यूपी में लैंड जिहाद:शादी कर आदिवासियों की जमीन हड़पने वालों का स्टिंग में कबूलनामा- मुस्लिमों को बसा रहे
मुझ पर रेप का केस दर्ज हो गया… जेल जाना पड़ता… सजा भी हो जाती। इसलिए रेप पीड़िता आदिवासी महिला से कोर्ट मैरिज कर ली। उसके नाम पर जमीनें खरीदीं। अपने लोगों को बसा रहे हैं। यूपी में आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा करने वालों ने खुद यह बात कबूल की। इसे लैंड जिहाद का नाम दिया जा रहा। यहां आदिवासियों की जमीन हड़पने के लिए अलग-अलग तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। कहीं आदिवासी महिलाओं से शादी करने के बाद उनके नाम से जमीन खरीदकर मुस्लिमों को बसाया जा रहा। कहीं जमीन तो आदिवासियों के नाम है, लेकिन उस पर कब्जे मुसलमानों के हैं। यूपी में ऐसे कितने मामले हैं? इसका अंदाजा केवल इस बात से लगाया जा सकता है कि अकेले सोनभद्र जिले में अब तक 100 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। शासन इनकी जांच कर रहा है। क्या यूपी में आदिवासयों की जमीनों को हड़पा जा रहा? इसके तरीके क्या-क्या हैं? ये लोग कौन हैं? इन सवालों के जवाब के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़िए, पूरा खुलासा… इन्वेस्टिगेशन के लिए हम लखनऊ से 440 किमी दूर सोनभद्र पहुंचे। यहां से 50 किमी दूर दुद्धी कस्बे और इसके आसपास के गांवों में आदिवासियों की जमीनों पर मुस्लिमों के कब्जों के मामले सामने आए हैं। इसका केंद्र दुद्धी है। यहां 20 साल पहले 60 मुस्लिम परिवार थे, जो अब बढ़कर 202 हो गए हैं। जब हमने इन मामलों की स्टडी की तो जमीन हड़पने को लेकर 4 पैटर्न सामने आए अब चलिए, इन चारों पैटर्न को सिलसिलेवार समझते हैं। इनसे जुड़े मामलों की तह तक जाते हैं। हमारे सामने सबसे पहला नाम बहादुर अली का आया। बहादुर ने आदिवासी महिला से रेप किया। जब FIR हो गई, तो सजा से बचने के लिए उससे कोर्ट मैरिज कर ली। बहादुर अली ने अब तक 19 जगह पत्नी के नाम पर जमीन खरीदी। इन जमीनों पर अपने रिश्तेदारों को बसा रहा है। हम खुफिया कैमरा लगाकर बहादुर अली से मिले। उसने खुद को निर्दोष बताते हुए आदिवासी महिला से कोर्ट मैरिज का किस्सा सुनाया। रिपोर्टर: आपने दूसरी शादी आदिवासी महिला से क्यों की? बहादुर अली: मेरी पहली शादी 1969 में हुई थी। दूसरी शादी आदिवासी महिला रजिया से 1986 में हुई। मेरी दूसरी पत्नी के पिता और भाई हमारे हरवारे (खेती का काम करने वाले) थे। एक जमीन के सिलसिले में यहां के लोकल लोगों ने हमारे ऊपर रजिया से आरोप लगवा दिया कि रेप किया। यह आरोप थाने पहुंचा तो मैंने अपने लोगों से सलाह ली। रास्ता निकाला कि इससे कोर्ट मैरिज कर लो, नहीं तो बच नहीं पाओगे। इस बात की जानकारी जब रजिया के पहले पति को हुई तो उसने इसे छोड़ दिया। तब हमने शादी कर ली, तभी से यह हमारे साथ है। रिपोर्टर: जब शादी हुई तो रजिया का नाम क्या था? बहादुर अली: जब शादी हुई तो उनका नाम दुलरिया था। चूंकि यह पुकारू नाम था, इसलिए हम लोगों ने रजिया कर दिया। अब यह रजिया उर्फ दुलरिया लिखती है। रिपोर्टर: रजिया आपकी पत्नी है। लेकिन, आपने उनके नाम पर जो जमीनें खरीदीं उसमें उनके पिता का नाम दर्ज है। ऐसा क्यों? बहादुर अली: कनहर परियोजना चल रही थी। हम लोगों को पुनर्स्थापित होना था, हमें पैकेज मिल रहा था। 2012 में तब हमने तहसील में इनके जाति प्रमाणपत्र का आवेदन किया। हमने नाम दुलरिया दिया, लेकिन लेखपाल को कहीं से पता चला। इस पर उसने रजिया उर्फ दुलरिया पनिका पुत्री सरदार के नाम पर बना दिया। तब हमने 2013 से जमीन खरीदना शुरू किया। रिपाेर्टर: जो भी जमीनें खरीदीं, उनमें आपकी पत्नी के नाम के आगे उनके पिता का नाम है? आपका नाम नहीं है? इससे यही लग रहा है कि आपने उनकी जाति का मिसयूज किया है? बहादुर अली: देखिए, अगर मेरा नाम शामिल होता तो जाति की समस्या होती। फिर जाति प्रमाण-पत्र कारगर नहीं होता। रिपोर्टर: आखिर इस इलाके में ऐसा पैटर्न क्यों दिख रहा है कि मुस्लिम व्यक्ति आदिवासी महिला से शादी कर रहा? जमीनें खरीद रहा? इसीलिए आपके ऊपर लैंड जिहाद का आरोप लगा है? बहादुर अली: यहां ऐसा पैटर्न है कि जमीन भले ही किसी के नाम हो, पहले बस जाओ। फिर कोई सर्वे वगैरह होगा तो जिसके नाम जमीन है। वह अगर आपके पक्ष में बयान दे दे, तो जमीन आपके नाम हो जाती थी। सुंदरी गांव से जो मुसलमान विस्थापित होकर बघाड़ू गांव आए, अगर जड़ में जाएंगे… तो उनकी जमीनें भी किसी न किसी आदिवासी के नाम पर ही मिलेंगी। इसके बाद जब सर्वे हुआ तो ट्रांसफर हुईं। फिर जिन लोगों ने जमीन ली… इसी विश्वास में ली कि जब भी सर्वे होगा, तो जिसके नाम जमीन है… उससे बयान दिलाकर जमीन अपने नाम लिखा लेंगे। आदिवासी पत्नी के नाम जमीन खरीदकर भांजे को दे दी बहादुर अली ने अपनी जमीन पर जिस शख्स एनुल हक को रहने को कहा था, उसे अपना भांजा बताया। वह दूसरे गांव अमवार से आकर यहां रहने वाला था। हालांकि, मामला खुलने के बाद वह अपने घर चला गया है। हमने उससे भी बात की। एनुल ने बताया कि बहादुर अली हमारे मामा लगते हैं। उनके घर से 3-4 किमी दूर अमवार गांव पड़ता है। हम वहीं के रहने वाले हैं। मामा ने जब जमीन खरीदी, तो उन्होंने हमें दान कर दी थी। लेकिन, मामले में विवाद होने की वजह से हमने वह जगह छोड़ दी है। हम गांव की आदिवासी युवती रजनी (बदला हुआ नाम) के घर पहुंचे। रजनी ने कुछ महीने पहले गांव के दबंगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। इसमें कहा था- उन्होंने धमकी दी कि इस्लाम कबूल कर हमसे निकाह कर लो, नहीं तो काटकर फेंक देंगे। दरअसल, इस मामले का मुख्य आरोपी बहादुर अली है, जिसने आदिवासी महिला का रेप कर शादी की थी। अब वह अपने बेटे की शादी रजनी