NSUI चीफ बने राजस्थान के विनोद जाखड़, क्या इन्हें अलग से सैलरी देती है कांग्रेस?

Feb 21, 2026 - 10:18
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NSUI चीफ बने राजस्थान के विनोद जाखड़, क्या इन्हें अलग से सैलरी देती है कांग्रेस?

राजस्थान की छात्र राजनीति से उठी एक आवाज अब राष्ट्रीय मंच तक पहुंच गई है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने विनोद जाखड़ को एनएसयूआई का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया है. यह फैसला सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि 55 साल के इतिहास में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. लेकिन इस फैसले के साथ एक सवाल भी चर्चा में है कि क्या छात्र संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष को कांग्रेस अलग से सैलरी देती है, या यह जिम्मेदारी सिर्फ संगठनात्मक भूमिका है?

55 साल में पहली बार राजस्थान को कमान

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने राजस्थान के विनोद जाखड़ को National Students' Union of India यानी NSUI का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है. यह पहली बार है जब संगठन के 55 साल के इतिहास में यह जिम्मेदारी राजस्थान के किसी नेता को मिली है. अब तक एनएसयूआई की कमान अलग-अलग राज्यों के नेताओं के पास रही, लेकिन इस बार राजस्थान के छात्र नेता पर भरोसा जताया गया है. 

प्रदेश से राष्ट्रीय मंच तक का सफर

जनवरी 2024 में विनोद जाखड़ को राजस्थान एनएसयूआई का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. इस दौरान उन्होंने छात्र हितों से जुड़े कई मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई. राजस्थान यूनिवर्सिटी में आरएसएस के कार्यक्रमों का विरोध हो या छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग, उन्होंने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया था. संघर्ष के दौरान उन्हें कई बार हिरासत में भी लिया गया, लेकिन संगठन के भीतर उनकी सक्रियता और आक्रामक शैली ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनके कामकाज को नोटिस किया. 

क्या जाखड़ को अलग से मिलती है सैलरी?

नियुक्ति के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष को कांग्रेस पार्टी अलग से वेतन देती है? जानकारी के मुताबिक, एनएसयूआई कांग्रेस का छात्र संगठन है और इसके पद आम तौर पर संगठनात्मक और स्वैच्छिक माने जाते हैं. यह कोई सरकारी या संवैधानिक पद नहीं है. आम तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं को नियमित सैलरी नहीं दी जाती है. वे संगठन के लिए काम करते हैं, आंदोलन चलाते हैं और राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेते हैं.

हालांकि, पार्टी के स्थायी कार्यालय कर्मचारियों या विशिष्ट पदों पर बैठे लोगों को उनके काम के बदले वेतन या मानदेय मिल सकता है. इसलिए राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भी औपचारिक वेतन वाला पद नहीं माना जाता है. यह जिम्मेदारी संगठन को मजबूत करने और छात्र मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने से जुड़ी होती है.

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