तीन बहनों का एक चिता पर हुआ अंतिम संस्कार:दूसरी चिता पर भाई-बहन, होली पर पूरा गांव सन्नाटे में डूबा; मोतिहारी में 6 बच्चों की डूबकर मौत

Mar 5, 2026 - 17:18
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तीन बहनों का एक चिता पर हुआ अंतिम संस्कार:दूसरी चिता पर भाई-बहन, होली पर पूरा गांव सन्नाटे में डूबा; मोतिहारी में 6 बच्चों की डूबकर मौत
'हमने रेलवे से कई बार कहा था कि तालाब के पास पुल बना दीजिए। पानी गहरा हो गया है, कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन किसी ने हमारी नहीं सुनी। अगर सुन ली होती, तो आज छह बच्चे जिंदा होते।' यह दर्द भरी आवाज है अशोक गिरी की। वही अशोक गिरी, जिन्होंने इस हादसे से कुछ घंटे पहले बच्चों को उसी गहरे तालाब के पास देखा था। उन्हें डांटकर भगाया भी था, लेकिन उनकी चेतावनी, उनकी पुकार और उनकी चिंता किस्मत के आगे बेबस साबित हुई। मंगलवार की शाम मोतिहारी के लोहरगांवा में जो हुआ, उसने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया। नहाने के दौरान एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में छह मासूम बच्चे सभी 6 से 12 साल की उम्र के तालाब में डूबकर मौत का शिकार हो गए। होली से ठीक पहले पूरे गांव में मातम पसर गया। दैनिक भास्कर की टीम जब जिला मुख्यालय से 50KM दूर इस गांव पहुंची, तो हर दरवाजे पर चीखें थीं और हर घर में सन्नाटा पसरा था। होली के मौके पर रंग की जगह हर चेहरे पर उड़ासी थी। जब टीम मृतकों के घर पहुंची तो पता चला कि सभी शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा चुका था। गांव से करीब 4KM दूर नदी किनारे पांच चिताओं पर छह बच्चों के शव रखे गए थे। अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… रेलवे की खुदाई ने बनाया 20 फीट गहरा तालाब सोनाली के पिता कामेश्वर सहनी ने बताया, ‘यह तालाब किसी प्राकृतिक जलस्रोत से नहीं बना, बल्कि रेलवे की गहरी खुदाई का परिणाम है। यह वही जगह है जहां रेलवे पुल निर्माण के दौरान करीब 20 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था। बारिश और नदी के पानी ने इसे तालाब में बदल दिया है।’ सोनाली के पिता कामेश्वर सहनी, ‘जिनकी 8 साल की बेटी की डूबने से मौत हुई। वो कहते हैं, रेलवे ने इतना गहरा गड्ढा खोद दिया था कि यहां नदी जैसा पानी जमा होने लगा। हमने बार-बार विनती की कि पुल बनवा दीजिए ताकि पानी निकाल जाए, लेकिन किसी ने नहीं सुना। मेरी तीन बेटियों में से एक चली गई। पढ़ाई में बहुत तेज थी। तीन क्लास में पढ़ती थी।’ वे कहते हैं, ‘ये हादसा प्राकृतिक नहीं, लापरवाही से बना एक मौत का कुंड है।’ गांव में होली का नहीं दिखा रंग गुरुवार दोपहर जब भास्कर की टीम लोहरगांवा पंचायत पहुंची, होली की कोई आहट नहीं थी। न रंग, न ढोल, न खुशियां बस हर घर और हर गली में एक ही दर्द का सन्नाटा था। गांव के लोग बताते हैं, हमारे लिए होली का त्योहार तो खत्म ही हो गया है। इस हादसे से 3 घर बर्बाद हो गए, अब कौन ढोल बजाएगा? बच्चों की मौत की खबर पूरे गांव में ऐसे फैल चुकी थी, जैसे किसी ने सबकी सांसें छीन ली हों। हर कोई अपने बच्चों को गले लगाकर बैठा था। हादसे का पूरा सिलसिला पढ़िए… तालाब के पास मिले बच्चों के चप्पल घटनास्थल गांव से