से कराना चाह रहा है, जिससे रजनी के नाम पर आदिवासियों की जमीनें खरीदकर लैंड जिहाद कर सके। रजनी ने बहादुर अली की साजिश के बारे में खुलकर बताया। रिपोर्टर: आपका क्या मामला है? रजनी: जो बहादुर अली हैं। हम कॉलेज जाते थेष तो आदमी लगा देता था। कहता था कि हमारे 4 बेटे हैं, शादी कर लो, धर्मपरिवर्तन कर लो। बहादुर अली ने जैसे हिंदू से शादी की है, वैसे ही हमसे भी बोल रहा था कि हमारे लड़के से शादी कर लो। घर बनवा देंगे, पैसा देंगे। कॉलेज जाने पर आदमी लगा देता था। इसलिए डर के मारे हमने पढ़ाई-लिखाई छोड़ दी, इसलिए पेपर भी मेरा छूट गया। रिपोर्टर: कब की बात है ये सब? रजनी: करीब 6 महीने पहले की है। ये सब परेशान करते रहे। हम जहां भी जाते थे… तो नसीमउद्दीन, अब्दुल सुभान ये सब लगे रहते थे। जहां भी देखते… कहते- आओ गाड़ी में बैठो, छोड़ देंगे। हम बोलते कि अगर हमको जाना होगा तो हम चले जाएंगे। यही सब होता रहा। जब जेल से ये लोग छूटकर आए तो फिर हमको धमकाने लगे। जान से मारने की बात करने लगे। कहते थे- मारकर फेंक देंगे। रिपोर्टर: जमीन का क्या मामला है? रजनी: ये जो जमीन है, वह बहादुर अली की है। जमीन का विवाद था… मम्मी से विवाद था। हमको भी परेशान करने लगे। रिपोर्टर: अगर रास्ता बंद हो जाएगा, तो कैसे निकलोगे? रजनी: इसीलिए तो हम पर वह शादी का दबाव बना रहा था। रिपोर्टर: पिताजी क्या करते हैं? रजनी: वे लाई भूजते हैं, दिव्यांग हैं। हम 4 बहन हैं, एक छोटा भाई है। हम लोगों से बोले- लड़की-लड़की हो, क्या कर लोगी? रिपोर्टर: क्या बहादुर अली लोग दबंग हैं? रजनी: बहादुर अली भूमाफिया है। वह जमीन खरीदेगा और बाहरी लोगों को बसाएगा। रिपोर्टर: अपनी पत्नी के नाम पर खरीदता है क्या? रजनी: हां, हिंदू से शादी की है। उसी के नाम पर खरीदकर जमीन बेच रहा है। बाहर के लोगों को बसा रहा है। रिपोर्टर: जिन लोगों को अपनी जमीन पर बसाया है, वह लोग कहां हैं? रजनी: वह लोग कभी यहां रहे नहीं, वह सब यहां के रहने वाले तो नहीं हैं। हमको ज्यादा जानकारी नहीं है। अब हमें जानकारी मिली कि सिराजुद्दीन ने भी आदिवासी महिला से शादी की है। हम उन्हें खोजते हुए दुद्धी से 20 किमी दूर बघाडू गांव पहुंचे। यहां हमें सिराजुद्दीन का परिवार मिला। सिराजुद्दीन ने 2 शादियां की हैं। पहली शादी मुस्लिम महिला से और दूसरी आदिवासी महिला से की है। जिस आदिवासी महिला से शादी की, उसका नाम ननकी है। घर पहुंचने पर पता चला कि कुछ साल पहले सिराजुद्दीन की मौत हो चुकी है। ननकी भी घर पर नहीं मिलीं। हमने ननकी की बहू से बात की, लेकिन कोई खास जानकारी नहीं मिली। इसके बाद हमने कागजों को खंगाला तो पता चला कि ननकी के नाम पर अलग-अलग इलाकों में 7 प्लाॅट हैं। जो सिराजुद्दीन ने खरीदे थे। रिपोर्टर: ननकी कहां गई हैं? ननकी की बहू: पता नहीं। उनके बेटे हैं, बेटी हैं। कहीं भी जा सकती