Vipin Rathour Mamta TRN: (विपिन राठौर मीरापुर मुज़फ्फरनगर )किशोरी को भगा ले जाने वाला मुस्लिम युवक गिरफ्तार मीरापुरः क्षेत्र के एक गांव में अपनी बुआ के घर आई हुई एक किशोरी को दो दिन पूर्व
मीरापुर मुज़फ्फरनगर )गांव नंगला खेपड़ निवासी ब्रहमसिंह पुत्र सुखबीर ने मुकदमा दर्ज कराया कि शुक्रवार की
Vipin Rathour Mamta TRN: (विपिन राठौर मीरापुर मुज़फ्फरनगर )किशोरी को भगा ले जाने वाला मुस्लिम युवक गिरफ्तार
मीरापुरः क्षेत्र के एक गांव में अपनी बुआ के घर आई हुई एक किशोरी को दो दिन पूर्व मेरठ के सरधना निवासी गुलफाम पुत्र इद्दू बहला फुसलाकर भगा ले गया था। पुलिस ने शनिवार को किशोरी को बरामद करने के बाद आरोपित को भी घर से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया। जहां से उसे जेल भेजा गया है। बता दें कि मामला दो समुदाय का होने के चलते गांव में तनाव था। पुलिस ने 24 घंटे के भीतर ही किशोरी को बरामद कर लिया था।
Vipin Rathour Mamta TRN: (विपिन राठौर मीरापुर मुज़फ्फरनगर )मुजफ्फरनगर-बिजनौर हाईवे पर मीरापुर क्षेत्र में एक लकड़ी से भरा ट्रक डिवाइडर से टकराकर पलट गया। यह हादसा एक कार को बचाने के प्रयास में हुआ, जिसमें ट्रक चालक और परिचालक घायल हो गए।
यह घटना जनपद मुजफ्फरनगर के मीरापुर क्षेत्र में मुजफ्फरनगर-बिजनौर हाईवे पर मोंटी तिराहे के पास हुई। ट्रक बस्ती जनपद के पलटन गांव से लकड़ी भरकर यमुनानगर जा रहा था।
ट्रक परिचालक मिंटू उर्फ करतार, जो यमुनानगर के निवासी हैं, ने बताया कि ट्रक चालक राजेंद्र सिंह करनाल, हरियाणा के रहने वाले हैं। मोंटी तिराहे के समीप पहुंचने पर एक कार को बचाने के चक्कर में ट्रक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गया और पलट गया।
इस दुर्घटना में चालक राजेंद्र और परिचालक मिंटू उर्फ करतार दोनों घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया है।
] Vipin Rathour Mamta TRN: (विपिन राठौर मीरापुर मुज़फ्फरनगर )गांव नंगला खेपड़ निवासी ब्रहमसिंह पुत्र सुखबीर ने मुकदमा दर्ज कराया कि शुक्रवार की शाम उसके भतीजे संुदर पुत्र महकार व सौरभ पुत्र रवींद्र खेत में काम कर रहे थे, तभी रूपेंद्र पुत्र संतर व प्रवेंद्र उर्फ भूरा पुत्र कालूराम ने कहासुनी के बाद दोनों के साथ मारपीट कर दी। आरोप है कि दोनों वहां से बचकर घर पहंुचे तो संतर, रूपेंद्र, मनदीप, अरूण, प्रवेंद्र व शिवा ने घर में घुसकर जानलेवा हमला कर दिया। बता दें कि इस मामले में दूूसरे पक्ष की ओर से नेहा पुत्री भूपेंद्र ने भी 11 हमलावरों के खिलाफ बलवा व जानलेवा हमले जैसी धारा में मुकदमा दर्ज कराया था।
ल] Vipin Rathour Mamta TRN: (विपिन राठौर मीरापुर मुज़फ्फरनगर )अथर्व हॉस्पिटल के एमडी डॉ आलोक शर्मा ने वीडियो जारी कर झोलाछाप चिकित्सक व मैडिकल स्टोर संचालकों की खोली पोल
डॉ आलोक ने बिना किसी डायग्नोज के ईलाज कर मरीजों के जीवन से खिलवाड़ के आरोप लगाए
मीरापुर।संवाददाता-मीरापुर के अथर्व हॉस्पिटल के एमडी डॉ. आलोक शर्मा ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर मीरापुर में चिकित्सा जगत में चल रहें भ्रष्टाचार की पोल खोली।उन्होंने कस्बें के झोलाछाप चिकित्सकों व कुछ मैडिकल स्टोर संचालकों पर मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए लोगों को ऐसे उपचार से बचने की सलाह दी।