लगभग चार किलोमीटर दूर है। तालाब के किनारे मिट्टी अभी भी बिखरी थी। बच्चों के चप्पल भी तालाब किनारे पड़े थे। पानी में कई जगह धंसे पैरों के निशान थे। हमें अशोक गिरी वहीं मिले। उन्होंने भास्कर की टीम को जो बताया, वह हादसे का असली चित्र पेश करता है। उन्होंने कहा, सुबह 11 बजे मैं खेत देखने आया था। बच्चे वहीं बकरियां चरा रहे थे। अपने में मग्न थे। मैंने कहा, पगडंडी सकरी है, तालाब बहुत गहरा है, तुमलोग यहां मत आओ। इतना कहकर मैं मार्केट चला गया। अशोक आगे बताते हैं, शाम 6 बजे लौटकर आया तो देखा कि बच्चों के घरवाले उन्हें ढूंढ रहे थे। मैंने बताया कि आखिरी बार बच्चे तालाब के पास दिखे थे। जैसे ही हम तालाब पहुंचे, सभी बच्चों की चप्पलें किनारे रखी मिलीं। तब समझ आया कि बड़ी अनहोनी हो गई है। गोताखोर बुलाए गए, छह शव निकाले गए ग्रामीणों ने तत्काल गोताखोरों की मदद ली। अशोक गिरी बताते हैं, सबसे पहले एक बच्ची का शव निकलकर आया। वहीं समझ गए कि बाकी बच्चे भी इसी गहराई में होंगे। हमने लगभग एक घंटे तक पानी छाना और सात बजे तक सभी छह शव निकाल लिए गए। उस समय तालाब के किनारे खड़े परिजनों की चीखें हर तरफ गूंज रही थीं। कई लोग बेहोश होकर गिर गए। गांव वाले बताते हैं, उस एक घंटे में ऐसा लग रहा था कि पूरा संसार थम गया है। पुलिस मौके पर पहुंची और सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। रात में ही सभी शव गांव लाए गए। एक साथ छह कफन, एक साथ छह छोटे-छोटे शरीर…गांव की महिलाएं अपने होश में नहीं थीं। एक बुजुर्ग रोते हुए बोले हमने ऐसी तबाही कभी नहीं देखी। एक फड़की पर तीन बहनें, दूसरी चिता पर भाई-बहन गांव के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ जब घर में शव न ले जाकर सीधे श्मशान ले जाया गया। कारण था घर-घर में मातम देखकर परिवारों की स्थिति और खराब हो सकती थी। नदी किनारे पांच चिताएं तैयार थीं। एक फड़की पर तीन बहनों के शव थे। दूसरी चिता पर एक भाई-बहन थे। छठा बच्चा अलग चिता पर जल रहा था। गांव वाले कहते हैं, तीन बहनों को एक साथ जाते देखना… हमारी हिम्मत पस्त हो गई। DM सौरभ जोरवाल ने घटना की पुष्टि की जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने पुष्टि की कि छह बच्चों की मौत तालाब में डूबने से हुई है। परिजनों को 4-4 लाख रुपए मुआवजा दिया जाएगा। प्रशासन ने जांच के आदेश भी दिए हैं। गांव की मांग है, तालाब के पास बाउंड्री वॉल लगे। गहरे पानी वाली जगहों पर बोर्ड लगाए जाएं। रेलवे द्वारा की गई खुदाई की जांच हो। पानी निकालने के लिए स्थायी व्यवस्था बने। यही चप्पल पहनकर गई थी, यहीं छोड़ गई एक मां हाथ में अपनी बच्ची की चप्पल लेकर बस दो शब्द बोलती रही, यही पहनकर गई थी। यहीं छोड़ गई। गांव के पुरुष एक कोने में खामोश बैठे थे। कोई किसी से बात नहीं कर रहा था। हर कोई सिर नीचे किए रो रहा था। बच्चों के साथी भी सदमे में थे। एक बच्चा बोला, हम सब साथ में खेलते थे। वो लोग नहाने गए थे। हम क्यों नहीं रोके। गांव की होली रद्द लोहरगांवा में किसी ने रंग या गुलाल नहीं खरीदा। ढोलकें घरों में पड़ी रह गईं। चौपाल सूना है। एक बुजुर्ग ने कहा, होली हर साल आएगी, पर ये छह बच्चे कभी वापस नहीं आएंगे।

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला