आज सुबह का मुख्य कारण समाचार पत्र ✉ बयानबाजी और हकीकत : पश्चिम बंगाल में भाजपा शासन के एक माह* *(आलेख : सुबिनॉय मौलिक, अंग्रेजी से अनुवाद : संजय पराते)*

स्वदेशी जागरण मंच ,देवघर ने विश्व पर्यावरण दिवस पर किया वृक्षारोपण , पर्यावरण संरक्षण का लिया - संकल्प देवघर। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर पर्यावरण संरक्षण अभियान को गति प्रदान करते हुए स्वदेशी जागरण मंच द्वारा स्थानीय टावर चौक स्थित आर० मित्रा ० स्कूल परिसर में वृक्षारोपण किया गया ।इस अवसर पर मंच के प्रांत समन्वयक मनोज सिंह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर यह दिन हमें याद स्मरण कराता है ,कि स्वच्छ पर्यावरण केवल प्रकृति का विषय नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व, संवैधानिक मूल्यो , और सभ्यता के भविष्य का प्रश्न है। जल, जंगल ,जमीन ,स्वच्छ वायु और जैव विविधता केवल संसाधन नहीं , बल्कि जीवन का आधार स्तंभ है। मंच के जिला संयोजक संजय सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अभियान को वास्तविक गति प्रदान

Jun 06, 2026 - 10:14
0 8
आज सुबह का मुख्य कारण समाचार पत्र ✉ बयानबाजी और हकीकत : पश्चिम बंगाल में भाजपा शासन के एक माह*  *(आलेख : सुबिनॉय मौलिक, अंग्रेजी से अनुवाद : संजय पराते)*
Dr. Jitendra Kumar

*प्रकाशनार्थ*

*बयानबाजी और हकीकत : पश्चिम बंगाल में भाजपा शासन के एक माह*

*(आलेख : सुबिनॉय मौलिक, अंग्रेजी से अनुवाद : संजय पराते)*

पश्चिम बंगाल में भाजपा को सरकार में आकर सत्ता संभाले हुए लगभग एक महीना हो गया है। इस बेहद कम समय में ही, सरकार के प्रशासनिक रवैये को लेकर जनता में बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है। यह बेचैनी सिर्फ़ फेरीवालों और विक्रेताओं को बेरहमी से हटाने और राज्य में "बुलडोज़र संस्कृति" लाने के खौफ़नाक नतीजों की वजह से ही नहीं है। यह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और दूसरे नेताओं की "सरकारी दखल" वाली बयानबाजी तक ही सीमित नहीं है, जो पाठ्यपुस्तकों और सामाजिक जीवन में पूरी तरह से बदलाव लाने की वकालत कर रहे हैं।

इसके बजाय, एक ज़्यादा व्यापक और परेशान करने वाली बात ज़ोर पकड़ रही है : यह सरकार बड़े-बड़े वादे करने में तो माहिर है, लेकिन जब उन्हें असल में पूरा करने की बात आती है, तो काफ़ी पीछे रह जाती है। नतीजन, इस बात को लेकर गहरे सवाल उठने लगे हैं कि असल में यह प्रशासन लोगों के हितों पर कितना केंद्रित है।

*छिन्न-भिन्न प्राथमिकताएँ*

सरकार की सांस्कृतिक मुखरता और उसकी आर्थिक सुस्ती के बीच एक चौंकाने वाला विरोधाभास सामने आया है। पर्यवेक्षक यह सवाल उठा रहे हैं कि स्कूलों और मदरसों में 'वंदे मातरम' गान को अनिवार्य बनाने के लिए इतनी बेताबी क्यों दिखाई जा रही है, जबकि इसके विपरीत, जब आम जनता के ठोस कल्याण की बात आती है, तो गति बिल्कुल धीमी पड़ जाती है।

कई नागरिकों के मन में एक साझा सवाल उठ खड़ा हुआ है : क्या फेरीवालों को हटाना, लोगों को उनके घरों से बेदखल करना, 1950 के 'पशु वध/बलि अधिनियम' को सख्ती से लागू करना, या ऐसे निर्देश जारी करना जो सरकारी कर्मचारियों की आवाज़ को प्रभावी ढंग से दबा देते हैं — क्या सचमुच यही इस समय पश्चिम बंगाल की सबसे ज़रूरी और अहम समस्याएँ हैं? चुनाव जीतने के बाद उनकी प्राथमिकताओं की सूची में ये कदम निश्चित रूप से शामिल नहीं थे। तो फिर, भाजपा के नए नेतृत्व ने इन वैचारिक दांव-पेचों को अपनी प्राथमिकताओं की सूची में सबसे ऊपर रखने का फैसला क्यों किया है?

