आज सुबह के 100 मुख्य सामाचार और राशिफल पंचांग मेष वृषभ मिथुन कर्क सिंह कन्या तुला वृश्चिक धनु मकर कुंभ राशिफल जानें आज
पिकनिक चल रहा है प्रोटेस्ट चल रहा है या क्या ड्रामा चल रहा है मीडिया के सामने आकर बोलता है भूख हड़ताल पर चला जाऊंगा और रात में नूडल्स ब्रेड पकोड़ा ठूंसा जा रहा है देश में सिर्फ और सिर्फ अराजकता फैलाने के लिए इन कॉक्रेचो को उतारा गया है
Jitendra Kumar: *🏹🚩सनातन सेवक समिति🚩🏹*
✊🏻👊🏻⛳
*🚩क्रमांक = 01*
*🚩जय सनातन:-सनातन पंचांग🚩*
*🚩आज की हिंदी तिथि🚩*
*┈┉══❀(("ॐ"))❀══┉┈*
*⛅युगाब्द - 5128*
*⛅दिनांक - 24 जून 2026*
*⛅दिन - बुधवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2083*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - वर्षा*
*⛅मास - ज्येष्ठ*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - दशमी शाम 06:12 तक तत्पश्चात् एकादशी*
*⛅नक्षत्र - चित्रा दोपहर 01:59 तक तत्पश्चात् स्वाती*
*⛅योग - परिघ सुबह 10:23 तक तत्पश्चात् शिव*
*⛅राहुकाल - दोपहर 12:29 से दोपहर 02:11 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 05:43*
*⛅सूर्यास्त - 07:16 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:19 से प्रातः 05:01 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं*
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:09 से मध्यरात्रि 12:50 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️ विशेष - दशमी को कलंबी का शाक खाना त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*✨ इन्द्रियजय वर्णन 3, सर्ग 247 📜*
*🚩आत्मपद प्राप्त होता है। जो अज्ञानी हैं, वे रागद्वेष से जलते हैं। जिनको आत्मा का दृढ़ अभ्यास हुआ है, उनको शान्ति और आत्मस्थिति प्राप्त होती है। उन्हें उस स्थित के आगे इन्द्र का राज्य भी सूखे तृण सा-तुच्छ लगता है। सब जगत् उनको आत्मरूप दिखता है। जो अज्ञानी हैं, उनको नाना प्रकार के जगत् दिखते हैं। जैसे सोये हुए पुरुष को स्वप्न की सृष्टि भासती है, वैसे ही जाग्रत् को स्वप्न की सृष्टि भी अपना रूप जान पड़ती है। ज्ञानवान् को सब आत्मरूप दिखता है, आत्मा से भिन्न कुछ नहीं दिखता। जब आत्म-अभ्यास का बल हो और अनात्मा के अभाव का अभ्यास दृढ़ हो, तब जगत् का अभाव हो जाता है और अद्वैतसत्ता का भान होता है।*
*🙏🏻हे राम ! मैंने तुमको बहुत उपदेश किया है। जब इसका अभ्यास होगा, तब इसका फल ब्रह्मबोध ही प्राप्त होगा। वह बोध अभ्यास के बिना नहीं प्राप्त होता। जो एक तृण लुप्त करना होता है तो भी कुछ यत्न करना होता है। यह तो त्रिलोकी लुप्त करनी है।*
*🚩हे राम ! जैसे बड़ा भार जिस पर पड़ता है, उससे वह बड़े ही बल से उठता है, बिना बड़े बल नहीं उठता, वैसे ही जीव पर दृश्यरूपी बड़ा भार पड़ा है, जब आत्मरूपी अभ्यास का बड़ा बल हो, तब वह इसको निवृत्त करे, नहीं तो निवृत्त नहीं होता। यह जो मैंने तुमको उपदेश किया है, इसको बारम्बार विचारो। मैंने तो तुमको बहुत प्रकार से और बहुत बार समझाया है।*
*🚩 हे राम ! अज्ञानी को ऐसे बहुत कहने से भी कुछ फल नहीं होता। तुमको जो मैंने उपदेश किया है, वह सब शास्त्रों और वेदों का सिद्धान्त है। जिस प्रकार वेद का पाठ करते हैं, उसी प्रकार इसका पाठ कीजिये और विचारिये, इसके रहस्य को हृदय में धारण करिए। तब आत्मपद की प्राप्ति होगी और अन्य शास्त्र भी इसके अवलोकन से सुगम हो जावेंगे।*
