन्य राजनीतिक मामले भी शामिल हैं.*
Jeetu dehati: *सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट के माध्यम से मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियांक खड़गे जमीन की लूट और भ्रष्टाचार में शामिल*
* जमीन घोटाले में सिर्फ खरगे ही नहीं बल्कि पूरा गांधी और वाड्रा परिवार भी शामिल है.
*50 हजार करोड़ की अवैध संपत्ति, हेराल्ड केस, मुहर्रम में नाचेंगे... इन विवादों से जुड़ चुका है खड़गे का नाम*
* 2014 में मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ एक लोकायुक्त शिकायत दर्ज की गई थी.
* उनके पास 50,000 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जो उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक थी.
*खड़गे के पास चिकमगलूर जिले में 300 एकड़ का कॉफी बागान है, जिसकी कीमत 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है. वहीं बन्नेरघट्टा में 500 करोड़ रुपये का एक विशाल परिसर है.*
* मल्लिकार्जुन खड़गे यंग इंडिया लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि हैं, जो एसोसिएटेड जर्नल्स के मालिक हैं.
* नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यंग इंडिया ईडी की जांच के दायरे में है.
*हाल में जांच एजेंसी ईडी ने गांधी परिवार के बेहद करीबी खड़गे को 5,000 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तलब किया था.*
* एजेंसी ने दिल्ली में यंग इंडिया लिमिटेड के कार्यालयों को आंशिक रूप से सील करने के बाद खड़गे से अगले दिन सात घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की गई थी.
*कर्नाटक में गुलबर्गा जिले के रहने वाले खड़गे ने 2019 में राज्यसभा चुनाव के दौरान इलेक्शन कमीशन को बताया था कि उनके पास करीब 200000 करोड़ रुपये की संपत्ति है।*
TRN Live: 2सौ किलो चांदी, चांदी के हजार फूल और काकभुशंड जी के बारे में मैंने भी अपने सूत्रों से पता किया तो मालूम हुआ
चांदी के काकभुशंड जी कारसेवक पुरम में Champat Rai जी के कक्ष में सुरक्षित रख कर पूजे जाते रहे फिलहाल अब लक्ष्मण कुटी में चांदी के फूल, चांदी की बड़ी सी माला व अन्य आभूषणों के साथ सुरक्षित रखे हुए हैँ
काकभुशंड जी का वजन सौ ग्राम के आसपास होगा
सिंधी समाज की तरफ से दी गई 200 किलो चांदी की ईंटों को SBI ने मिंट नाम की संस्था की मदद से गलवा कर आधा-आधा किलो की ब्रिक के रूप में बदलवाकर अपने पास लॉकर में रखा है
इन सभी दानदाताओं को चम्पत राय जी द्वारा स्पष्ट बोला गया था कि वापस ले जाओ ये मंदिर का हिस्सा नहीं बन सकते,
ये सारे विवाद टीवी पर छाये भी रहे थे कि भक्तों की भावनाओं का अपमान किया जा रहा है
सोने के खम्बों के बारे में चम्पत जी का कथन, " इनको वापस ले जाओ चोरी हो जायेंगे " तो खूब वायरल हुआ था
J: jeetu dehati फाइनली! मोहम्मद अविमुक्तेश्वरानंद बन गए समाजवादी पार्टी के ‘सन्यासी’ स्टार प्रचारक 🔥
अलीगढ़ के 75 कोल विधानसभा क्षेत्र में लगा यह विशाल बैनर देखकर लग रहा है कि राजनीति अब आध्यात्मिकता की आड़ में नया चैप्टर लिख रही है।
बैनर पर भगवा रंग, फूलों की माला, लाल तिलक और भव्य मुद्रा में खड़े हैं मोहम्मद अविमुक्तेश्वरानंद — जिन्हें कुछ लोग ‘कथित शंकराचार्य’ कहते हैं। बैनर पर साफ-साफ लिखा है:
“अलीगढ़ 75 कोल विधानसभा क्षेत्र में आगमन पर आपका इस्तकबाल करते हैं!”
