5वीं सीट मिली, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा जीतेंगे कैसे:ओवैसी जिताएंगे या नीतीश कांग्रेसियों को साथ लाएंगे, कुशवाहा के जीत के 3 रास्ते
NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) में बिहार की राज्यसभा की 5 सीटों का फॉर्मूला सेट हो गया है। 2-2 सीटों पर BJP-JDU अपना प्रत्याशी देगी। 5वीं सीट पर RLM (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा चुनाव लड़ेंगे। कुशवाहा ने प्रेशर बनाकर 5वीं सीट तो अपने खाते में ले ली, लेकिन क्या वह जीत पाएंगे। 4 विधायकों वाली पार्टी RLM को जीतने के लिए NDA के विधायकों के साथ-साथ विपक्ष के 3 विधायकों का वोट चाहिए। BJP ने कुशवाहा को 5वीं सीट देकर क्या फंसा दिया है। वह किस समीकरण के तहत चुनाव जीत सकते हैं। बिहार में क्या क्रॉस वोटिंग होगी। इन्हीं सवालों का जवाब…आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः बिहार की कितनी सीटों पर कब चुनाव होगा? जवाबः बिहार में राज्यसभा की 5 सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं। जिसमें JDU कोटे की 2, RJD कोटे की 2 और RLM की एक सीट है। सवाल-2ः 5 सीटों के लिए किस पार्टी ने किसे उम्मीदवार बनाया है? जवाबः NDA ने सभी पांचों सीटों पर प्रत्याशी उतारने का फैसला किया है। JDU 2 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर JDU के टिकट पर नामांकन करेंगे। वहीं, भाजपा ने 2 प्रत्याशियों राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश कुमार के नाम का ऐलान किया है। सवाल-3ः कौन पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव जीत सकती है? जवाबः संविधान के ऑर्टिकल-80 (4) के मुताबिक, राज्यसभा सांसदों को विधायक एकल संक्रमणीय वोट के आधार चुनते हैं। एकल संक्रमणीय मत प्रणाली मतलब वोटर (विधायक) एक ही वोट देते हैं, लेकिन वह कई उम्मीदवारों को अपनी प्राथमिकता के आधार पर अरेंज करते हैं। पहली वरीयता पर कौन उम्मीदवार है और दूसरे पर कौन और तीसरी पर कौन? राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या के कैलकुलेशन के लिए चुनाव आयोग ड्रॉप कोटा फॉर्मूले को लागू करता है। ड्रॉप कोटा फॉर्मूला: कोटा (Q) = ⌊ कुल वैध वोट / (सीटें + 1)। अब बिहार के संदर्भ में इस फॉर्मूले को समझिए… Q= 243/ (5=1)= 40.5 मतलब 41। 5 सीटें जीतने के लिए कुल वोट चाहिए: 5×41=205। NDA के विधायक: 202 वोट। घाटा: 205-202=3 वोट। मतलब NDA को 4 सीटें आसानी से मिल जाएंगी। उसके पास 202 विधायक हैं। 41 वोट के लिहाज से 4 सीटें जीत के लिए 164 विधायक लगेंगे। इसके बाद NDA के पास 38 विधायक बचेंगे और 5वीं सीट जीतने के लिए उसे 3 और विधायकों का समर्थन चाहिए। वहीं, महागठबंधन के पास अभी 35 विधायक हैं। उसे अगर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के सभी 5 और बसपा विधायक का साथ मिला तो एक सीट जीत सकता है। सवाल-4ः …तो क्या उपेंद्र कुशवाहा की सीट फंस गई है? जवाबः अंकगणित को देखें तो लगता है कि सीट निकालना टफ है, लेकिन राजनीति सिर्फ अंकगणित से नहीं चलती। कुशवाहा को सत्ता और पुराने रिश्ते का फायदा मिल सकता है। अपने टिकट के ऐलान के बाद कुशवाहा ने कहा, 'अगर तेजस्वी यादव अपनी पार्टी की तरफ से उम्मीदवार बनते हैं, तो यह उनका मामला है। उस पर मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी है, लेकिन वह किसी भी हालत में नहीं जीतेंगे। वह उम्मीदवार हो सकते हैं।' मतलब साफ है कि कुशवाहा अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं। कुशवाहा 3 समीकरण से चुनाव जीत सकते हैं… 1. ओवैसी से पुराने रिश्ते काम आ सकते हैं उपेंद्र कुशवाहा समाजवादी विचारधारा से ताल्लुक रखते हैं। उनका बिहार की सभी पार्टियों से गठबंधन रह चुका है। 243-5=238 कुल वैध वोट। तब Q= 238/ (5=1)= 39.6 मतलब 40। मतलब कुशवाहा को सिर्फ और 2 विधायकों की जरूरत होगी। जिसे वह कांग्रेस-बसपा से पूरी कर सकते हैं। 2. कांग्रेस विधायकों से क्रॉस वोटिंग कराकर 2025 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 6 विधायक जीतकर आए हैं। पार्टी के अंदर अभी सब कुछ ठीक नहीं है। समय-समय पर अंसतोष की खबरें आ रही है। यही कारण है कि चुनाव बीते साढ़े 3 महीने हो गए, लेकिन अब तक विधायक दल का नेता नहीं चुना जा सका है। कांग्रेस के 3 विधायकों का ताल्लुक कुशवाहा और नीतीश कुमार से… सुरेंद्र प्रसादः पहली बार विधायक बने, NDA से लड़ चुके हैं चुनाव वाल्मीकि नगर से सुरेंद्र प्रसाद पहली बार चुनाव जीते हैं। 2015 में वह उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLSP से NDA की तरफ से चुनाव लड़ चुके हैं। तब हार गए थे। मनोहर प्रसाद सिंहः नीतीश के कहने पर कांग्रेस में गए थे मनिहारी से चौथी बार विधायक बने मनोहर प्रसाद सिंह पुराने JDU के नेता हैं। पुलिस सेवा से रिटायरमेंट के बाद 2005 में JDU से जुड़े। 2010 में JDU के टिकट पर पहली बार चुनाव जीते। मनोज विश्वासः JDU- RJD से पुराना नाता, चुनाव से पहले कांग्रेस में आए 3. विपक्ष के विधायकों का वोट इनवेलिड कराकर कुशवाहा NDA के कैंडिडेट हैं। ऐसे में उन्हें सत्ता का साथ मिल सकता है। वह विपक्ष के विधायकों को समझाबुझाकर वोट देने के लिए मना सकते हैं। अगर विपक्ष के विधायक वोट नहीं देते हैं तो उन्हें वोट इनवेलिड कराने के लिए मोटिवेट कर सकते हैं। चूंकि राज्यसभा में वोटर नोटा का इस्तेमाल नहीं कर सकता। वह या तो वोट देगा या उससे दूर रह सकता है। वोट इनवेलिड करने के 2 तरीके…
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