डॉ आलोक शर्मा ने रविवार को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करते हुए आम नागरिकों को जागरूक करते हुए बताया कि मीरापुर कस्बें में अप्रशिक्षित चिकित्सक व मैडिकल स्टोर संचालक मरीजों का ईलाज कर रहें है।उन्होंने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि अप्रशिक्षित चिकित्सक व मैडिकल स्टोर संचालक बिना किसी डायग्नोज के मरीजों को ईलाज कर रहे है तथा उन्हें स्टोरायड देकर घर भेज देते है।मरीजों के तीमारदारों से मोटी रकम वसूलते है। बाद में मरीजों की हालत बिगड़ जाती है।डॉ आलोक ने आरोप लगाया कि उक्त अप्रशिक्षित चिकित्सक व मैडिकल स्टोर संचालक लोगों को प्राइमरी उपचार देने में सक्षम नही है।डॉ आलोक शर्मा ने लोगों को ऐसे अप्रशिक्षित चिकित्सकों व मैडिकल स्टोर संचालकों को बहरूपियों की संज्ञा देते हुए इनसे सचेत रहने की सलाह दी।बता दें कि मीरापुर क्षेत्र में चिकित्सा विभाग की मिलीभगत से बिना प्रशिक्षित चिकित्सकों के दर्जनों अवैध अस्पताल चल रहें है।जहाँ धड़ल्ले से झोलाछाप द्वारा ऑपरेशन किये जा रहे है।तथा कई बार लोगों की जान भी जा चुकी है।किन्तु शिकायत के बाद भी इन पर कार्यवाही के नाम पर केवल औपचारिकता होती है।
-वीडियो जारी करने वाले अथर्व हॉस्पिटल के एमडी डॉ आलोक शर्मा
टी] Vipin Rathour Mamta TRN: (विपिन राठौर मीरापुर मुज़फ्फरनगर )दामाद और उसके दोस्त को ससुरालियों ने पीट पीटकर अधमरा किया
पत्नी को भाई व दोस्त के साथ ससुराल लेने आया था दामाद
मीरापुर।-छुट्टियों में मायके आई हुई पत्नी व बच्चों को भाई व दोस्त के साथ लेने ससुराल आये दामाद व उसके दोस्त को ससुरालियों ने पीट पीटकर अधमरा कर दिया।पीड़ित दामाद ने सास-ससुर,पत्नी व साढू को नामजद व 10-15अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया है।
मेरठ जनपद के थाना परीक्षितगढ़ के गांव दुर्वेशपुर निवासी रवि पुत्र राजेन्द्र ने मीरापुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है कि करीब 8 वर्ष पूर्व उसकी शादी मीरापुर थानाक्षेत्र के गांव मुकल्लमपुरा निवासी आरती पुत्री ब्रजपाल के साथ हुई थी।शादी के बाद दोनों के दो बच्चें है।वर्तमान में उसकी पत्नी 5 माह की गर्भवती है।आरोप है कि रवि के ससुराल वाले आर्थिक रूप से कमजोर है जिसके चलते उसकी पत्नी अक्सर उससे रुपये लेकर मायके भेजती रहती है।इसके बाद भी पत्नी व ससुराल वाले अक्सर उससे लड़ते रहते है और बिना पंचायत के उसकी पत्नी को साथ नही भेजते है।रवि के अनुसार उसकी पत्नी 2 जून को मायके आयी थी।जिसे लेने के लिए रवि अपने भाई कमल व अपने दोस्त सोनू के साथ मुकल्लमपुरा आया था।आरोप है कि जैसे वह यहाँ पहुँचा तो उसकी ससुराल वालों ने 10-15 अज्ञात बदमाश बुला रखें थे तथा उन्हें देखते ही सास सुनीता,ससुर ब्रजपाल,साढू संजय ,पत्नी आरती व 10-12 अज्ञात लोगों ने लाठी-डंडों व सरियों से उन पर हमला कर दिया तथा उसे व उसके दोस्त को पीट पीटकर अधमरा कर दिया और उन्हें मरा समझकर मौके से फरार हो गए।उसका दोस्त सोनू गंभीर हालत में बेहोश हो गया।जिस पर होश आने पर उसने पुलिस को सूचना दी।पुलिस भी उसके दोस्त को मरा समझ गई।पुलिस ने घायलों को उपचार के लिए भेजा।पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी।
: गुजरात: जामा मस्जिद में हिंदू-जैन मूर्तियाँ मिलने के बाद ASI का सर्वे
प्राचीन प्रतिमाएँ और नक्काशी मिली
हटाया गया अतिरिक्त ‘वजू खाना’
गुजरात के भरूच में स्थित कथित जामा मस्जिद के तहखाने में मिली मूर्तियों के बाद प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने तहखाने का सर्वे किया है। दरअसल, हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें इस कथित मस्जिद के बंद पड़े तहखाने में हिंदू और जैन धर्म से जुड़ी प्राचीन मूर्तियाँ नजर आ रही थीं।
इस वीडियो में भगवान गणेश, हनुमान और जैन तीर्थंकर मल्लिनाथ की प्रतिमा थीं। इस वीडियो के सामने आने के बाद इलाके के विभिन्न हिंदू व जैन संगठनों ने मामले की जाँच की माँग उठाई। इसके बाद प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने मस्जिद परिसर का निरीक्षण किया है और फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
टी: पागल!