बाएं तरफ युवा चेहरा (लाल टोपी और ग्रे जैकेट में), ऊपर अखिलेश यादव समेत अन्य नेताओं की फोटो, और नीचे निवेदक: ख्वाजा हसन जिवान। पूरा माहौल ऐसा है जैसे कोई धार्मिक संत पूरे जश्न के साथ क्षेत्र में पधार रहे हों।
Jeetu dehati: ये आंध्राप्रदेश की उर्दू अकादमी का अध्यक्ष है फ़ारूक़ शुबली...
ये व्यक्ति जो बात आलोचना के तौर पर कह रहा है... बड़ा ही कड़वा सत्य है
वो कह रहा है
"10 मुस्लिम घरों में जाइए, आपको कुरान मिल जाएगी... 10 ईसाई घरों में जाइए, आपको बाइबल मिल जाएगी...लेकिन ऐसा क्यों है कि बहुत से हिंदू अपने घरों में भगवद्गीता या रामायण रखने और पढ़ने में हिचकिचाते हैं?"
कठोर सत्य है पहली बात होगी नहीं... होगी तो पढ़ने की याद बुढ़ापे में आएगी परलोक के डर से
आखिर अपने बच्चों को इन्हे पढ़ने को प्रेरित क्यों नहीं करते हम...?
Jeetu dehati: केंद्र सरकार ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए संशोधन के तहत धर्मांतरण को अब ‘आस्था आधारित गतिविधि’ की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है।
सरकार के नए नियम के मुताबिक अब धार्मिक संस्थाएं और NGO विदेशी फंड का इस्तेमाल धर्मांतरण के लिए नहीं कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकना और धार्मिक परिवर्तन के लिए मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर कड़ी निगरानी रखना है।
नए प्रावधान के बाद जबरन, लालच या अनुचित दबाव डालकर धर्मांतरण कराने के मामलों में सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार ने कहा कि यह बदलाव पारदर्शिता बढ़ाने और विदेशी फंड के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
FCRA पहली बार 1976 में लागू किया गया था, ताकि विदेशी प्रभाव को नियंत्रित किया जा सके। इसके बाद 2010 में नया FCRA कानून लाया गया, जिसमें रजिस्ट्रेशन और निगरानी से जुड़े नियम जोड़े गए। साल 2020 में भी कानून में संशोधन कर विदेशी फंडिंग पर नियंत्रण और सख्त किया गया था।
Jeetu dehati: ......असल सवाल ये नहीं है कि....
"मेरी नागरिकता का प्रमाण क्या है..."....लोग इसी पर बहस कर रहे हैं...जबकि असल सवाल ये है कि...
"देश के हर नागरिक की पहचान का सबसे भरोसेमंद सिस्टम क्या हो...!!".......
.....हम तो भारत के नागरिक हैं ही....हम यहीं पैदा हुए....यहीं पले बढ़े...यहीं पढ़े लिखे. ..यहीं नौकरी की....हमारे बाप - दादा यहीं पैदा हुए......हजार तरीके हैं हमारे पास नागरिकता साबित करने के.....हम नागरिक नहीं हैं तो कौन है नागरिक.......हमने ही सरकार चुनी है...अगर हम नागरिक नहीं हैं तो हमारे द्वारा चुनी हुई सरकार भी अवैध हुई......हमारे पास आधार कार्ड...PAN...राशनकार्ड...बैंक खाता...वोटर कार्ड...सरकारी नौकरी के दस्तावेज...सबकुछ हैं जो भारतीय नागरिक को ही जारी होते हैं....अगर इन सबके बावजूद हम भारतीय नागरिक नहीं हैं तो फिर कौन है भारतीय नागरिक...!!........तो सवाल नागरिकता का है ही नहीं....सवाल उस पुख्ता सिस्टम का है जिसके जरिए नागरिक की पहचान हो सके.
.......सरकार ने एक जाल फेंका है Passport के रूप में...और तमाम विपक्षी उस जाल मे फंस चुके हैं....जबकि ये उन्हीं का बनाया नियम है कि Passport नागरिकता का सबूत नहीं है...और आज वही सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि नागरिकता का प्रमाण Passport नहीं है तो क्या है...!!.....जब कोई एक सिंगल document नागरिकता साबित नहीं करता तो भविष्य मे ऐसा कौन सा सिस्टम हो जो देश के वास्तविक नागरिको का रिकॉर्ड रख सके...!!
......यही से पर्दा हटता है...और NRC (National Register Of Citizen) सामने आता है....ये सारी चर्चा...सारी बहस NRC पर जाके खत्म हो जाती है....क्यूंकि वही इकलौता तरीका है जो किसी देश के वास्तविक नागरिको के रिकॉर्ड को सिस्टमैटिक तरीके से रख सकता है.
और बस...यही तो सरकार चाहती है.
Jiu: बिना आवेदन के पद्मश्री!
भारत में अब राष्ट्रीय सम्मान मिलने की प्रक्रिया एवं चयन का आधार बिल्कुल बदल गया है। अगर समाज के लिए आपका कोई विशेष योगदान है तो तो पद्मश्री के लिए आपको स्वयं बुला लिया जाएगा। ऊपर वाला सब देख रहा है, यह कहावत पूरी तरह सत्य सिद्ध हो रही है।
हमारे देश में लोग चपरासी की नौकरी पाकर भी घमंड में चूर हो जाते हैं भाई, लेकिन पंजाब पुलिस का एक रिटायर्ड डीआईजी (DIG) अगर बुढ़ापे में घुटनों के दर्द के बावजूद सड़क पर कचरा उठा रहा हो—तो समझ जाना कि देशभक्ति वर्दी उतरने के बाद भी खून में दौड़ती रहती है!
चंडीगढ़ के सेक्टर-49 से आई यह खबर देश के हर एक नागरिक को अपनी प्राथमिकताओं पर सोचने के लिए मजबूर कर देगी। मिलिए 88 साल के सरदार इंदरजीत सिंह सिद्धू जी से, जिन्हें मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से नवाजा गया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी उनके सम्मान में खड़े दिखे।
लेकिन इस अवॉर्ड के पीछे की कहानी किसी भी वीआईपी की सोच को हिलाकर रख देगी:
वर्दी से समाज सेवा तक: साल 1963 में पुलिस में भर्ती हुए, 1971 के भारत-पाक युद्ध में सांबा सेक्टर में देश के लिए मोर्चा संभाला और 1996 में पंजाब के डीआईजी पद से रिटायर हुए। चाहते तो पेंशन के पैसों पर आलीशान जिंदगी काटते, लेकिन उन्होंने सुबह 6 बजे उठकर चंडीगढ़ की सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक जगहों को खुद झाड़ू मारकर साफ करना शुरू कर दिया।
कोई पब्लिसिटी स्टंट नहीं था: सिद्धू जी ने इस अवॉर्ड के लिए कभी कोई आवेदन (Apply) नहीं किया था। वे तो खामोशी से अपना काम कर रहे थे। किसी ने उनका सड़क साफ करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो वायरल हो गया। इसके बाद प्रशासन ने खुद केंद्र सरकार को उनका नाम भेजने की सिफारिश की।
टूटे पैर से भी जारी है जंग: कुछ दिनों पहले एक गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी थी, जिसके कारण उनके पैर में गंभीर चोट है और वे ठीक से चल भी नहीं पा रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद, वे हाथ में छड़ी पकड़कर रोज सुबह सफाई करने निकल जाते हैं।
आज जहाँ देश का युवा सिर्फ़ सोशल मीडिया पर ज्ञान बांटता है और अपनी गली का कचरा साफ करने में भी शर्माता है, वहाँ एक पूर्व आईपीएस अधिकारी का यह जज्बा पूरी कौम और देश के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल है। सम्मान किसी सिफारिश या चापलूसी से नहीं, बल्कि ऐसे ही निस्वार्थ कर्मों से कमाया जाता है।
भारत माता के इस सच्चे सपूत, फौलादी रिटायर्ड अफसर और देश के असली 'झाड़ू योद्धा' को झुककर कड़क सलाम!
