शाम तक का मुख्य समाचार प्राप्त हुआ *समस्या यह नहीं वह दरिन्दे है दिक्कत यह है गांधी की अहिंसा की नीति के चलते हिन्दुओ का खून ठंडा पड़ गया👆*
ममता जहां से आई थी वही वापस जा रही है। ममता TMC कांग्रेस में विलय की अटकलें चल रही है। शायद विलय अब ही हो जाय।
ब्रेकिंग न्यूज़ सिद्धार्थनगर
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👉 बड़ी चेतावनी: मौसम विभाग ने सिद्धार्थनगर जनपद और आस-पास के क्षेत्रों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है।
👉 अगले 3 घंटों के भीतर जनपद के कई हिस्सों में मौसम भीषण रूप ले सकता है।
👉 तूफ़ानी रफ़्तार: क्षेत्र में 60 से 80 किमी/घंटा की रफ़्तार से तेज़ आंधी-तूफ़ान आने की आशंका है।
👉 भीषण वेग: कुछ संवेदनशील जगहों पर हवा की यह रफ़्तार 90 किमी/घंटा तक भी पहुँच सकती है।
👉 भारी बारिश: आंधी के साथ-साथ आसमान में घने बादल छाने और मध्यम से भारी बारिश की संभावना है।
👉 वज्रपात का ख़तरा: मौसम विभाग ने आंधी-पानी के दौरान तेज बिजली कड़कने और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट दिया है।
👉 सुरक्षित रहने की अपील: प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि ख़राब मौसम के दौरान घरों के अंदर ही रहें।
👉 पेड़ों-खंभों से दूरी: राहगीरों और ग्रामीणों को आंधी के समय पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे न रुकने की सलाह दी गई है।
👉 किसान रहें सावधान: खेतों में काम कर रहे किसान भाइयों से मौसम बिगड़ते ही तुरंत पक्के आश्रय में जाने को कहा गया है।
Tejraftarnews.in
*प्रकाशनार्थ*
*जनसांख्यिकी परिवर्तन आयोग या 'हिंदू राज' की ओर लंबी छलांग!*
*(आलेख : राजेंद्र शर्मा)*
मोदीशाही के इरादों को समझने के लिए, क्रोनोलॉजी समझना कितना जरूरी है, यह अमित शाह खुद अपने मुंह से बता चुके हैं। सो जनसांख्यिकी परिवर्तन आयोग का मकसद समझने के लिए उसके आगे-पीछे की क्रोनोलॉजी से शुरू करना उपयोगी रहेगा। सभी जानते हैं कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में अपने हिसाब से बड़ी कामयाबी और खासतौर पर प. बंगाल में फतेह का झंडा गाड़ने के फौरन बाद, मई के आखिर में मोदी सरकार ने जनसांख्यिकी परिवर्तन पर उच्च स्तरीय कमेटी के गठन का ऐलान कर दिया।
इसकी दिशा में बढ़ने की औपचारिक शुरूआत, 2025 के प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण से हुई थी। लाल किले से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कथित 'घुसपैठ' से देश के लिए भारी खतरा बताते हुए, ऐसे आयोग के गठन के जरूरी होने का ऐलान किया था। इसकी भी एकदम तात्कालिक क्रोनोलॉजी तो यही थी कि 2025 के अप्रैल के आखिर में पहलगाम में आतंकी हमले ने जब जम्मू-कश्मीर में करीब पांच साल से जारी सीधे केंद्रीय शासन में सब कुछ सामान्य हो जाने के झूठे प्रचार की चिंदियां उड़ा दीं, उसके फौरन बाद ध्यान बंटाने के लिए संघ परिवार की ओर से देश के कई हिस्सों में आम तौर पर मुसलमानों और खासतौर पर कश्मीरियों को निशाना बनाया गया था।