*BJP की कैंडिडेट रेखा पात्रा (संदेशखली की पीड़िता) को अमित शाह की रैली से ठीक पहले TMC के गुंडों ने ABDUCTED कर लिया*
निशिकांत दुबे ने कुछ देर पहले शाह को बताया। शाह का जवाब? “मुझे उनका नंबर दो। रैली जारी रहेगी।”
कुछ ही मिनटों में, उनकी टीम ने उनकी लोकेशन ट्रेस कर ली, सिक्योरिटी भेजी गई, और रेखा पात्रा स्टेज पर वापस आ गईं।
पूरे वीडियो में अमित शाह का चेहरा देखें। कोई घबराहट नहीं। कोई कन्फ्यूजन नहीं।
बस पूरा शांत।
बाद में उन्होंने निशिकांत से यह भी पूछा कि क्या वह असली रेखा को स्टेज पर लाए थे या नहीं।
एक बड़ी पॉलिटिकल रैली से पहले एक महिला कैंडिडेट का गायब होना पूरे देश को हिला देना चाहिए था।
फिर भी, लुटियंस मीडिया, जो डेमोक्रेसी को बचाने का दावा करते हैं, की चुप्पी बहरा कर देने वाली थी।
जीतू: *हर साल जेठ की पूर्णिमा के दिन साल में एक बार जगन्नाथ के लिए सार्वजनिक स्नान होता है, इसके लिए ज़रूरी पानी जगन्नाथ मंदिर के उत्तरी दरवाज़े के पास एक कुएं से लिया जाता है। नहाने के लिए एक हज़ार आठ कलशों से पानी लिया जाता है। इस कुएं को स्वर्ण कूप कहते हैं। इस कुएं की खास बात यह है कि यह साल भर सूखा रहता है, कुएं में पानी की एक भी बूंद नहीं होती, लेकिन नहाने से एक दिन पहले यह कुआं अपने आप लबालब भर जाता है। इसी से पानी लिया जाता है और जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा को नहलाया जाता है। अगले दिन यह कुआं अपने आप सूख जाता है, पानी की एक भी बूंद नहीं बचती। आज तक किसी को पता नहीं चला कि पानी कहां से आता है और पानी कहां जाता है। यह कितनी अद्भुत घटना है। भक्तों का मानना है कि यह पानी वैकुंठ में विरजा नदी से आता है।*
*जय श्री जगन्नाथ*
जीतू दोहती: 👉👉 मोदी जी - भारत-फ्रांस संबंधों में क्या चुनौतियां हैं?
पुराने बड़े प्रोजेक्ट्स का रुका रहना: 9,900 MW के जैतापुर न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (JNPP) का लंबे समय से रुका होना एक बड़ी संरचनात्मक विफलता है।
15 से ज़्यादा सालों से, यह प्रोजेक्ट तकनीकी-व्यावसायिक असहमति (जैसे कि यूरोपियन प्रेशराइज्ड रिएक्टर्स (EPRs) के प्रति-यूनिट टैरिफ पर) और भारत के सख्त 'सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज (CLND) एक्ट, 2010' को लेकर फ्रांस की चिंताओं के कारण रुका हुआ है।
भू-रणनीतिक असमानताएं: इंडो-पैसिफिक के लिए साझा विज़न के बावजूद, दोनों देशों के लिए मुख्य खतरों के मामले अलग-अलग हैं।
फ्रांस की सुरक्षा संबंधी चिंताएं मुख्य रूप से महाद्वीपीय यूरोप (यूक्रेन संघर्ष) और फ्रैंकोफोन अफ्रीका पर केंद्रित हैं।
इसके विपरीत, भारत का मुख्य ध्यान हिमालय और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) पर है।
इसके अलावा, रूस के साथ भारत का लगातार रणनीतिक जुड़ाव कभी-कभी यूरोपीय राजनयिक संवेदनाओं की परीक्षा लेता है।
डिजिटल गवर्नेंस और रेगुलेटरी टकराव: जैसे-जैसे यह साझेदारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप-टेक की ओर तेज़ी से बढ़ रही है, रेगुलेटरी तालमेल की कमी एक बड़ी गैर-टैरिफ बाधा के रूप में उभर रही है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे DEPA) के प्रति भारत का विकासात्मक, ओपन-आर्किटेक्चर वाला दृष्टिकोण यूरोपीय संघ के बहुत सख्त और जोखिम से बचने वाले फ्रेमवर्क (खासकर GDPR और हाल ही में लागू EU AI एक्ट) से मेल नहीं खाता है।
व्यापार और रणनीति में असंतुलन: इस साझेदारी की भू-राजनीतिक गहराई और इसके आर्थिक प्रभाव के बीच भारी अंतर है।
दोनों देशों के बीच व्यापार अभी भी कम (15.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर) है। हालांकि भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर राजनीतिक बातचीत पूरी हो चुकी है, लेकिन समझौते को अभी लागू नहीं किया गया है, जिससे व्यापार और निवेश के प्रवाह का पूरा विस्तार नहीं हो पा रहा है।