आलोचकों का तर्क है कि मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के बाद पैदा हुए लोकतांत्रिक संकट को तुरंत सुलझाना कहीं ज़्यादा ज़रूरी है। एक बेहद डरावनी प्रक्रिया के ज़रिए किए गए इस पुनरीक्षण में, लगभग 27 लाख लोगों को मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया। लाखों नागरिकों के नाम, जिन्हें सूची से हटा दिया गया है या जो अभी भी सुनवाई की पेचीदा प्रक्रिया में फँसे हुए हैं, उन्हें वापस शामिल करने की दिशा में काम करने के बजाय, नई बनी राज्य सरकार ने ठीक इसी समय 'नागरिकता संशोधन अधिनियम' को लागू करने की घोषणा करना चुना।

इसके साथ ही, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी जैसे प्रमुख व्यक्ति के नेतृत्व वाले प्रशासन ने घुसपैठियों के संबंध में अपनी नीति को "पहचानो, हटाओ और निर्वासित करो" (डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट) घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें राज्य के भीतर "निरोध केंद्रों (होल्डिंग सेंटर्स)" में रखने की योजना की घोषणा की है, जो असम के नजरबंदी केंद्रों (डिटेंशन सेंटर्स) की तर्ज़ पर होंगे। इन तीनों कदमों से एक बात बिल्कुल स्पष्ट है : इसका उद्देश्य उनके चुनाव-पूर्व नारे "डर भगाओ, विश्वास जगाओ" को पूरा करना नहीं है ; बल्कि, इसका मकसद समाज में दहशत फैलाना और धार्मिक ध्रुवीकरण के नाम पर आपसी अविश्वास और संदेह को बढ़ावा देना है। अब आम नागरिकों के मन में गहरी आशंका घर कर गई है।

*अगंभीर वादे*

 

शुरू से ही, चुनाव-पूर्व किए गए वादों और अब जो हो रहा है, उसके बीच तालमेल का अभाव साफ़-साफ़ दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, राज्य सरकार के कर्मचारियों की मांगों को ही ले लीजिए — एक ऐसा क्षेत्र, जहाँ भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान वादे करने में खूब दरियादिली दिखाई थी। सड़कों पर लगे विज्ञापन बोर्डों में वादा किया गया था कि सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर सातवें वेतन आयोग को लागू कर दिया जाएगा। इस वादे को पूरा करने के बजाय, मंत्रिमंडल ने विभिन्न सरकारी निकायों और संस्थानों के लिए एक आयोग गठित करने का केवल 'सैद्धांतिक निर्णय' लिया है। कर्मचारी इसे पिछली टीएमसी सरकार द्वारा फरवरी में पेश किए गए बजट की घोषणा का महज़ एक 'नया रंग रूप' मान रहे हैं, जो चुनाव से पहले किए गए स्पष्ट वादे को पूरा करने में नाकामी दिखाता है।

बकाया महंगाई भत्ते को लेकर भी कर्मचारी चिंतित हैं। विपक्ष में रहते हुए महंगाई भत्ता आंदोलन का समर्थन करने के बावजूद, मौजूदा मुख्यमंत्री अप्रैल के लिए महंगाई भत्ता में पहले से की गई 4% की बढ़ोतरी की बजटीय घोषणा पर चुप हैं। 2009 के रोपा नियमों से जुड़ा कानूनी विवाद अभी भी जारी है और इसका कोई समाधान नहीं निकला है। ऐसा लगता है कि मौजूदा सरकार भी पिछली सरकार की तरह ही, राजकोषीय घाटे और अदालत में मामले के लंबित रहने का हवाला देकर मामले को टालने की रणनीति अपना रही है। केंद्र और राज्य के बीच महंगाई भत्ता के मौजूदा 42% के अंतर को पाटना अब और भी मुश्किल लग रहा है।