*🚩 यदि नित्य इस शास्त्र को श्रद्धासहित सुने और कहे तो अज्ञानी जीव को भी अवश्य ज्ञान की प्राप्ति होती है। जो एक बार सुनकर कहने लगा है कि एक बार तो सुना है फिर क्या सुनना है, उसकी भ्रान्ति निवृत्त न होगी। जो बारम्बार सुने-विचारे और कहे तो उसकी भ्रान्ति निवृत्त हो जावेगी। सब शास्त्रों से उत्तम युक्ति की संहिता मैंने कही है जो शीघ्र ही मन में बैठ जाती है।*
*🚩जो पुरुष मेरे शास्त्र के सुनने और कहने वाले हैं, उनको बोध होता है और दूसरे शास्त्रों का अर्थ भी भली भाँति खुल जाता है। जैसे नमक का अधिकारी व्यञ्जन है। उसमें डाला गया नमक स्वादिष्ट होता है और प्रीति सहित ग्रहण किया जाता है, वैसे ही जो इस शास्त्र के सुनने और कहने वाले हैं, वे और शास्त्रों का भी सुन्दर अर्थ करेंगे।*
*🚩हे राम ! किसी और पक्ष को मानकर इसे सुनना त्यागना न चाहिए। जैसे किसी के पिता का खारी कुआँ था और उसके निकट एक मीठे जल का भी कुआँ था, पर वह अपने पिता का कूप मानकर खारी ही जल पीता था और निकट के मीठे जल के कुएँ का त्याग करता था, वैसे ही अपने पक्ष को मानकर मेरे शास्त्र का त्याग न करना। जो ऐसे जानकर मेरे शास्त्र को न सुनेगा, उसको ज्ञान न प्राप्त होगा।*
*🚩जो पुरुष इस शास्त्र में दोष का आरोपण करेगा कि यह सिद्धान्त यथार्थ नहीं कहा, उसको कभी ज्ञान न प्राप्त होगा—वह आत्महन्ता है, उसके वाक्य न सुनना। जो प्रीतिपूर्वक पूज्य भाव करके श्रद्धा से सुनेगा और विचार कर पाठ करेगा, उसको निर्मल ज्ञान प्राप्त होगा और उसके कर्म भी निर्मल होंगे। इससे यह नित्यप्रति विचारने योग्य है।*
*🚩हे राम ! तुमको मैंने अपने किसी स्वार्थ के लिए उपदेश नहीं किया, केवल दया करके किया है। तुम जो किसी से कहना तो स्वार्थ के बिना दया करके कहना।*
*🌷इति श्रीयोगवासिष्ठे निर्वाणप्रकरणे इन्द्रिययज्ञवर्णनं नाम द्विशताधिकसप्तचत्वारिंशत्तमस्सर्गः ।। २४७ ।। 🌺*
🏹🇮🇳⛳🔱🌞⚜️🐚🕉️🙏🏻
Jitendra: . *जय श्री राम*
*बुधवार, 24 जून 2026 के मुख्य समाचार*
🔶कतर के अमीर का PM मोदी को फोन, रास लफान हादसे में 12 भारतीयों की मौ'त पर जताया दुख:
🔶'मुगलों-पठानों और ब्रिटिश शासकों के नाम पर नहीं होगी कोई सड़क', बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान
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🔶भारत की सैन्य ताकत होगी और घातक, अमेरिका ने 4555 करोड़ की रक्षा डील को दी मंजूरी
🔶Vaishno Devi के भक्तों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, 50 लाख से ज्यादा तीर्थयात्रियों ने किए माता रानी के दर्शन
🔶केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा:21 जून को राज्यसभा कार्यकाल खत्म हुआ था; भाजपा ने दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया
🔶‘रिश्ते तभी चलेंगे जब दोनों तरफ इज्जत होगी’, NSA अजीत डोभाल का चीन को मैसेज
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🔶भारत के लिए गुड न्यूज... होर्मुज से निकले 11 जहाज, विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी, अभी भी फंसे हैं 10 पोत
🔶लखनऊ अग्निकांड: सीएम योगी सख्त, लखनऊ विकास प्राधिकरण के वीसी को किया तलब, अवैध निर्माणों पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट
🔶भरत तिवारी एनकाउंटर में बैकफुट पर सरकार:SDPO-SHO और पुलिसकर्मियों पर 7वें दिन हत्या की FIR, मां ने कहा था- बेटे को घेर कर गोली मारी
🔶ट्रंप की सैन्य नीति ध्वस्त, अमेरिकी सीनेट ने ईरान युद्ध रोकने के प्रस्ताव को किया पास
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🔶बलिदान दिवस पर मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दी श्रद्धांजलि, विकसित भारत के संकल्प को दोहराया
🔶‘PoK के लोग असली कश्मीरी नहीं’, पाक रक्षा मंत्री ने भारत को दे दिया हथियार!