हैं। रिपोर्टर: आप क्या लगती हैं उनकी? ननकी की बहू: हम उनकी बहू लगते हैं। रिपोर्टर: आपके पति क्या करते हैं? ननकी की बहू: हमारे पति गुजरात में काम करते हैं। रिपोर्टर: कितनी जमीन आपकी सास के नाम है? ननकी की बहू: अब आप आए हैंष तो आपको पता ही होगा? रिपोर्टर: आपकी अपनी सास से पटती नहीं है क्या? ननकी की बहू: अब सास-बहू में थोड़ा-बहुत तो होता ही रहता है। जो लोग ऊपर दिए तीन तरीकों से जमीन हासिल नहीं कर पाए, उन्होंने चौथा पैटर्न अपनाया। इसमें किसी तरह का कानूनी उल्लंघन नहीं है। आदिवासी महिलाओं को फायदा भी हो रहा है। जब भी शासन की कार्रवाई होगी तो आदिवासी महिला के नाम पर जमीन खरीदने के लिए पैसा देने वालों को ही नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसा ही एक मामला हमने गांव में खोज निकाला। यहां बघाडू गांव के लंगड़ी मोड़ पर 5 बिस्वा जमीन है। जिसकी रजिस्ट्री आदिवासी महिला कुंती जगते के नाम पर है, लेकिन कब्जा उसका नहीं है। इस जमीन पर गुलाम सरवर ने कब्जा कर रखा है। गुलाम सरवर से जब हमने बातचीत की तो उसने गुमराह करने की कोशिश की। रिपोर्टर: अभी यह सब मामले क्यों उठ रहे हैं? गुलाम सरवर: अब यही चल रहा है कि धर्म के आधार पर जमीनें लिखाकर मुस्लिम बस रहे हैं। लेकिन हम लोग तो हैं नहीं। रिपोर्टर: जब कुंती जगते ने जमीन खरीदी तो आप और मुस्तकीम दो लोग गवाही में थे। तो आप लोग पहले से संपर्क में थे या बाद में आए हैं? गुलाम सरवर: जब हमें पता चला कि एससी/एसटी की जमीन बिक रही है। तो हमने कहा कि आप लोग ले लीजिए, बनवा दीजिए। हम लोग ले लेंगे। अब हमको याद नहीं है कि हम गवाही किए हैं कि नहीं किए हैं। गुलाम सरवर ने हमें गुमराह करने की कोशिश की। हकीकत ये है कि कुंती के नाम से जब जमीन की रजिस्ट्री कराई तो उस पर गुलाम सरवर के गवाही के हस्ताक्षर हैं। इसके बाद हमने गांव के व्यक्ति अब्दुल सुभान से बात की। उसने इस गुत्थी से पर्दा उठाया। रिपोर्टर: ये गुलाम सरवर और कुंती जगते वाला क्या मामला है? अब्दुल सुभान: ये भी किसी गोड़िन (अनूसूचित जनजाति) के नाम पर जमीन रजिस्ट्री कराए हैं। रिपोर्टर: आप कह रहे हो कि गुलाम सरवर ने दूसरे के नाम पर जमीन रजिस्ट्री कराई हैं? अब्दुल सुभान: हां… यही है…। रिपोर्टर: कुंती जगते से कैसे संपर्क में आए ये लोग…? अब्दुल सुभान: यह लोग सुंदरी गांव से छत्तीसगढ़ गए… उसी के नाम से यहां रजिस्ट्री कराए हैं। रिपोर्टर: मतलब यह हो रहा है कि आदिवासी महिला से शादी करो और जमीन रजिस्ट्री कराओ? अब्दुल सुभान: यह पहले हो रहा था। जो पहले शादी कर लिए… वह लोग तो ऐसे ही करते हैं। लेकिन अब जो आदिवासियों की जमीन है, उनसे ये लोग बातचीत करते हैं। दबाव व पैसा देकर उनके नाम पर ही जमीन खरीद लेते हैं। उसके बाद बस जाते हैं। अब ऐसे हो रहा है। 