भारत-फ्रांस संबंधों को मज़बूत करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से आगे बढ़ें: 'जॉइंट एडवांस्ड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट ग्रुप' को जेट इंजन, अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल्स (UCAVs) और स्पेस-बेस्ड डिफेंस सिस्टम जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को मिलकर विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए, जिसमें इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और ओनरशिप दोनों देशों की साझा हो।
सिर्फ़ देरी से चल रहे जैतापुर प्रोजेक्ट पर निर्भर रहने के बजाय, 2025 के 'डिक्लेरेशन ऑफ़ इंटेंट' के तहत SMRs (स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स) पर सहयोग को तेज़ करें।
व्यापार और आर्थिक सहयोग: ज़रूरी मिनरल्स, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और मज़बूत सप्लाई चेन के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 'इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग' का इस्तेमाल करें।
संतुलित AI गवर्नेंस क्वांटम तकनीक रोबोटिक्स को बढ़ावा दें: AI क्वांटम तकनीक रोबोटिक्स के लिए एक लोकतांत्रिक और इनोवेशन-फ्रेंडली तरीका बनाने के लिए 'जॉइंट AI क्वांटम तकनीक रोबोटिक्स वर्किंग ग्रुप' का इस्तेमाल करें, जो सुरक्षा और टेक्नोलॉजी के विकास के बीच संतुलन बनाए रखे।
त्रिपक्षीय साझेदारी को गहरा करें: जॉइंट पेट्रोलिंग, समुद्री अभ्यास और ब्लू इकोनॉमी पहलों के ज़रिए भारत-फ्रांस-ऑस्ट्रेलिया और भारत-फ्रांस-UAE त्रिपक्षीय सहयोग को मज़बूत करें।
समुद्री सुरक्षा बढ़ाएं: हिंद महासागर क्षेत्र में फ्रांसीसी बेस का इस्तेमाल करते हुए, पूरे इंडो-पैसिफिक में लॉजिस्टिक्स सहयोग, इंटेलिजेंस शेयरिंग और समुद्री क्षेत्र की जानकारी (मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस) का दायरा बढ़ाएं।
निष्कर्ष
रणनीतिक इरादों और ज़मीनी हकीकत के बीच की दूरी को कम करने के लिए, इस साझेदारी को खास द्विपक्षीय मैकेनिज्म (जैसे हाल ही में बना 'इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग') को संस्थागत रूप देना होगा। इससे ज़रूरी सप्लाई चेन और डिफेंस के क्षेत्र में मिलकर किए जाने वाले प्रोडक्शन को EU-स्तर की रेगुलेटरी बाधाओं से बचाया जा सकेगा।
जितेन्द्र कुमार: पीटर थील की दुनिया एक गहरे अंधकार से भरी लगती है, जहां दूरदर्शी के मुखौटे के नीचे ऐसी ताकतें सक्रिय हैं जो इंसानी अस्तित्व को ही निगलने को तैयार बैठी हैं। उनकी सोच की धाराएं जब एक-दूसरे से जुड़ती हैं तो एक ऐसा जाल बनता है जो मौत की सर्दी, राज्य की जकड़न और अंतिम समय की छाया को एक साथ समेटे हुए है। युवाओं का खून अपनी नसों में उतारने की प्रक्रिया बुढ़ापे को एक दुश्मन समझकर उसका शिकार बनाने जैसी है। सिलिकॉन वैली की चमकदार इमारतों के बीच, जहां अमीर लोग अमरता की तलाश में लगे हैं, थील की छवि एक आधुनिक पिशाच की तरह उभरती है। युवा शरीरों से निकाला गया प्लाज्मा महंगे प्रयोगों में बूढ़ी नसों में पहुंचाया जा रहा है, जैसे कोई प्राचीन अनुष्ठान दोहराया जा रहा हो। मोंटेरे की उस लैब में, जहां लोग आठ हजार डॉलर देकर युवा खून की उम्मीद में लाइन लगाते हैं, एक अजीब सी सिहरन फैल जाती है। मौत को टेक्नोलॉजी की समस्या मानकर हल करने की यह कोशिश इंसानी शरीर को मात्र एक मशीन में बदल देती है, जिसके पार्ट्स बदले जा सकते हैं।
थील की नजर में लंबी उम्र की खोज शरीर को अनंत काल तक चलाने की तैयारी है। SENS रिसर्च फाउंडेशन और मेथुसेला जैसी संस्थाओं के जरिए करोड़ों बहाए जा रहे हैं। कोशिकाओं को डीबग करना, डीएनए को युवा अवस्था में रीसेट करना, जमा हुए जहर को बाहर निकालना – ये सब ऐसी प्रक्रियाएं हैं जो इंसान को एक अनंत चक्र में फंसाने की तैयारी कर रही हैं। इस चक्र में इंसानीपन नाम की कोई चीज नहीं बचती। सिर्फ एक मशीन जैसा अस्तित्व रह जाता है, जहां भावनाएं, पीड़ा और मौत की स्वाभाविक यात्रा को तकनीक से हटा दिया गया हो।