🔶'मौत पर राजनीति न करें', लखनऊ अग्निकांड पर डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने दी अखिलेश यादव को नसीहत
🔶New Rules: रेलवे के नए नियमों से यात्रियों को झटका, कंफर्म टिकट, जुर्माने से लेकर रिजर्व कोच तक... 1 जुलाई से बदल जाएंगे नियम
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🔶युवाओं के लिए खुशखबरी... केंद्र सरकार ने 1.83 लाख पदों पर शुरू की बंपर भर्ती, परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों की तैयारी
🔶एक मोबाइल नंबर से खुला ₹3000 करोड़ का फर्जीवाड़ा:पंजाब के सगे भाइयों ने 27 कागजी कंपनियां बनाईं; फर्जी बिल सरकार को भी चूना
🔶अलीगढ़ में राहुल बनकर अंसार ने रचाई शादी, दिया तीन तलाक; नशीले इंजेक्शन लगाकर दुष्कर्म का आरोप
🔶ब्रिक्स एनएसए बैठक: अजीत डोभाल और शोइगु की मुलाकात में भारत-रूस संबंधों को मजबूत करने पर जोर
*आप का दिन शुभ और मंगलमय हो सुप्रभात....!*
जय हो🙏
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Tej raftar news: वेदवती की कहानी
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वेदवती की कहानी रामायण के उत्तर कांड में वर्णित है। वे माँ सीता का पूर्व जन्म मानी जाती हैं। उनकी कहानी त्याग, तपस्या और प्रतिशोध की एक अद्भुत गाथा है।
1. जन्म और पृष्ठभूमि
वेदवती ब्रह्मर्षि कुशध्वज की पुत्री थीं। उनका नाम 'वेदवती' इसलिए पड़ा क्योंकि वे जन्म के समय ही वेदों का पाठ कर रही थीं। उनके पिता चाहते थे कि उनकी पुत्री का विवाह केवल भगवान विष्णु से हो, क्योंकि वे उन्हें ही साक्षात लक्ष्मी का रूप मानते थे।
2. कठोर तपस्या
वेदवती के पिता की हत्या एक दैत्य (शंभु) ने कर दी थी। अपने पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए, वेदवती ने सांसारिक मोह त्याग दिया और भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए हिमालय में घोर तपस्या करने लगीं। वे जटाधारी बन गईं और केवल तप में लीन रहने लगीं।
3. रावण से सामना
एक दिन लंकापति रावण वहां से गुजर रहा था। तपस्या में लीन वेदवती के अनुपम सौंदर्य को देखकर वह उन पर मोहित हो गया। रावण ने उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा और उनके तप का उपहास उड़ाया।
जब वेदवती ने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया, तो अहंकारी रावण ने बलपूर्वक उनके बाल पकड़ लिए और उनके साथ दुर्व्यवहार करने की कोशिश की।
4. वेदवती का शाप और आत्मदाह
रावण के स्पर्श से वेदवती स्वयं को अपवित्र महसूस करने लगीं। उन्होंने अपने योग बल से अपने बाल काट दिए और क्रोध में आकर रावण को शाप दिया:
"हे दुष्ट! तूने मेरा अपमान किया है। अब इस शरीर को रखने का कोई अर्थ नहीं है, लेकिन मैं फिर से जन्म लूंगी और तेरे विनाश का कारण बनूंगी।"
इतना कहकर उन्होंने अपने योग की शक्ति से अग्नि प्रज्ज्वलित की और उसमें समाहित हो गईं (आत्मदाह कर लिया)।
5. सीता के रूप में पुनर्जन्म