Jitendra Kumar: इंद्रजीत सिंह सिद्धू 88 साल की उम्र में भी रोज सुबह अपनी सोसाइटी और आसपास की गलियों में झाड़ू लगाते हैं, कचरा उठाते हैं और लोगों को सफाई का संदेश देते हैं। 😍
अधिक जानकारी के लिए Kem Cho Media को फॉलो करें
पंजाब पुलिस के पूर्व डीआईजी इंद्रजीत सिंह सिद्धू ने अपनी पूरी जिंदगी कानून व्यवस्था बनाए रखने में लगा दी, लेकिन रिटायर होने के बाद अपने शहर को खूबसूरत और बेहतर बनाने की जिम्मेदारी ली।
एक बड़ी टीम या सरकारी मदद के बिना, सिर्फ अपने जुनून और अनुशासन के साथ उसने लोगों को यह विचार जगा दिया कि परिवर्तन एक व्यक्ति से शुरू हो सकता है।
उनकी उसी निःस्वार्थ सेवा और निरंतर प्रयासों का सम्मान करते हुए उन्हें 'पद्माश्री' से सम्मानित किया गया है।
ये कहानी सिर्फ स्वच्छता की नहीं है, बल्कि उस विचार की है जो कहता है- अगर देश बदलना है, तो शुरुआत खुद से करनी होगी।
Jee55: 🇮🇳 भारत ने रचा नया इतिहास!
राहुल गांधी अक्सर कहते थे कि "मेक इन इंडिया" संभव नहीं है, लेकिन अब भारत ने इस दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
बेंगलुरु के स्टार्टअप VoxelGrids ने भारत की पहली स्वदेशी (Made in India) MRI मशीन विकसित की है। Zoho और अन्य सहयोगियों के समर्थन से तैयार की गई यह अत्याधुनिक MRI प्रणाली अब उपयोग के लिए तैयार है।
बताया जा रहा है कि यह मशीन पारंपरिक MRI सिस्टम की तुलना में लगभग 40% अधिक किफायती है और ऊर्जा की कम खपत करती है। यह उपलब्धि भारत की तकनीकी क्षमता, नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
'मेक इन इंडिया' अभियान के लिए यह एक बड़ी सफलता और देश के हेल्थकेयर सेक्टर के लिए गर्व का क्षण है। 🇮🇳
[25/06, 7:56 pm] +91 84019 87725: आज राममन्दिर का हिसाब वो लोग मांग रहे है जो कल तक राममन्दिर का खुलकर विरोध करते थे! आज वो कालनेमि खुद को रामभक्त बताकर उन लोगो को चोर कह रहे है जिन्होंने अयोध्या में भव्य राममन्दिर का संकल्प पूरा करने में अपना जीवन झोंक दिया !
अब राममन्दिर का तो कुछ बिगाड़ नही सकते है तो इसे बदनाम करने की साजिश की जा रही है?
राहुल , अखिलेश और केजरीवाल से मेरा सवाल है कभी वक्फ बोर्ड द्वारा किये गए कब्जों, घोटालों और मिशनरियों को मिलने वाली फंडिंग का हिसाब क्यो नही मांगते ? जिस प्रभू श्रीराम को कभी मानते ही नही हो, उनका हिसाब ही क्यो चाहिए ?
मोदी सरकार वक्फ बोर्ड को कानून के दायरे में ला रही थी तब विरोध क्यो किया ? क्या वक्फ बोर्ड संविधान से ऊपर है ?
धार्मिक फंडिंग को कानून के दायरे में लाने का विरोध क्यो कर रहे हो ? जबरन और लालच देकर धर्मांतरण पर लगाम लगाने का विरोध क्यो कर रहे हो? वहाँ तुम्हे न कानून चाहिए, न संविधान लेकिन जिस सनातन और श्रीराम का वर्षों विरोध किया वहाँ तुम्हे 15 दिन की जाँच रिपोर्ट की सब्र नही है! जबकि इसी राममन्दिर की सुनवाई वर्षो तक टलवाने के लिए बड़े बड़े वकील खड़े किए थे तुमने ? तब जल्दी क्यो नही थी ? 500 वर्ष कम थे इंतजार के लिए ?
चलो बताओ, तुम तीनो ने राममन्दिर में कितना चंदा दिया ?
एक रुपया भी तुम लोगो ने राममन्दिर में नही दिया! जबकि सत्ता में रहकर वक्फ बोर्ड पर किस तरह दोनो हाथों से देश की जमीनें और पैसा लुटाया था , गूगल पर सारे सबूत उपलब्ध है!