4 लाख की जमीन खरीदते हैं, तो 50 हजार आदिवासी को दे देते हैं। खाली नाम लिखवाने में क्या जाता है? रिपोर्टर: अगर आदमी पलट जाए, तब क्या होगा? अब्दुल सुभान: तब तो सब खत्म हो जाएगा न यहां विश्वास ज्यादा है। गांव में लैंड जिहाद की जड़ें कितनी मजबूत? इस सवाल के जवाब के लिए हम गांव के बाहर होटल चला रहे भाेला से मिले। भोला ने हमें बताया कि यहां बहुत से लोग ऐसे हैं, जिन्होंने आदिवासी महिलाओं से शादी की और अब उनके नाम से आदिवासियों की जमीनें खरीदकर बेच रहे हैं। रिपोर्टर: क्या यहां वाकई मुस्लिम, आदिवासी महिलाओं से शादी करके जमीनें खरीद रहे? भोला: यह जो मामला बहादुर अली के जरिए तूल पकड़ रहा है। इसके पीछे यह है कि जब किसी आदमी को सफलता मिल जाती है तो मन बढ़ने लगता है। मन बढ़ते-बढ़ते इतना बढ़ गया कि जहां विवादित जमीन होती, वहीं हाथ डालकर लेने लगा और व्यवसाय को अपना बढ़ाने लगा। रिपोर्टर: क्या व्यवसाय करते हैं? भोला: जमीन लेना और बेच देना। जब विवादित जमीन लेंगे तो ऑटोमेटिक आदिवासियों से विवाद छिड़ेगा ही। क्योंकि आदिवासी का कब्जा है। नाम किसी के है, रजिस्ट्री कहीं हुई। फिर जब कब्जा होगा तो विवाद होगा ही। रिपोर्टर: क्या यहां सिर्फ बहादुर अली ऐसा कर रहा है या और भी लोग कर रहे? भोला: बहुत सारे लोग अभी सामने नहीं हैं। लेकिन अब बहादुर अली की वजह से सारे लोग लाइमलाइट में आ जाएंगे। रिपोर्टर: क्या यह पैटर्न अब भी चल रहा है कि आदिवासी से मुस्लिम शादी कर रहे हैं? भोला: अब किसी का मंसूबा तो नहीं जानते हैं, लेकिन हमने किसी आदिवासी से शादी कर ली। क्योंकि अंतरजाति शादी का कानूनी अधिकार है। उसके आधार पर शादी कर लिए और उसके नाम पर जमीन खरीदना हमारे लिए आसान हो जाता है। अब कुछ लोग इस तरह का लाभ उठाए हैं। इसलिए अब ये लोग फंस रहे हैं। जो मामले सामने आए हैं, उनकी जांच कर रहे हैं
इस मामले में जब सोनभद्र के DM बद्रीनाथ सिंह से बात की, तो इस संबंध में प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। इसके बाद एसपी अभिषेक वर्मा से बात की। उन्होंने जांच की बात कही। --------------------- ये खबर भी पढ़ें… UP की ट्रेनों में रिश्वत का सिस्टम अटेंडर्स पर शिफ्ट, सुरक्षा से खिलवाड़ कर बेच रहे सीट, TTE खा रहे आधा पैसा प्रयागराज तक जाना है ना… कोई दिक्कत नहीं। यहां लेट जाइए, ये हमारी सीट है। दो लोगों के 600 रुपए लगेंगे। टीटी को मैं 300 रुपए दूंगा, टीटी चुप हो जाएगा… कुछ नहीं कहेगा। 300 रुपए उसके हो जाएंगे और 300 रुपए मेरे हो जाएंगे…। यूपी में ट्रेनों के AC कोच में रिश्वत लेकर एंट्री दी जा रही। यह काम अटेंडर्स के जरिए TTE (Travelling Ticket Examiner) करवा रहे, ताकि रिश्वत लेते पकड़े न जाएं। इधर, अटेंडर आउटसोर्स के कर्मचारी होते हैं, इसलिए उन पर रेलवे एक्शन नहीं ले पाता। पढ़ें पूरी खबर
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