*कानून के राज का ध्वंस*

हाल ही में पश्चिम बंगाल की सड़कों पर एक नया उपद्रव खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को — जो पहले से ही आपसी कलह से जूझ रहे हैं — सड़कों पर ऐसे हमलों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें "जनता का गुस्सा" कहा जा रहा है। पिछले पंद्रह सालों में, वामपंथी लोग भी इसी तरह के सुनियोजित और बर्बर हमलों का बार-बार शिकार होते रहे हैं ; तथाकथित "जनता के गुस्से" की आड़ में उन पर नियमित रूप से हमले किए जाते रहे हैं, ताकि उनकी आवाज़ को दबाया जा सके।

अभिषेक बनर्जी या कल्याण बनर्जी जैसी हस्तियों से जुड़ी घटनाएँ दो अलग-अलग सच्चाईयों की ओर इशारा करती हैं : पहली, ये घटनाएं एक बेहद कमज़ोर न्यायिक व्यवस्था की ओर संकेत करती हैं, जहाँ बड़े बदलाव के दावों के बावजूद, कानून का राज कमज़ोर बना हुआ है, क्योंकि सड़कों पर स्थापित प्रशासनिक और वैधानिक मानदंडों की बार-बार अवहेलना की जाती है ; दूसरी, ये शारीरिक हमले अनजाने में एक राजनीतिक पुनरुद्धार को बढ़ावा दे रहे हैं, क्योंकि ये जनता का ध्यान फिर से तृणमूल कांग्रेस की ओर खींच रहे हैं — संभवतः उस विपक्षी दल को फिर से जीवित कर रहे हैं, जो आंतरिक कलह, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और जनता से दूरी के कारण लगभग पूरी तरह से हाशिए पर चला गया है।

मौजूदा प्रशासनिक माहौल में बुनियादी मानवीय गरिमा के पतन पर मानवाधिकार कार्यकर्ता और भी सवाल उठा रहे हैं। वे पूछ रहे हैं कि क्या किसी आरोपी को — भले ही उसका अपराध कितना भी जघन्य क्यों न हो — कमर में रस्सी बांधकर, अर्धनग्न अवस्था में सड़कों पर घुमाना, मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन नहीं है? उन्हें आशंका है कि भले ही यह सख़्त रवैया शुरुआत में अपराधियों को निशाना बनाता हो, लेकिन अंततः यह व्यवस्था को जवाबदेह ठहराने के किसी भी वैध मानवीय अधिकार को खतरे में डाल देगा।

*नौकरशाही की भूलभुलैया*

चुनावी वादे के मुताबिक 'लक्ष्मी भंडार' से 'अन्नपूर्णा योजना' की ओर बदलाव, प्रशासनिक रवैये में आए एक और स्पष्ट परिवर्तन को उजागर करता है। शुरुआत में, भाजपा ने यह घोषणा की थी कि जो भी लोग पहले मिलने वाली कल्याणकारी आर्थिक सहायता प्राप्त करते थे, उन्हें नई 'अन्नपूर्णा योजना' के तहत अपने-आप ही 3,000 रुपये मिलने लगेंगे। बहरहाल, चुनाव समाप्त होते ही, भाजपा का एक बिल्कुल ही अलग चेहरा सामने आया है।

इस घोषणा के बावजूद कि यह योजना 1 जून को शुरू होगी और मौजूदा लाभार्थियों के खातों में फंड अपने-आप ट्रांसफर हो जाएगा, हकीकत में कहीं ज़्यादा मुश्किल भरी साबित हुई है। अब इस योजना का लाभ उठाने के लिए एक जटिल 12-पृष्ठ का आवेदन पत्र भरना ज़रूरी हो गया है। यह शर्त लाखों वंचित महिलाओं के लिए भारी परेशानी का सबब बन गई है।