अल्कोर की ठंडी ट्यूबों में लेटे शव भविष्य की उम्मीद में जमे पड़े हैं, जैसे कोई जीवित लाशें इंतजार कर रही हों। नेवी सील्स के दिग्गज, आईसीयू नर्सें और पैरामेडिक्स की टीमें हर पल तैयार रहती हैं कि मौत के ठीक बाद शरीर को संरक्षित किया जा सके। यह विज्ञान नहीं, बल्कि मौत से भागने की एक भयावह दौड़ है, जहां अमीर लोग अपने शरीर को फ्रीजर में बंद करके अमरता का सपना देखते हैं।
राज्य को एक जंजीर मानकर उससे दूर भागने की कोशिश अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों में तैरते शहरों की आकृति लेती है। जहां कोई कानून नहीं, कोई लोकतंत्र नहीं, सिर्फ अमीरों का अपना साम्राज्य। सीस्टीडिंग इंस्टीट्यूट के जरिए शुरू हुई यह मुहिम समुद्र की लहरों पर स्वतंत्रता का झंडा लहराती है। लेकिन उस तैरते शहर में विशाल प्लेटफॉर्म्स पर बसे महंगे विला नीचे गहरे पानी में अंधेरे को छूते हैं। कोई चुनाव नहीं, कोई जनता नहीं, सिर्फ निवेशकों का फैसला। विरोध करने वाले को समुद्र में फेंक दिया जाए या प्राइवेट सिक्योरिटी द्वारा चुप करा दिया जाए। यह स्वतंत्रता नहीं, बल्कि एक नए प्रकार का गुलामी है, जहां पैसे वाले लोग खुद को राजा समझते हैं।
होंडुरास में जेडेस प्रोजेक्ट इसी सोच का विस्तार है। नियामक, न्यायिक और वित्तीय स्वायत्तता वाले प्रयोगात्मक शहर जहां पारंपरिक राज्य की पहुंच नहीं पहुंच सके। उन गलियों में बड़े-बड़े टेक उद्यमी अपने नियम बनाते हैं। कोई पर्यावरण कानून नहीं, कोई मजदूर अधिकार नहीं, सिर्फ मुनाफे की दौड़। लेकिन जब ये शहर विफल हो जाएंगे तो इतिहास गवाह है कि ऐसे प्रयोगों का अंत हमेशा अंधेरे में होता है। गाल्ट्स गुल्च चिली की तरह जहां स्वतंत्रता का सपना धूल में मिल गया। मिनर्वा गणराज्य की तरह जो प्रशांत महासागर में डूब गया। प्रोस्पेरा होंडुरास भी उसी राह पर चल रहा है। ये सब प्रयास राज्य से दूर भागने के हैं लेकिन असल में ये नए प्रकार के जाल हैं जहां आम इंसान की जगह नहीं।
नेटवर्क स्टेट्स की आकृति और भी अंधेरी है। पहले ऑनलाइन कम्युनिटी बनाना फिर भौतिक जगह हासिल करना और आखिर में राजनीतिक मान्यता की मांग। इंटरनेट पर बसे उन समूहों में वर्चुअल दुनिया से निकलकर असली जमीन पर कब्जा होता है। थील की सोच में ये स्टेट्स लोकतंत्र से ऊपर हैं जहां एलीट क्लास अपना कानून चलाती है। लेकिन इसकी परिणति टूटे हुए सपनों के ढेर है जहां लोग एक-दूसरे से कटकर अकेलेपन की गहराई में डूब जाते हैं।
थील की गहराई में अंत समय की छाया घूमती है। उनकी सोच में हर वो ताकत जो तकनीकी प्रगति रोकती है एक बड़े खतरे की तरह दिखती है। जलवायु कार्यकर्ता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आलोचक, पूंजीवाद विरोधी या वोके विचारधारा वाले सब उसी खतरे में आते हैं। 9/11 की घटना को एक मोड़ माना गया जहां उदार राज्य की कमजोरी उजागर हुई। कार्ल श्मिट की विचारधारा जो मित्र और शत्रु के बीच खाई खोदती है उनकी सोच का आधार बनी। केटेचोन की अवधारणा वो शक्ति जो अंतिम बुराई को रोकती है उनकी दुनिया में तकनीकी एलीट बन जाती है।
इस अंधकारमय प्रबोधन में निक लैंड और कर्टिस यार्विन जैसे नाम घूमते हैं। जो दुनिया पर राज करता है वह बुराई के करीब होता है। बिल गेट्स जैसी हस्तियां जो वैश्विक मुद्दों पर काम करती हैं संदिग्ध बन जाती हैं। ग्रेटा थुनबर्ग जैसी आवाजें भी उसी श्रेणी में आती हैं। हर सामूहिक प्रयास को संदेह की नजर से देखा जाता है। लोकतंत्र को कमजोर मानकर एलीट क्लास खुद को ऊपर रखती है। यह घमंड इंसानी समाज को तोड़ने वाला है।
थील की पूरी तस्वीर तब और भयावह हो जाती है जब उनके निवेशों को जोड़ा जाता है। पलेंटियर जैसी कंपनियां जो डेटा और निगरानी का साम्राज्य चलाती हैं राज्य की ताकत को और मजबूत करती हैं लेकिन उसी राज्य से दूर भागने की बात भी करती हैं। यह विरोधाभास नहीं बल्कि रणनीति है। अमीर लोग खुद के लिए अलग दुनिया बनाना चाहते हैं जबकि बाकी समाज को पुरानी व्यवस्था में रखना चाहते हैं। भविष्य की उस दुनिया में कुछ लोग तैरते शहरों में रहते हैं युवा खून से लंबी उम्र पाते हैं और बाकी करोड़ों लोग नीचे सूखी जमीन पर संघर्ष करते हैं। जलवायु परिवर्तन की मार महामारियों की छाया और युद्धों के बीच ये एलीट क्लास ऊपर से तमाशा देखती है।