केजरीवाल ने तो बाकायदा वादा किया था दिल्ली वक्फ बोर्ड को सबसे अमीर बनाने का , जिसका वीडियो उपलब्ध है !
अखिलेश तो आगरा में मुगलों का म्यूजियम बनवा रहा था!
राहुल की तो बात ही छोड़ दो, इसके खानदान ने तो संविधान को तोड़ मरोड़कर हिन्दुओ को मजबूर करने वाले कानून ही बना डाले!
लेकिन राममन्दिर में एक रुपया नही दिया और आज हिसाब चाहिए ! वास्तव में इस हिसाब की साजिश के पीछे राममन्दिर को बदनाम करने की राजनैतिक साजिश छिपी है, जिसे हम कभी पूरी नही होने देंगे ! हर वास्तविक रामभक्त जानता है तुम कभी राम के हो ही नही सकते, क्योंकि तुम्हारी रगों में लाल नही बल्कि हरा खून दौड़ता है! जल्द ही सारी परते खुलेंगी और तुम्हारा मुंह फिर काला होगा !
जय श्रीराम 🙏
जय श्री सीताराम 🙏
TRN Live: अयोध्या स्थित राम मंदिर को निशाना बनाकर बड़े आतंकी हमले की कथित साजिश का खुलासा होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), उत्तर प्रदेश एटीएस और कर्नाटक पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में सहारनपुर के गंगोह क्षेत्र के एक युवक को कर्नाटक के दावणगेरे जिले से गिरफ्तार किया गया है।
आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान के नंबरों से संपर्क, संदिग्ध व्हाट्सएप ग्रुप और हथियारों के साथ खिंचवाई गई तस्वीरें मिलने के बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। गिरफ्तार युवक की पहचान गंगोह थाना क्षेत्र के लखनौती गांव निवासी 20 वर्षीय सुहैल के रूप में हुई है। वह पिछले कुछ समय से कर्नाटक के हरिहर औद्योगिक क्षेत्र में एक फैक्ट्री में पेंटर का काम कर रहा था।
J4: आज का राशिफल व पंचांग
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26 जून, 2026, शुक्रवार
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आज और कल का दिन खास
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26 जून 2026 : चम्पक द्वादशी आज।
26 जून 2026 : भटिंडा में बरहे मेला आज।
26 जून 2026 : नशा निषेध दिवस आज।
26 जून 2026 : वटसावित्री व्रत प्रारम्भ - (पूर्णिमा पक्ष वालों का।)
26 जून 2026 : मुस्लिम समुदाय आज मनाएगा मोहर्रम।
27 जून 2026 : शनि प्रदोष व्रत कल।
27 जून 2026 : बड़ा महादेव पूजा कल।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
मो. 9116089175
नोट- अगर आप अपना भविष्य जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करके या व्हाट्स एप पर मैसेज भेजकर पहले शर्तें जान लेवें, इसी के बाद अपनी बर्थ डिटेल और हैंडप्रिंट्स भेजें।
आज का राशिफल
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26 जून, 2026, शुक्रवार
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मेष राशि : आज के दिन आप बिना झंझट विश्राम कर सकेंगे। अपनी मांसपेशियों को आराम देने के लिए तेल से मालिश करें। आर्थिक तौर पर सुधार तय है। ऐसे दोस्तों के साथ बाहर जाएं, जो सकारात्मक और मददगार स्वभाव के हैं। कोई पौधा लगाएं। सामाजिक और धार्मिक समारोह के लिए बेहतरीन दिन है। आपके और आपके जीवनसाथी के दरमियान कोई अजनबी नोंकझोंक की वजह बन सकता है।
वृष राशि : जो धुंध आपके चारों तरफ़ छायी हुई है और आपकी प्रगति को बाधित कर रही है, उससे बाहर निकलने का समय है। चालाकी भरी आर्थिक योजनाओं में फँसने से बचें- निवेश करने में काफ़ी सावधानी बरतें। बच्चों के साथ विवाद मानसिक दबाव का कारण बन सकता है – ख़ुद को एक
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