इस विस्तृत नए दस्तावेज़ को भरने में बहुत ज़्यादा बारीकियों की ज़रूरत है, जिसमें आवेदक की पहचान के साथ ही संवेदनशील दस्तावेज़ और मतदाता का पूरा डेटा शामिल है। इसके अलावा, इसमें परिवार के हर सदस्य की निजी पहचान और आय की जानकारी देना ज़रूरी है, साथ ही यह भी साफ़-साफ़ बताना होगा कि क्या घर में तीन से ज़्यादा कमरे हैं। इस तरह की बारीक जाँच से मज़दूर वर्ग में काफ़ी चिंता फैल गई है कि इस फ़ॉर्म को भरते समय वे कहीं कोई ऐसी ग़लती न कर बैठें, जिससे वे अयोग्य घोषित हो जाएँ।

"क्या इस फ़ॉर्म का मकसद मदद देना है, या यह लोगों को बाहर करने की वजहें पहचानने का एक ज़रिया है? हर घर के सदस्य की निजी जानकारी या हमारी प्रॉपर्टी के कागज़ात की ज़रूरत क्यों है?" — राज्य भर में नाराज़ औरतें इन नई शर्तों पर सवाल उठा रही हैं। इस बीच, राज्य की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री, अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि सिर्फ़ इस फ़ॉर्म को सही-सही भर देने से यह गारंटी नहीं मिलती कि किसी को अन्नपूर्णा योजना का पैसा मिल ही जाएगा; उन्होंने कहा कि कई दूसरे पहलुओं की भी बारीकी से जाँच की जाएगी। मंत्री के इस बयान के बाद, और ज़्यादा भ्रम फैल गया है। लोग साफ़ तौर पर देख रहे हैं कि चुनावों से पहले, नई योजनाओं के तहत मिलने वाले फ़ायदों की एक पूरी लिस्ट जारी की गई थी; लेकिन अब, उन्हें असल में जो मिल रहा है, वह उन तरीकों की एक पूरी लिस्ट है, जिनका इस्तेमाल कुछ खास लोगों को ये फ़ायदे मिलने से रोकने के लिए किया जा रहा है।

*खोखले वादे*

इन ढांचागत रुकावटों को और भी गंभीर बना रहा है एक ज़बरदस्त आर्थिक झटका। मोदी सरकार ने महज़ 15 से 20 दिनों के भीतर ही पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी कर दी है। कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी का असर पूरे बाज़ार पर पड़ रहा है, जिससे ज़रूरी चीज़ों के दाम आसमान छू रहे हैं और आम आदमी के रसोई के बजट पर भारी मार पड़ रही है। पूरे देश में ईंधन की कीमतों में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी कोलकाता में दर्ज की गई है, जहाँ पेट्रोल की कीमत 113.51 रूपये प्रति लीटर और डीज़ल की कीमत 99.82 रूपये तक पहुँच गई है।

पिछली सरकार से टैक्स में राहत की मांग करने के बावजूद, मौजूदा भाजपा नेतृत्व ने ईंधन पर लगने वाले अपने हिस्से के टैक्स को माफ करने के मामले में पूरी तरह से चुप्पी साध ली है। इसी तरह, चुनाव से पहले वीडियो में प्रचार किया गया था कि खाना पकाने वाला गैस सिलेंडर सिर्फ़ 450 रूपये में देने का वादा किया गया था, लेकिन वह भी पूरा नहीं हो पाया है। ये सब बस सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर वायरल वीडियो बनकर ही रह गए हैं।

अपने रिकॉर्ड का बचाव करने के लिए, सरकार के समर्थक 1 जून को महिलाओं के लिए शुरू की गई मुफ़्त बस यात्रा योजना का हवाला देते हैं। बहरहाल, आलोचकों का कहना है कि ज़्यादातर रूटों पर यह उपाय महज़ कागज़ी है, क्योंकि राज्य के बस बेड़े को काफ़ी समय पहले ही बड़े पैमाने पर खत्म कर दिया गया था। नीले और सफ़ेद रंग की सरकारी बसें मुख्य यात्रा मार्गों पर लगभग न के बराबर ही दिखाई देती हैं, जिससे परिवहन निगम (डब्ल्यूबीटीसी) ल के कई डिपो खाली पड़े हैं।

इस संकट के कारण नागरिकों को निजी बसों, ऑटो-रिक्शा और ई-रिक्शा (टोटो) पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जो ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण लगातार महंगे होते जा रहे हैं। जैसा कि डोमकल से वामपंथी विधायक मुस्तफिजुर रहमान (राणा) ने मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में उल्लेख किया है, बहरामपुर-डोमकल-जलांगी जैसे मार्गों पर सरकारी बस सेवा तो बिल्कुल नहीं है।

*ग्रामीण बहिष्करण*

ग्रामीण क्षेत्रों में संकट का और भी खतरनाक आयाम धीरे-धीरे सामने आ रहा है : भाजपा सरकार राज्य के नौ प्रमुख जिलों में धान की खरीद नहीं करेगी। फिलहाल यह निर्देश रबी सीजन के लिए जारी किया गया है।

इस रबी मौसम में धान की खरीद के दायरे से पूरी तरह बाहर रखे गए जिले हैं : कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, बांकुड़ा और पूर्व मेदिनीपुर। इन नौ जिलों के किसानों से खरीद पूरी तरह रोकने के फैसले के साथ-साथ, सुवेंदु अधिकारी सरकार ने खरीदी के कुल लक्ष्यों में भी भारी बदलाव किया है।

पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में रबी मौसम में धान की खरीद का कुल लक्ष्य 60 प्रतिशत कम कर दिया गया है। यह पिछले साल के 5 लाख मीट्रिक टन से घटकर मात्र 2 लाख मीट्रिक टन रह गया है। प्रशासन ने यह भी सूचित किया है कि वह सेंट्रल पूल' के लिए किसी भी धान की खरीद नहीं करेगा, और सारी गतिविधियाँ पूरी तरह से 'स्टेट पूल' तक ही सीमित रहेंगी। इस परिचालन बंदी के कारण, इन महत्वपूर्ण कृषि केंद्रों के लाखों किसान सरकारी बिक्री माध्यमों से पूरी तरह वंचित हो गए हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर यह आबादी शोषण करने वाले बिचौलियों और दलाल गिरोहों के हाथों 'मजबूरी में कम दाम पर बेचने' के लिए विवश हो गई है।

*सामाजिक सुरक्षा पर प्रहार*

पिछड़े अल्पसंख्यकों को ओबीसी आरक्षण से वंचित करना भाजपा का चुनाव-पूर्व का एक प्रमुख एजेंडा था, और सत्ता में आते ही उन्होंने इसे वापस लेने की दिशा में तेज़ी से कदम उठाए हैं। 2011 से पहले मौजूद आरक्षण सूची का सख्ती से पालन करते हुए, सुवेंदु अधिकारी सरकार ने प्रभावी रूप से ओबीसी आरक्षण कोटा को 17% से घटाकर 7% कर दिया है। 

यह 17% कोटा फरवरी 2010 में बुद्धदेव भट्टाचार्य की वाम मोर्चा सरकार द्वारा 'ओबीसी-ए' श्रेणी के तहत स्थापित किया गया था। यह कदम मुस्लिम समुदाय के अत्यंत गरीब और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग की स्पष्ट सिफारिशों के बाद उठाया गया था। राज्य मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने इस आरक्षण को वापस लेने के कदम का बचाव करते हुए, पुरानी आरक्षण व्यवस्था को "वोट-बैंक की राजनीति" और "तुष्टीकरण" करार दिया है। उनका कहना है कि इस आरक्षण के कारण पात्र हिंदू समुदाय हाशिए पर चले गए है। उन्होंने पिछड़ा वर्ग के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीबीसी) से इस मामले की समीक्षा करवाने के लिए औपचारिक रूप से पहल करने की भी घोषणा की है।