यही वेदवती अगले जन्म में सीता के रूप में प्रकट हुईं। वे राजा जनक को हल चलाते समय भूमि से प्राप्त हुईं। अंततः, रावण द्वारा माता सीता का अपहरण ही उसके और उसके पूरे साम्राज्य के विनाश का मुख्य कारण बना। इस प्रकार वेदवती ने अपना वचन और शाप पूरा किया।
एक रोचक तथ्य: 'माया सीता' की कथा
कुछ पुराणों (जैसे अद्भुत रामायण) में यह भी कहा गया है कि रावण जिस सीता का अपहरण करके ले गया था, वह असल में माया सीता (वेदवती की आत्मा) थीं। अग्नि देव ने असली सीता की रक्षा की थी और वेदवती को उनके स्थान पर भेज दिया था ताकि वे रावण से अपना बदला ले सकें।
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Jeetu dehati: *करीब फरवरी February महीने के बाद इस महात्म्य पूर्ण स्थान जो प्रभु श्री कृष्ण जी से जुड़े है उसके अध्याय बाकी रह गए थे जो आज पुनः: शुरू करते हैं।🙏*
*श्रीब्रजमण्डल परिक्रमा अध्याय – ०६०*
*(श्रीगोवर्धन परिक्रमा)*
*(क्योंनाई, भदावर, गाँठोली)*
*(४०) क्योंनाई (कोनाई) :--*
*क्योंनाई (कोनाई) - यह राधाकृष्ण युगल के मिलन का संकेत स्थल है। एक समय श्रीकृष्ण यहीं पर श्रीमती राधिकाजी की प्रतीक्षाकर रहे थे।*
*श्रीमती राधिका की कुछ सहेलियाँ कृष्ण की राधा से मिलन की उत्कण्ठा की परीक्षा करने के लिए पहले ही उपस्थित हो गईं। राधिका को कहीं पास में ही कुञ्ज में छिपा दिया ।*
*कृष्ण ने बड़ी उत्कण्ठा से सखियों से पूछा :--*
*कृष्ण – किशोरी जी क्यों ना आई ?*
*सखियाँ - आज अभिमन्यु घर पर है । जटिला और कुटिला ये दोनों भी आज (कृष्ण की उत्कण्ठा बढ़ाते हुए कहा) बड़ी सावधानी से चौकसी कर रही हैं, जिससे वे कहीं निकल नहीं पा रही हैं। इसलिए आज आने की सम्भावना कम है।*
*ऐसा सुनकर कृष्ण का मुख मलिन हो गया और वे बड़े दुःखी हो गये।*
*उनको इस प्रकार श्रीमतीजी के विरह में आतुर देखकर सखियाँ बड़ी प्रसन्न हुईं तथा निकट के कुञ्ज से श्रीमती राधिका को लाकर कृष्ण से मिलन कराया।*
*कृष्ण के 'क्यों ना आई ?' पूछने के कारण ही इस स्थल का नाम 'क्योंनाई’ हो गया।*
*क्योंनाई का अपभ्रंश कोनाई हुआ, जो इस स्थल का वर्तमान नाम हैं। यह गाँव श्रीराधाकुण्ड से चार मील उत्तर में है । यहाँ ग्वालकुण्ड और गोकुण्ड दर्शनीय हैं।*
*(४१) भदावर :--*
*भदावर - वर्तमान नाम भदाहर है। यह आठ यूथेश्वरियों में से एक भद्रा यूथेश्वरी का निवास-स्थान है। ये श्रीमती राधिकाजी की तटस्थ और श्रीमती चन्द्रावली की सुहृद-पक्ष की सखी हैं।*
*(४२) गाँठोली :--*
*गाँठोली - यहाँ श्रीराधाकृष्ण युगल होली खेलते हुए सिंहासन पर विराजमान हुए थे तथा रासविलास में उन्मत्त हुए थे। उस समय ललिताजी ने पीछे से चुपचाप दोनों के उत्तरियों की गाँठ बाँध दी थी।*
*जब दोनों उठने लगे, तब उस गाँठ के कारण अलग नहीं हो सके। सखियाँ ऐसा देखकर हँसने लगीं। इस रहस्यमयी लीला के कारण इस स्थान का नाम गाँठोली पड़ा। गोवर्धन-डीग के राजमार्गपर यह स्थान स्थित है ।*
*कभी-कभी श्रीनाथजी भक्तों को दर्शन देने के लिए, इस गाँव में पधारते थे।*
*जब श्रीचैतन्य महाप्रभु गोवर्धन आये, तब उनको श्रीनाथ गोपालजी के दर्शन करने की तीव्र लालसा हुई।*