एंटी-एजिंग की खोज शरीर को अनंत काल तक चलाने की कोशिश इंसानी आत्मा को मार डालती है। मौत एक प्राकृतिक हिस्सा है लेकिन उसे हटाने की कोशिश एक भयानक खेल है। युवा खून की तलाश में अमीर लोग गरीब युवाओं का शोषण कर सकते हैं। प्लाज्मा डोनेशन के नाम पर एक नया बाजार बन सकता है जहां गरीबी मजबूर करती है कि अपना खून बेचो। यह वैम्पायरिज्म का आधुनिक रूप है जहां सुई के जरिए जीवन चुराया जाता है। क्रायोनिक्स की ठंड में लेटे शरीर भविष्य में जागने की उम्मीद में लेकिन क्या होगा अगर भविष्य और भी अंधेरा हो।
समुद्रतट की आकृति रोमांचक लगती है लेकिन उसमें छिपा खतरा भयानक है। तूफानों समुद्री जीवों और अकेलेपन की मार झेलते हुए एक छोटा सा द्वीप या प्लेटफॉर्म जहां सिर्फ अमीर लोग रहें। कोई मदद नहीं अगर सिस्टम फेल हो जाए। जेडेस में प्रयोगात्मक कानून जहां मानवाधिकारों की अनदेखी हो। नेटवर्क स्टेट्स में ऑनलाइन ट्राइबलिज्म भौतिक हिंसा में बदल जाए। ये सब प्रयोग इंसानी समाज को टुकड़ों में बांट रहे हैं।
थील की सोच दुनिया को दो हिस्सों में बांटती है – प्रगति के पक्ष वाले और विरोधी। लेकिन प्रगति का मतलब सिर्फ उनका अपना वर्शन है। भविष्य की उस दुनिया में एआई बायोटेक और स्पेस टेक सिर्फ कुछ लोगों के हाथ में हो। बाकी इंसानियत पुरानी दुनिया में फंसी रहे। यह विभाजन हिंसा को जन्म देगा। अंत समय की बातें जो उनके व्याख्यानों में घूमती हैं एक भय का माहौल पैदा करती हैं। जैसे कोई प्राचीन भविष्यवाणी दोहराई जा रही हो लेकिन आधुनिक हथियारों के साथ।
इस पूरे पैटर्न में एक अजीब सी निरंतरता है। मौत से भागना राज्य से भागना और अंतिम बुराई से लड़ना सब एक ही धागे से बंधे हैं। थील खुद को उद्धारक के रूप में देखते हैं लेकिन उनकी उद्धार की राह अंधेरे गलियारों से होकर गुजरती है। युवा खून जमे हुए शव तैरते शहर प्रयोगात्मक राष्ट्र ये सब मिलकर एक डिस्टोपिया की तस्वीर बनाते हैं। जहां इंसान अपनी सीमाओं को पार करने की कोशिश में खुद को खो देता है।
सिलिकॉन वैली के अरबपति अपने निजी जेट में बैठकर इन विचारों पर गौर करते हैं। नीचे दुनिया जल रही है लेकिन ऊपर लंबी उम्र का सपना देखा जा रहा है। यह घमंड इंसानी इतिहास का सबसे बड़ा खतरा हो सकता है। जब कुछ लोग खुद को इतना ऊंचा समझने लगें कि लोकतंत्र नैतिकता और सामूहिक भलाई को नजरअंदाज कर दें तो समाज का ढांचा हिलने लगता है।
थील की सोच का विस्तार टॉल्किन की कहानियों से प्रेरित होने के बावजूद स्मॉग जैसे ड्रैगन की तरह लगता है खजाने की रखवाली करते हुए सब कुछ जला देने वाला। बुराई वाली बहसें जो उनके मुंह से निकलती हैं एक गहरे विश्वास को दर्शाती हैं कि दुनिया का अंत करीब है और सिर्फ चुनिंदा लोग ही बच सकते हैं। लेकिन यह बचाव बाकी सबकी कीमत पर।
इस अंधेरे को नजरअंदाज करना मुश्किल है। हर प्रोजेक्ट हर निवेश हर भाषण एक बड़े मकसद की ओर इशारा करता है जहां टेक्नोलॉजी एलीट खुद को ईश्वर के समान मानकर इंसानी किस्मत लिखने की कोशिश करते हैं। लेकिन इतिहास बताता है कि ऐसे प्रयास हमेशा तबाही लाते हैं। युवा खून की नदियां बहाने से समुद्र पर शहर बसाने से या अंत समय की तैयारी से इंसानी समस्याएं हल नहीं होतीं। बल्कि नई समस्याएं पैदा होती हैं।
भविष्य की उस दुनिया में अमर लोग अनंत समय तक अपनी शक्ति का आनंद ले रहे हैं। लेकिन उनके नीचे सामान्य लोग सीमित जीवन जीते हुए उनकी दया पर निर्भर हैं। यह नर्क जैसा लगता है। मौत की स्वाभाविकता को हटाने की कोशिश जीवन की कीमत को ही घटा देती है। राज्य से भागने की कोशिश नई जकड़नों को जन्म देती है। और अंतिम बुराई की तलाश खुद में एक अंधकार पैदा करती है।