इस नीतिगत बदलाव पर राजनीतिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की प्रदेश अध्यक्ष जहानआरा खान ने चेतावनी दी है कि इस फैसले को वापस लेने से लगभग 2 करोड़ गरीब अल्पसंख्यकों से उनके विकास के संवैधानिक अधिकार छिन जाएंगे। वाम मोर्चा के नेताओं ने इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अल्पसंख्यकों के प्रति पूर्वाग्रह का एक खुला प्रदर्शन बताया है, जिससे पूरे राज्य में सामाजिक-आर्थिक प्रगति बाधित होगी और धार्मिक ध्रुवीकरण और गहराएगा।

*स्मार्ट हमला*

बिजली व्यवस्था का प्रबंधन भी अब एक बड़े और आक्रामक प्रशासनिक बदलाव का निशाना बन गया है। अब यह साफ़ हो गया है कि चुनाव से पहले किया गया "200 यूनिट मुफ़्त बिजली" का वादा, असल में चुनाव प्रचार का एक हथकंडा (जुमला) भर था। इसके विपरीत, 'डबल-इंजन' वाली सरकार ने राज्य के बिजली उपभोक्ताओं पर दोतरफ़ा हमला करने की पूरी योजना तैयार कर ली है — जिसके तहत बिजली की दरें बढ़ाई जाएंगी और साथ ही 'स्मार्ट मीटर' लगाने का काम भी शुरू किया जाएगा।

चुनावों से पहले, भाजपा ने अपने घोषणापत्र (संकल्प पत्र) में राज्य के उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का स्पष्ट वादा किया था। इसके बावजूद, उस वादे को पूरा करने से पहले ही, केंद्र और राज्य सरकारों ने उपभोक्ताओं पर बढ़ी हुई दरों और स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के रूप में दोहरी मार डाल दी है।

राजारहाट में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, राज्य मंत्री अग्निमित्रा पॉल और विभिन्न अधिकारियों के बीच हुई एक बैठक के बाद, बिजली के लिए एक संयुक्त रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। चुनाव से पहले किए गए कल्याणकारी वादों से हटकर, सरकार इस जुलाई से डब्ल्यूबीएसईडीसीएल नेटवर्क के तहत 2 करोड़ घरों में स्मार्ट मीटर लगाना शुरू करेगी। बाद में ये मीटर प्रीपेड यूनिट में बदल जाएंगे, जिससे उपभोक्ताओं को पूरी राशि पहले से ही चुकानी होगी।

*एक चिंताजनक रुझान*

पश्चिम बंगाल में नई सरकार के पहले महीने ने चुनावी वादों और शासन की असलियत के बीच एक गहरी खाई को उजागर कर दिया है। बुनियादी सुविधाओं के प्रबंधन और आर्थिक कल्याण से लेकर नागरिक स्वतंत्रता और सामाजिक सुरक्षा के उपायों तक — तेज़ी से जनता को राहत देने के बजाय भाजपा सरकार का फोकस नौकरशाही के आक्रामक पुनर्गठन, वित्तीय सख्ती और वैचारिक ध्रुवीकरण की ओर मुड़ गया है। आम नागरिकों के लिए, जिन "अच्छे दिनों" का वादा किया गया था, वे इसके बजाय बढ़ती कीमतों, व्यवस्थागत बहिष्कार और बढ़ती प्रशासनिक बेचैनी की एक जटिल भूलभुलैया बनकर सामने आए हैं। इस बीच, राज्य विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल, तृणमूल कांग्रेस, पूरी तरह से बिखर रही है ; मीडिया रोज़ाना उनके भयानक आपराधिक अतीत की घटनाओं को उजागर कर रहा है। इसके साथ ही, भाजपा का अपने पहले के वादों से पीछे हटना लोगों को वामपंथी और लोकतांत्रिक ताकतों को एक वास्तविक विकल्प के रूप में देखने के लिए प्रेरित कर रहा है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। अनुवादक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 

Tejraftarnews.in 

Jitendra Kumar 

स्वदेशी जागरण मंच, देवघर का जिला विचार वर्ग का भव्य आयोजन 6 जून 2026 (शनिवार) को,