और पहलगाम के 'जवाब' के नाम पर मई के शुरू में छेड़े गए 'आपरेशन सिंदूर' के अचानक रोके जाने के बाद, जब ध्यान बंटाने की जरूरत और ज्यादा बढ़ी, देश के विभिन्न हिस्सों में और सबसे बढ़कर उत्तरी भारत में, कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों की पकड़-धकड़ के नाम पर, बांग्लाभाषी मजदूरों के खिलाफ सरकारी अभियान छेड़ दिया गया। इस अभियान में संभवत: पहली बार, पुलिस-प्रशासन द्वारा 'घुसपैठिया' बताए जा रहे लोगों को, बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सीमा के विभिन्न हिस्सों से बांग्लादेश में धकेलने की कार्रवाई भी की गयी, जिसमें कुछ मामलों में तो नौकाओं से ले जाकर समुद्र में धकेल आने की कार्रवाई भी शामिल थी। यह सब किस कदर मनमाना था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कम से कम दो मामलों में, उच्च न्यायालयों द्वारा भारतीय नागरिक ठहराए जाने और देश में वापस लाने का आदेश दिए जाने के बाद, एक गर्भवती महिला और एक अन्य बंगाली मुसलमान को बांग्लादेश से वापस भी लाना पड़ा था। यानी यह वह समय है, जब मोदीशाही औपचारिक रूप से देश के पैमाने पर कथित 'घुसपैठिया विरोधी' मुहिम छेड़ती है। बेशक, 'घुसपैठियों' का खतरा किसी न किसी रूप में हमेशा से आरएसएस के प्रचार का एक केंद्रीय मुद्दा बना रहा है। बहरहाल, अपने पहले कार्यकाल के आखिर तक आते-आते और खासतौर पर उत्तर प्रदेश समेत उत्तरी भारत के भाजपा-शासित राज्यों में गोरक्षा-लव जेहाद-धर्मांतरण विरोधी कानून-समान नागरिक संहिता आदि की मुस्लिम-विरोधी पुकारों की आजमाइश से, मोदीशाही इस नतीजे पर पहुंच चुकी थी कि आक्रामक मुस्लिम विरोधी पहचान ही उसकी नैया पार लगाएगी। दूसरे कार्यकाल की शुरूआत में ही, संवैधानिक छल-कपट का सहारा लेकर, पहले आरएसएस की बहुत पुरानी मांग को पूरा करते हुए, जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ही नहीं, राज्य का दर्जा भी खत्म कर, देश के इकलौते मुस्लिम बहुल राज्य को सजा देने के जरिए, राज्य की नजरों में मुसलमानों का ही दर्जा कमतर करने का संदेश दिया गया। और इसके फौरन बाद सीएए लाकर, मुस्लिम और गैर-मुस्लिम अवैध प्रवासियों में अंतर करने के जरिए, मुसलमानों के पराया होने के ऐलान को भारतीय नागरिक की परिभाषा में भी रोप दिया गया। अब परिभाषा से ही 'घुसपैठिया'— जिससे कि खतरा था — मुसलमान ही हो सकता था। हिंदू तथा अन्य धर्म के अवैध प्रवासियों के लिए तो भारतीय नागरिकता आसान बनाकर, उनका स्वागत किया जाना था!
यहीं से आरएसएस के घुसपैठ के पुराने राग को वर्तमान शासन की विचारधारा के रूप में नयी ऊंचाई पर पहुंचाने की शुरूआत होती है। सीएए के व्यापक जनतांत्रिक विरोध को मोदीशाही अपने दमनतंत्र के सहारे तो पूरी तरह से नहीं कुचल सकी, पर उसका जवाब उसने मुस्लिम विरोधी आक्रामकता बढ़ाने के जरिए दिया। खासतौर पर, बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव के समय, गृहमंत्री अमित शाह ने न सिर्फ चर्चित तरीके से अपने राज की क्रोनोलॉजी समझायी कि कैसे पहले सीएए से मुसलमानों को नागरिकता अधिकार से परे कर के 'घुसपैठिया' बनाया जाएगा और फिर, हिंदुओं आदि अन्य को नागरिकता दी जाएगी, बल्कि उन्होंने कहा कि घुसपैठिये 'दीमक हैं, उन्हें चुन-चुनकर, एक-एक को निकाल बाहर करेंगे।'