थील की पूरी कहानी एक चेतावनी की तरह है। टेक की चमक के पीछे छिपे इन विचारों को समझना जरूरी है। क्योंकि अगर ये विचार हकीकत बन गए तो इंसानी सभ्यता का रूप हमेशा के लिए बदल जाएगा। एक डरावनी विभाजित और अमानवीय दुनिया में जहां कुछ अमर होंगे और बाकी सब भूल जाते होंगे।
यह पैटर्न बार-बार दोहराता है कि तकनीकी एलीट सामूहिक समस्याओं को अपने तरीके से हल करने में विश्वास रखते हैं। लंबी उम्र की दिशा में युवा प्लाज्मा का उपयोग शरीर की मरम्मत का हिस्सा बन जाता है। कोशिकीय क्षति को ठीक करने वाले उपकरण जमा अपशिष्ट को साफ करने वाले तरीके और डीएनए रीसेट की प्रक्रियाएं सब एक साथ चल रही हैं। लेकिन इनके साथ जुड़ा अंधेरा इंसानी संबंधों को तोड़ता है। अमीर और गरीब के बीच की खाई और गहरी हो जाती है। खून बेचने वाले युवा और खून लेने वाले बूढ़े अमीर इस बाजार में एक भयावह चक्र बनाते हैं।
क्रायोनिक्स की तैयारी मौत को टालने की अंतिम कोशिश है। ठंडी ट्यूबों में संरक्षित शरीर भविष्य की किसी अज्ञात दुनिया में जागने का इंतजार करते हैं। लेकिन उस जागरण में क्या बचेगा पुराना इंसान या सिर्फ एक संरक्षित मशीन। राज्य से दूर तैरते शहरों में रहने वाले लोग समुद्र की लहरों के बीच अपनी स्वतंत्रता का आनंद लेते हैं। लेकिन तूफान आने पर या सिस्टम फेल होने पर कोई बचाव नहीं। जेडेस जैसे प्रयोगात्मक शहरों में कानून सिर्फ निवेशकों के हित में बनते हैं। मजदूरों की स्थिति खराब होती है पर्यावरण की अनदेखी होती है।
नेटवर्क स्टेट्स ऑनलाइन से शुरू होकर भौतिक रूप लेते हैं। लेकिन इनमें ट्राइबल सोच इतनी मजबूत होती है कि बाहर वाले को दुश्मन मान लिया जाता है। थील की सोच में तकनीकी प्रगति को रोकने वाली हर आवाज खतरे का प्रतीक बन जाती है। डेटा निगरानी के साम्राज्य और लंबी उम्र के प्रयोग साथ-साथ चलते हैं। पलेंटियर जैसी कंपनियां जानकारी का नियंत्रण रखती हैं जबकि एलीट क्लास खुद को इन नियमों से ऊपर रखती है।
यह पूरा सिस्टम एक भयावह संतुलन बनाता है। कुछ लोग ऊपर अमरता और स्वतंत्रता का आनंद लेते हैं बाकी नीचे पुरानी दुनिया की मार झेलते हैं। युवा खून की नदियां बहती हैं लेकिन वे गरीबी से निकलती हैं। तैरते शहर समुद्र की गहराई में छिपे खतरे को नजरअंदाज करते हैं। प्रयोगात्मक राष्ट्र पुराने राज्य की कमियों को दोहराते हैं लेकिन और बदतर रूप में। अंत समय की छाया हर प्रगति के पीछे मंडराती है।
थील की दुनिया में टेक्नोलॉजी हर समस्या का समाधान है लेकिन यह समाधान सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए है। बाकी समाज को छोड़ दिया जाता है। लंबी उम्र के प्रयोग शरीर को नई उम्र देते हैं लेकिन आत्मा को खाली कर देते हैं। राज्य से भागना नई दीवारें खड़ी करता है। और प्रगति की राह पर चलना बुराई की परिभाषा बदल देता है।
इस अंधेरे पैटर्न को देखते हुए सिलिकॉन वैली की चमक झूठी लगती है। उसके पीछे छिपा है युवा खून का व्यापार ठंडी ट्यूबों का इंतजार तैरते शहरों का भ्रम और प्रयोगात्मक राष्ट्रों का जाल। ये सब मिलकर इंसानी सभ्यता को एक नई दिशा देते हैं जो अंधेरी और विभाजित है। जहां अमीर अमर बनते हैं और गरीब भूल जाते हैं। जहां स्वतंत्रता सिर्फ पैसे वालों के लिए है और बाकी सब जकड़े रहते हैं।
यह सोच बार-बार इंसानी सीमाओं को चुनौती देती है। मौत को हरा देना राज्य को पार कर जाना और प्रगति को हर कीमत पर आगे बढ़ाना। लेकिन हर कदम पर नया खतरा पैदा होता है। खून की सुई शरीर में घुसती है लेकिन रिश्तों को तोड़ती है। समुद्र पर शहर बसता है लेकिन नीचे अंधेरा फैलता है। प्रयोगात्मक शहर बनते हैं लेकिन मानवता खो जाती है।
थील की यह पूरी संरचना एक भयावह चेतावनी बन जाती है। टेक की दुनिया में छिपे इन विचारों से इंसानी भविष्य खतरे में है। अगर ये आकृतियां हकीकत बन गईं तो समाज का रूप हमेशा बदल जाएगा। एक ऐसी दुनिया जहां कुछ लोग अनंत जीवन जीते हैं बाकी सब अंधेरे में खो जाते हैं। जहां स्वतंत्रता का नाम नया शोषण है और प्रगति का नाम नया विभाजन है।
जा: ये कैसा कलयुग 😥
लेख पढ़कर आपकी धड़कन बढ़ जाएगी...
और आप यही सवाल पूछेंगे.. हे ईश्वर ये कैसा कलयुग
*अनिरुद्धाचार्य जी ने अपने आश्रम के अस्पताल में* एक बीमार बुजुर्ग मां के सिर पर हांथ रखे हुए खड़े होकर उनका हाल चाल लेते हुए जो बताया *वो बहुत हैरान करने वाला है..*
*अनिरुद्धाचार्य जी कहते हैं कि* ये हमारी मां है जो कि अंतिम सांसे गिन रहीं हैं कोमा में है *इन माता जी के 3 बेटे और 1 बेटी है* हमने उनको फोन करके कई बार कहा है कि *आपकी माता जी के अंतिम दर्शन कर लो* और मां को अपने घर लेकर जाओ और मां की आखिरी सेवा का पुण्य आप कमाओ *लेकिन इन मैया के बेटे* न इनको देखने आ रहे हैं और न ही इनको लेने आ रहे हैं
*उन्होंने बताया माता जी को मैने बड़े अस्पताल में भर्ती करवाया था* लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि अब इनको लेकर जाइए *तो मैं माता जी को अपने अस्पताल ले आया हूं* और यही पर माता जी के इलाज की पूरी व्यवस्था कर रखी है *यहीं पर ऑक्सीजन लगी है*
*गुरु जी कहते हैं* एक मां कितनी कठिनाई दर्द सहन करके बच्चों को पैदा करती है *बच्चों का पालन पोषण शिक्षा दीक्षा करती है* लेकिन उसी मां को जब बच्चों की जरूरत पड़ती है तो *अपने मां को न तो देखने आ रहे हैं और न लेने आ रहे हैं*
*आप ऐसा मत करना अपने माता पिता के साथ* मां का दर्जा भगवान से भी ऊंचा होता है *मां से बड़ा कोई होता नहीं है* अपनी मां का अपने पिता का अपनो का ख्याल जरूर रखिएगा...
`हे ईश्वर ये कैसा कलयुग है`
जितेंद्र कुमार: *🚩🌹 सनातन का महाप्रलय-घोष 🌹🚩*
*सम्पूर्ण संसार सनातनी हिन्दू समाज का ही था और है!* 🚩
फिर हुंकार भरी है सिंहों ने अब प्रलय को जगा दो
सोए हुए शेरों की नस में बारूद भर के लगा दो
झूठ के महल ढहा दो सच का सूर्य उगा दो
झूठी जाति की चार हजार एक सौ चौदह को तोड़ दो
जागो फूट डालने वालों को हर तरह से अब तोड़ दो
पत्थर गवाही दे रहे हैं धरती माँ पुकार रही
हम एक रक्त एक वंश एक ही सनातन धार बही
वेद से निकले हम सब ओम हमारा मूल मंत्र
हिन्दू बौद्ध सिख जैन सब एक ही अमृत तंत्र
चार अरब चौवन करोड़ साल धरती की उमर गाती
NASA ने माथा टेका बाइबिल झूठी बात बताती
छह हजार की कहानी टूटी नर्मदा साढ़े छह लाख साल बोली
राखीगढ़ी की मिट्टी चीखी DNA ने कलई खोली
साठ हजार साल से एक खून आर्यन वाला झूठ जला
बाहर से कोई नहीं आया भारत माँ की कोख पला
सनातन की जड़ें अटल हैं युग-युग तक न हिलेंगी
सुश्रुत की छुरी चली दिल्ली का लोहा जंग न मिलेगी
सातों महाद्वीप गर्ज रहे सनातन की जयकार
अरब की रेत भी बोली हम थे सनातन के आधार
सऊदी में आठ हजार साल का मंदिर आज भी साक्षी
बहरीन में शिव का घर यमन में ब्राह्मी अक्षी
ओमान में हवन-कुंड धधके कुवैत में दुर्गा जागे
काबा में तीन सौ साठ बुत हुबल महादेव आगे
उमर बिन हश्शाम रोज महादेव की आरती उतारे
संग-ए-अस्वद भी काला पत्थर सनातन ही पुकारे
अजरबैजान की धरती बोली आओ ज्वाला माँ के द्वार
तीन हजार साल से अखंड दीप भगवती दुर्गा अवतार
बाकू की आग कह रही सनातन की शक्ति अमर
यूरोप की बर्फ चीर के निकला ओम का स्वर प्रखर
वेटिकन वाटिका से जन्मा शिव का घर महान
इटली में विष्णु खड़े सात हजार साल से अजान
फ्रांस में गणेश विराजे छह हजार साल से धीर
रूस में नृसिंह दहाड़े दस हजार साल से वीर
जर्मनी की गुफा में चालीस हजार साल का नरसिंह सोता
तुर्की का गोबेकली टेपे चौदह हजार साल पुराना
स्वस्तिक पर इंद्र मित्र वरुण का नाम आज भी सुहाना
मित्तानी संधि
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