*उसी समय पुजारियों ने श्रीगोपालजी अर्थात् श्रीनाथजी को तीन दिनों तक गाँठोली में विराजमान कराया था।*
*श्रीचैतन्य महाप्रभुजी गोवर्धन पर्वत पर नहीं चढ़ते थे, क्योंकि वे इन्हें श्रीकृष्ण का ही स्वरूप मानते थे। इसलिए इनके अनुगत कोई भी गौड़ीय वैष्णव श्रीगोवर्धन पर्वत पर चढ़कर दर्शन नहीं करते ।*
*श्रीरूप-सनातन भी उसी प्रकार गोवर्धन के ऊपर नहीं चढ़ते थे। श्रीचैतन्य महाप्रभु को जब पता चला कि गोपालजी गाँठोली गाँव में पधारे हुए हैं।*
*तो तीन दिनों तक यहाँ रहकर उन्होंने भाव में विभोर होकर इनकी परिक्रमा, स्तव-स्तुति और इनके सामने नृत्य और सङ्गीर्तन किया था। यहाँ गुलाल कुण्ड दर्शनीय है।*
जय श्री कृष्ण
Jeetu dehati: *🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 24 जून 2026*
*⛅दिन - बुधवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2083*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - वर्षा*
*⛅मास - ज्येष्ठ*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - दशमी शाम 06:12 तक तत्पश्चात् एकादशी*
*⛅नक्षत्र - चित्रा दोपहर 01:59 तक तत्पश्चात् स्वाती*
*⛅योग - परिघ सुबह 10:23 तक तत्पश्चात् शिव*
*⛅राहुकाल - दोपहर 12:29 से दोपहर 02:11 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 05:43*
*⛅सूर्यास्त - 07:16 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:19 से प्रातः 05:01 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं*
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:09 से मध्यरात्रि 12:50 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️ विशेष - दशमी को कलंबी का शाक खाना त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
🌷 *एकादशी व्रत के लाभ* 🌷
➡️ *24 जून 2026 बुधवार को शाम 06:12 से 25 जून, गुरुवार को रात्रि 08:09 तक एकादशी है।*
💥 *विशेष - 25 जून, गुरुवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें।*
🙏🏻 *एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है ।*
🙏🏻 *जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
🙏🏻 *जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।*
🙏🏻 *एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।*
🙏🏻 *धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।*
🙏🏻 *कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।*
🙏🏻 *परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ ।भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।*
🌷 *एकादशी के दिन करने योग्य* 🌷
🙏🏻 *एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें ..... विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l*
🌷 *एकादशी के दिन ये सावधानी रहे* 🌷
🙏🏻 *महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो चावल खाता है... तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है...ऐसा डोंगरे जी महाराज के भागवत में डोंगरे जी महाराज ने कहा*
राधे राधे 💐 🙏
🙏🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏
Tej raftar news: *राधे - राधे ॥ आज का भगवद् चिन्तन ॥*
*२४.०६.२०२६*
🌟*|| जीवन की सार्थकता ||*🌟
मनुष्य जीवन में अंतिम क्षणों तक जीवन परिवर्तन की संभावना के द्वार सदा खुले रहते हैं। वह चाहे तो सदैव अपने जीवन को उत्कृष्ट से उत्कृष्ट बनाने में अथवा निकृष्ट से निकृष्ट बना पाने में समर्थ होता है। मनुष्य जीवन के अलावा अन्य सभी प्राणी प्रकृति के ही अधीन होते हैं। उनमें जन्म के बाद अपने जीवन परिवर्तन की कोई संभावना बाकी नहीं रह जाती है।
मनुष्य अपने संग से, अपने संस्कारों से एवं अपने परिवेश से जीवन को परिवर्तित करने में सक्षम होता है। यदि कुसंग से अपना पतन भी करा सकता है तो सुसंग से जीवन उन्नति एवं कल्याण के मार्ग पर भी बढ़ सकता है। उस प्रभु ने कृपा करके हमको मानव देह प्रदान किया है तो फिर श्रेष्ठ पथ का अनुगमन करते हुए, श्रेष्ठ का ही चिंतन करते हुए अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहना ही जीवन की परम सार्थकता है।
🙏 *जय श्री राधे कृष्ण* 🙏
Jeetu dehati: 2️⃣4️⃣❗0️⃣6️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣
*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*
*!! सोच का फर्क !!*
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एक बार एक पिता और उसका पुत्र जलमार्ग से कहीं यात्रा कर रहे थे और तभी अचानक दोनों रास्ता भटक गये। फिर उनकी नौका भी उन्हें ऐसी जगह ले गई, जहाँ दो टापू आस-पास थे और फिर वहाँ पहुंच कर उनकी नौका टूट गई।
पिता ने पुत्र से कहा, "अब लगता है, हम दोनों का अंतिम समय आ गया है, दूर-दूर तक कोई सहारा नहीं दिख रहा है।"
अचानक पिता को एक उपाय सूझा, अपने पुत्र से कहा कि, "वैसे भी हमारा अंतिम समय नज़दीक है, तो क्यों न हम ईश्वर की प्रार्थना करें।"
उन्होंने दोनों टापू आपस में बाँट लिए। एक पर पिता और एक पर पुत्र, और दोनों अलग-अलग टापू पर ईश्वर की प्रार्थना करने लगे।
पुत्र ने ईश्वर से कहा, ''हे भगवन, इस टापू पर पेड़-पौधे उग जाए जिसके फल-फूल से हम अपनी भूख मिटा सकें।''
ईश्वर द्वारा प्रार्थना सुनी गयी, तत्काल पेड़-पौधे उग गये और उसमें फल-फूल भी आ गये। उसने कहा ये तो चमत्कार हो गया।
फिर उसने प्रार्थना कि, "एक सुंदर स्त्री आ जाए जिससे हम यहाँ उसके साथ रहकर अपना परिवार बसाएँ।"
तत्काल एक सुंदर स्त्री प्रकट हो गयी।
अब उसने सोचा कि मेरी हर प्रार्थना सुनी जा रही है, तो क्यों न मैं ईश्वर से यहाँ से बाहर निकलने का रास्ता माँग लूँ ? उसने ऐसा ही किया।
उसने प्रार्थना कि, एक नई नाव आ जाए जिसमें सवार होकर मैं यहाँ से बाहर निकल सकूँ।
तत्काल नाव प्रकट हुई और पुत्र उसमें सवार होकर बाहर निकलने लगा।
तभी एक आकाशवाणी हुई, बेटा तुम अकेले जा रहे हो? अपने पिता को साथ नहीं लोगे ?
पुत्र ने कहा, उनको छोड़ो, प्रार्थना तो उन्होंने भी की, लेकिन आपने उनकी एक भी नहीं सुनी। शायद उनका मन पवित्र नहीं है, तो उन्हें इसका फल भोगने दो ना ?
आकाशवाणी ने कहा, 'क्या तुम्हें पता है कि तुम्हारे पिता ने क्या प्रार्थना की ?
पुत्र बोला, नहीं।
आकाशवाणी बोली तो सुनो, तुम्हारे पिता ने एक ही प्रार्थना की... "हे भगवन! मेरा पुत्र आपसे जो भी माँगे, उसे दे देना क्योंकि मैं उसे दुःख में हरगिज़ नहीं देख सकता औऱ अगर मरने की बारी आए तो मेरी मौत पहले हो" और जो कुछ तुम्हें मिल रहा है उन्हीं की प्रार्थना का परिणाम है।
पुत्र बहुत शर्मिंदा हो गया।
*शिक्षा:-*
सज्जनों! हमें जो भी सुख, प्रसिद्धि, मान, यश, धन, संपत्ति और सुविधाएं मिल रही है उसके पीछे किसी अपने की प्रार्थना और शक्ति जरूर होती है लेकिन हम नादान रहकर अपने अभिमान वश इस सबको अपनी उपलब्धि मानने की भूल करते रहते हैं और जब ज्ञान होता है तो असलियत का पता लगने पर सिर्फ़ पछताना पड़ता है। हम चाह कर भी अपने माता-पिता का ऋण नहीं चुका सकते हैं। एक पिता ही ऐसा होता है जो अपने पुत्र को ऊच्चाईयों पर पहुँचाना चाहता है। पर पुत्र मां बाप को बोझ समझते हैं। इसलिए आप हमेशा जरुरतमंदों की सहायता करते रहिये।
*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
Jeetu dehati: 2️⃣4️⃣💎0️⃣6️⃣💎2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣
*🔥 आज की प्रेरणा प्रसंग 🔥*
*🌹 सुखी जीवन का रहस्य 🌹*
एक बार यूनान के मशहूर दार्शनिक सुकरात भ्रमण करते हुए एक नगर में गए। वहाँ उनकी मुलाकात एक वृद्ध सज्जन से हुई, दोनों आपस में काफी घुलमिल गए। वृद्ध सज्जन आग्रहपूर्वक सुकरात को अपने निवास पर ले गए। भरा-पूरा परिवार था उनका, घर में बहु-बेटे, पौत्र- पौत्रियां सभी थे। सुकरात ने बुजुर्ग से पूछा- आपके घर में तो सुख- समृद्धि का वास है। वैसे अब आप करते क्या हैं?
इस पर वृद्ध ने कहा- अब मुझे कुछ नहीं करना पड़ता। ईश्वर की दया से हमारा अच्छा कारोबार है, जिसकी सारी जिम्मेदारियां अब बेटों को सौंप दी हैं। घर की व्यवस्था हमारी बहुएं संभालती हैं। इसी तरह जीवन चल रहा है।
यह सुनकर सुकरात बोले- किन्तु इस वृद्धावस्था में भी आपको कुछ तो करना ही पड़ता होगा। आप बताइए कि बुढ़ापे में आपके इस सुखी जीवन का रहस्य क्या है?
वह वृद्ध सज्जन मुस्कराए और बोले -मैंने अपने जीवन के इस मोड़ पर एक ही नीति को अपनाया है कि दूसरों से ज्यादा अपेक्षाएं मत पालो और जो मिले, उसमें संतुष्ट रहो। मैं और मेरी पत्नी अपने पारिवारिक उत्तरदायित्व अपने बेटे-बहुओं को सौंपकर निश्चिंत हैं। अब वे जो कहते हैं, वह मैं कर देता हूं और जो कुछ भी खिलाते हैं, खा लेता हूं। अपने पौत्र-पौत्रियों के साथ हंसता-खेलता हूं। मेरे बच्चे जब कुछ भूल करते हैं, तब भी मैं चुप रहता हूँ। मैं उनके किसी कार्य में बाधक नहीं बनता। पर जब कभी वे मेरे पास सलाह- मशविरे के लिए आते हैं तो मैं अपने जीवन के सारे अनुभवों को उनके सामने रखते हुए उनके द्वारा की गई भूल से उत्पन्न दुष्परिणामों की ओर सचेत कर देता हूं। अब वे मेरी सलाह पर कितना अमल करते या नहीं करते हैं, यह देखना और अपना मन व्यथित करना मेरा काम नहीं है। वे मेरे निर्देशों पर चलें ही, मेरा यह आग्रह नहीं होता। परामर्श देने के बाद भी यदि वे भूल करते हैं तो मैं चिंतित नहीं होता। उस पर भी यदि वे मेरे पास पुन: आते हैं तो मैं पुन: नेक सलाह देकर उन्हें विदा करता हूं।
बुजुर्ग सज्जन की यह बात सुनकर सुकरात बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा- इस आयु में जीवन कैसे जिया जाए, यह आपने बखूबी समझ लिया है।"
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है,वो पर्याप्त है।।*
Jeetu dehati: *🙏🏻🌹 हरि शरणम् 🌹🙏🏻*
*इंसान के अन्दर अगर संतोष है तो वह सबसे ज्यादा अमीर है अगर शान्ति है तो सबसे ज्यादा सुखी है अगर दया है तो सबसे ज्यादा श्रेष्ठ है और अगर स्वस्थ हैं तो सबसे ज्यादा भाग्यशाली है।* *जो व्यक्ति दूसरों की धन-सम्पति,सौंदर्य, पराक्रम,कुल,सुख,सौभाग्य और सम्मान से ईर्ष्या व द्वेष करता है,वह असाध्
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