ईरान-अमेरिका-इजरायल जंग के बीच ईरान सरकार ने ABP न्यूज को दिए इंटरव्यू में कई बड़े दावे किए हैं. ईरानी सरकार ने 13 पॉइंट्स में अपनी पोजीशन क्लियर की है. इसमें ईरान ने यूरेनियम, न्यूक्लियर से लेकर गाजा तक पर बात की है. ये बयान जंग के छठे दिन आए हैं, जब मौतें बढ़ रही हैं और हमले जारी हैं.
- न्यूक्लियर प्रोग्राम पर: ईरान के पास अब जीरो न्यूक्लियर फैसिलिटीज हैं. जून 2025 में हुए हमलों (इजरायल और अमेरिका के) के बाद सब साफ हो चुका है. हमने जेनेवा में यूरेनियम एक्टिविटी को डाइल्यूट (पतला) करने की बात कही थी, नेगोशिएटर्स खुश थे और नोट्स एक्सचेंज पर बात पहुंच चुकी थी.
- अमेरिका पर तंज: अमेरिका का 'low चीप' है.
- जंग का असर: पूरी दुनिया इस युद्ध से प्रभावित होगी. ट्रंप ईरान को गाजा बनाना चाहते हैं.
- न्यूक्लियर पावर वाले अटैक: दो न्यूक्लियर रिजीम (अमेरिका और इजरायल) ईरान पर हमला कर रहे हैं. दोनों न्यूक्लियर पावर हैं.
- जंग जरूरी नहीं: ये 'वॉर ऑफ चॉइस' है, यानी चुनी हुई जंग, यह जरूरी नहीं थी, लेकिन अब हो गई है.
- खाड़ी देशों पर हमले: हमने खाड़ी देशों को इसलिए टारगेट नहीं किया कि वो वॉशिंगटन पर सीजफायर का दबाव डालें. बल्कि इसलिए क्योंकि उन्होंने ईरान पर हमले के लिए अपनी जमीन और एसेट्स अमेरिका-इजरायल को दिए. अमेरिका की 5th फ्लीट का बेस बहरीन में है, इसलिए वहां ह्यूमनिटेरियन (मानवीय) हमला किया.
- UAE और मोसाद: मोसाद का ऑफिस UAE के दुबई के जिस होटल में था, उसे ईरान ने टारगेट किया. इन देशों को हमने कहा था कि US बेस हटाओ.
- अमेरिकी बेस खत्म करने का वादा: हमने कहा था कि खाड़ी देशों से अमेरिकी बेस खत्म करेंगे और इस पर आखिरी दम तक कायम रहेंगे.
- सिविलियन अटैक्स पर सवाल: प्राइमरी स्कूल में 7-12 साल के 160 बच्चों को मार डाला. अस्पताल, पब्लिक ऑफिस पर अटैक क्यों?
- भारत पर नाराजगी: ईरान भारत से नाराज है. यह इंटरनेशनल लॉ के पक्ष में खड़े होने की घड़ी है.
- वॉरशिप पर: हमारा वॉरशिप युद्ध में नहीं था, उसका जंग से कोई लेना-देना नहीं. न हथियार थे, न लड़ाकू सेना. फिर भी श्रीलंका की कोस्टलाइन पर टारगेट किया गया.
- नियमों का उल्लंघन: नो रूल ऑफ लॉ, नो रूल ऑफ एंगेजमेंट. इंटरनेशनल लॉ के अब क्या मायने बचे हैं?
- अकेले लड़ेंगे: हमने इस जंग में किसी सहयोगी देश से मदद नहीं मांगी. इसे अपने दम पर जीतेंगे.