बंगाल से ही इस घुसपैठिया राग को संघ-भाजपा के प्रचार की मुख्य थीम बनाने की शुरूआत हुई, जिसे 2024 के आम चुनाव तक आते-आते मोदीशाही ने देश के पैमाने पर प्रचार की अपनी एक मुख्य थीम बना लिया। बेशक, इस आम चुनाव में मोदी खुद खासतौर पर मतदान के शुरूआती चरणों में बिहार, बंगाल, झारखंड में घुसपैठियों के खतरे के राग से शुरूआत करने के बाद, बाजी हाथ से निकलती नजर आने की हताशा में जल्द ही, विरोधी 'मंगलसूत्र छीन लेंगे और ज्यादा बच्चे पैदा करने वालों (मुसलमानों) को दे देंगे' पर पहुंच गए, जबकि आदित्यनाथ जैसे उनकी पार्टी के अन्य प्रमुख प्रचारक 'बंटोगे तो कटोगे' के अपने नारों के साथ, सीधे मुस्लिम विरोधी नारों से शुरूआत ही कर रहे थे।
इसके बाद भी जब सत्ता संघ-भाजपा के हाथ से जाती-जाती बची, एक ओर चुनाव आयोग पर पूरी तरह से कब्जा करने के जरिए, चुनावों को ही मैनिपुलेट करने के मुकम्मल इंतजामात किए गए, जिनमें मतदाता सूचियों को ही सत्ताधारी पार्टी के फायदे के हिसाब से काटना-छांटना-उनमें नाम जोड़ना खास है, तो दूसरी ओर वक्फ संशोधन कानून लाने तथा समान नागरिक संहिता की चर्चा देश के स्तर पर लाने के जरिए, मौजूदा सत्ता के मुस्लिम विरोधी चेहरे को और चमकाया गया। इस दौरान, सिर्फ गोरक्षा के नाम पर ही नहीं, किसी भी बहाने से, और बहुत बार तो बिना बहाने के, मुसलमानों की लिंचिंग से लेकर, शासन के व्यवहार में भेदभाव तक, सब को सामान्य बनाया ही जा चुका था। इसी सब की पृष्ठभूमि में 2025 के 15 अगस्त के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने राष्ट्र की सुरक्षा, संस्कृति, धर्म, सब के लिए 'जनसांख्यिकी परिवर्तन के खतरे' का बखान किया था और उससे निपटने के लिए उच्चस्तरीय आयोग की जरूरत का ऐलान किया था।
इससे कुछ पहले ही, उनके शासन की चिंताओं और धारणाओं से संचालित चुनाव आयोग मतदाता सूचियों के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) की घोषणा कर चुका था, जिसका असली मकसद मतदाता सूचियों के कथित रूप से भर गयी, 'घुसपैठियों' की विशाल संख्या की छंटनी करना बताया जा रहा था। हैरानी की बात नहीं है कि एसआईआर को शुरू से ही खासतौर पर मुसलमान मतदाताओं की नागरिकता की जांच में बदल दिया गया। लेकिन, बिहार में जहां से एसआईआर की प्रक्रिया की शुरूआत हुई, इस प्रक्रिया ने दस फीसद के करीब मतदाताओं की छंटनी तो कर दी, पर घुसपैठियों की पहचान तथा छंटनी करने में पूरी तरह से विफल ही रही। वहां मुसलमान तो मिले और कुछ इलाकों में काफी मिले, पर उन्हें घुसपैठिया साबित नहीं किया जा सका।
इसीलिए, एसआईआर के अगले चरण में और खासतौर पर प. बंगाल में चुनाव आयोग ने, एसआईआर में ही सुधार कर लिया और'तार्किक विसंगति' की अनोखी श्रेणी का आविष्कार कर, खास तौर पर सुनिश्चित किया कि मुसलमान जैसे लगने वाले नामों को छांटकर संदिग्ध घुसपैठियों के खाने में डाला जाए। इसी का नतीजा, न सिर्फ 27 लाख लोगों के, जिनमें मुसलमानों का फीसद बहुत ज्यादा है, न्यायाधीन होते हुए भी मताधिकार से वंचित किए जाने के रूप में सामने आया बल्कि 72 चुनाव अधिकारियों के ही सिर्फ इसलिए मताधिकार से वंचित कर दिए जाने के रूप में भी सामने आया कि वे सभी मुसलमान थे।
इस तरह, गृहमंत्री अमित शाह बार-बार, तथाकथित घुसपैठियों के लिए अपने राज की जिस 'डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट' नीति का ऐलान करते रहे हैं, उसके डिटेक्ट और डिलीट के पहले दो चरण मोदीशाही के अंगूठे के नीचे दबे चुनाव आयोग ने एक प्रकार से संभाल लिए हैं। पर इसमें एक समस्या है। चुनाव आयोग भी ईमानदारी से डिटेक्ट करे, तो उसे किसी उल्लेखनीय संख्या में वास्तविक घुसपैठिए नहीं मिलेंगे। क्यों? क्योंकि बड़े पैमाने पर विदेशी घुसपैठ और उसमें भी मुसलमानों की घुसपैठ, एक मिथक है, जो आरएसएस के सांप्रदायिक प्रचार से निकला है। उल्टे बांग्लादेश की स्थापना के समय की उथल-पुथल के बाद से, वहां से अवैध रूप से आकर भारत में बसने वालों में हिंदुओं की ही संख्या ज्यादा है। दूसरी ओर, आमतौर पर बांग्लादेशी मुसलमानों के लिए ऐसे देश में जाकर बसने का क्या आकर्षण हो सकता है, जिसकी प्रति व्यक्ति आय तथा मानव विकास का दर्जा, उनके अपने देश से कुछ न कुछ नीचे ही है और जहां मुसलमानों के लिए असुरक्षा बढ़ती जा रही है। इस सच्चाई के सामने यही आसान और वर्तमान सत्ताधारियों के लिए उपयोगी है कि घुसपैठिया और मुसलमान को समानार्थी बना दिया जाए।
और जनसांख्यिकी परिवर्तन आयोग, जिसका हाल में गठन किया गया है, इस तरह पहचाने गए संदिग्ध घुसपैठियों को 'डिपोर्ट' करने का रास्ता तैयार करने के लिए है। चूंकि यही इस आयोग का मुख्य उद्देश्य है, इसीलिए हैरानी की बात नहीं है कि इस आयोग का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के बहुत समय पहले सेवानिवृत्त न्यायाधीश को बनाया गया है, जिसको खुद उसके सार्वजनिक बयान के अनुसार, जनसांख्यिकी के बारे में कुछ अता-पता ही नहीं है। अन्य सदस्यों में भी सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस अफसरों से लेकर, जनगणना आयुक्त तथा एक अर्थशास्त्री तक को रखा गया है, पर जनसांख्यिकी के एक भी जानकार को शामिल नहीं किया गया। जनसांख्यिकी का जानकार, न सिर्फ इस गुब्बारे को ही पंचर सकता था, बल्कि जनसांख्यिकी से जुड़ी वास्तविक चिंताओं को सामने ला सकता था, जैसे देश की प्रजनन दर का आबादी की पूरी भरपाई की दर से नीचे जाना, आबादी में बुुजुर्गों का बढ़ता हिस्सा आदि, जो गंभीर नीतिगत विचार तथा बदलावों की मांग करती हैं।
इस आयोग के मकसद में अगर किसी को संदेह हो भी, तो इस तथ्य से दूर हो जाना चाहिए कि आयोग की विचार शर्तों में 'अवैध आप्रवास' से निपटने की जरूरत को प्रमुखता दी गयी है। और अमित शाह ने इस कदम के सिलसिले में बाकायदा बयान दिया है कि, 'अवैध घुसपैठ तथा अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव के दूसरे कारण, किसी राष्ट्र के वर्तमान और भविष्य के लिए, एक बहुत बड़ी चुनौती हैं।' अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव के 'दूसरे कारण' का इशारा लगता है कि मुसलमानों की कुल प्रजनन दर की ओर है, जिसके खतरा माने जाने के निहितार्थ और भी अनिष्टकर लगते हैं। क्या इस आयोग का उपयोग, डिपोर्ट होने से बच गए मुसलमानों के अधिकारों को और कमतर करने का रास्ता बनाने लिए किया जाएगा? पर इसकी चर्चा फिर कभी और।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और साप्ताहिक पत्रिका 'लोकलहर' के संपादक हैं।)
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*शाम की देश राज्यों से बड़ी खबरें*
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*1* मोदी का बतौर PM 4399 दिन का कार्यकाल, नेहरू का रिकॉर्ड टूटा; कैबिनेट ने तालियां बजाकर स्वागत किया, NDA की बैठक कुछ देर में
*2* नेहरू से आगे निकले मोदी, चारों धामों में हुई पूजा, लगातार सबसे लंबे समय तक इलेक्टेड पीएम बने; केदारनाथ में हवन, बद्रीनाथ में हुआ यज्ञ
*3* सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक निर्वाचित पीएम के रूप में सबसे लंबी अवधि तक पद पर रहने का नया रिकॉर्ड कायम किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को रेखांकित करते हुए आज हुई कैबिनेट की बैठक में बाकायदा एक प्रस्ताव भी पारित किया गया है।
*4* केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से पीएम मोदी ने 'सात संकल्प' पेश किए हैं, जिनमें डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, स्टार्टअप इंडिया, नवाचार और उद्यमिता पर विशेष जोर दिया गया है। इन सात संकल्पों में कौशल विकास को प्राथमिकता देने के साथ-साथ खेल जगत और फिटनेस के लिए कार्यक्रम चलाने का आह्वान भी शामिल है,
*5* आंध्र प्रदेश के अमरावती को विकसित करने की दिशा में केंद्र ने अहम कदम उठाया है। कैबिनेट ने अमरावती में केंद्र सरकार की दो प्रमुख अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) परियोजनाओं को हरी झंडी दिखा दी है। इसमें दो प्रमुख निर्माण शामिल हैं:
*6* इस नए मेट्रो कॉरिडोर के चालू होने के बाद गुजरात के दो प्रमुख शहरों (अहमदाबाद और गांधीनगर) की कनेक्टिविटी पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी। चरण 2ए का काम पूरा होने और इसके शुरू होने पर, अहमदाबाद-गांधीनगर मार्ग पर कुल 77.63 किलोमीटर लंबा एक सक्रिय और विशाल मेट्रो रेल नेटवर्क आम जनता के उपयोग के लिए उपलब्ध हो जाएगा
*7* मीनाक्षी का नामांकन खारिज करने पर चुनाव आयोग से शिकायत, आयोग ने 2 घंटे में फैसला लेने की बात कही; भोपाल में कांग्रेस का सामूहिक उपवास
*8* मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताते हुए बीती रात धरना दिया। आज पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग जाकर आय़ुक्त से मुलाकात की।
*9* कांग्रेस में विलय को तैयार हो गईं ममता बनर्जी, लेकिन भतीजे अभिषेक ने मांग लिया राज्यसभा खरगे वाला पद
*10* TMC में टूट जारी, एक और राज्यसभा सांसद का इस्तीफा, ममता से अब तक 58 विधायक, 20 लोकसभा सांसद अलग हुए; अभिषेक राहुल से मिले
*11* RSS मुख्यालय,महाराष्ट्र CM दफ्तर,मुंबई-पुणे मेयर ऑफिस उड़ाने की धमकी, खालिस्तान नाम से भेजे गए ईमेल, महाराष्ट्र में जांच एजेंसियां सतर्क
*12* चंडीगढ़ से दिल्ली जा रही फ्लाइट में हंगामा, लैंडिंग के समय यात्री पैनिक हुआ, मुक्के मारकर शीशा तोड़ा; क्रू मेंबर्स के साथ बदसलूकी
*13* राममंदिर के चढ़ावे में चोरी के दावे पर PMO सख्त, ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगी; भाजपा नेता ने लेटर लिखकर CBI जांच की मांग की थी
*14* ईरान का बहरीन, कुवैत, जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला, अमेरिकी एयरस्ट्राइक के जवाब में कार्रवाई; ट्रम्प बोले थे- हेलिकॉप्टर गिराने का बदला लेंगे
*15* चांदी ₹9,658 गिरकर ₹2.36 लाख किलो पर आई, 10 दिन में ₹27 हजार की गिरावट; सोना ₹4,090 टूटा, 10 ग्राम की कीमत ₹1.48 लाख
*16* सेंसेक्स में 100 अंक की बढ़त, 74,000 पर कारोबार कर रहा, IT और FMCG शेयर्स में ज्यादा खरीदारी
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*(🌍Vijay🪷krishna✍️)*
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