देवघर। स्थानीय विलियम्स टाउन स्थित संघ कार्यालय परिसर में स्वदेशी जागरण मंच का जिला विचार वर्ग का आयोजन आगामी 6 जून 2026 दिन (शनिवार )को आयोजित होना निश्चित हुआ है।आयोजन के मुख्य वक्ता मंच के अखिल भारतीय मेला प्रमुख सचिन बरियार जी होंगे। साथ ही ,विशिष्ट अतिथि मंच के प्रांत संयोजक श्री राजेश उपाध्याय एवं मंच के प्रांत संपर्क प्रमुख अजय चौधरी और दीपक जी होंगे ।मंच के जिला संयोजक संजय कुमार सिंह ने कहा कि सभी राष्ट्र प्रेमी इस वैचारिक अनुष्ठान ,आयोजन में सादर आमंत्रित है।कूल तीन सत्रों में विचार वर्ग हेतु बैठके आयोजित की जाएगी। यह जानकारी मंच के जिला मीडिया प्रभारी श्री प्रभाष गुप्ता ने दी।

Tejraftarnews.in 

: सीधी बात नो बकवास: कुत्ते से दोस्ती कर लो मगर मुसलमान से दोस्ती मत करो .. जैन मुनि की सीधी बात

 आखिर क्यों कहा जैन मुनि ने की "कुत्ते से दोस्ती कर लो मगर मुस्लमान से दोस्ती मत करो वो नफरत ही फैलाएंगे " क्या जैन मुनि ने हवा में बस ऐसे ही ये बात कह दी ? नहीं मुनि जी ने २ ताजा उदहारण भी इस सम्बन्ध में प्रस्तुत किये हैं और फिर ही इतनी कठोर मगर सच बात कह रहे हैं .. हिन्दू अपने संतों की बातों को माने तो शायद उन्हें बुरे दिन न देखने पड़ें 

हिन्दुओं की दुर्दशा के मुख्य कारन मुस्लमान नहीं अपितु खुद हिन्दुओं की मूर्खता , उनका दिखावटी सेकुलरिज्म , उनका बेवकूफी भरा भाईचारा है जो उन्हें निगल रहा है .हिन्दू अपने बच्चों को जेहादी मानशिकता से दूर नहीं रख पा रहे , वो जेहादियों की सच्चाई न समझ रहे और न ही अपने बच्चों को समझा पा रहे और यही कारन है के लगातार हिन्दू अलग अलग प्रकार के जिहाद से इन जेहादियों के शिकार बन रहे है .... अब तो बकरी ईद पर हिन्दुओं की क़ुरबानी की भी खबरें आ चुकी है...

Tejraftarnews.in: बंगाल सरकार की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर तीखा तंज कसा है। अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि ‘चाहे अभिषेक बनर्जी हों, ममता बनर्जी हों या पार्थ चटर्जी, अगर आप सरकार में रहते हुए कुछ भी गलत करने की कोशिश करेंगे तो आपको सजा मिलेगी। लेकिन अभिषेक बनर्जी गाड़ी के बोनट पर चढ़ गए और उन्हें लगा कि वे 'पुष्पा' बन गए हैं। अभिषेक ने अपनी जेब में हाथ डाला और कहा कि हम 4 मई के बाद डीजे बजाएंगे। अब बंगाल के लोग डीजे बजा देंगे, उन्हें पता नहीं था। अगर अभिषेक बनर्जी की ओर से चोरी की गई है तो कार्रवाई की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में कुछ भी गलत करने की कोशिश करेंगे तो आपको सजा जरूर मिलेगी।‘

Tejraftarnews.in: #मोदी और #शाह के पास मात्र 120 घंटे बचे हैं 

आजकल देश में मौसम चाहे जो हो, लेकिन डिजिटल दुनिया का तापमान हमेशा 45 डिग्री के पार रहता है। वजह? हमारे प्यारे और आदरणीय 'यूट्यूब पत्रकार'। ये वो दिव्य प्राणी हैं जो सुबह चाय की चुस्की लेते हुए देश की सरकार गिरा देते हैं, दोपहर के भोजन तक नया प्रधानमंत्री चुन लेते हैं और रात को सोते-सोते वैश्विक मंदी का हल निकाल लेते हैं।

हाल ही में ऐसी ही एक 'ब्रह्मांडीय खोज' वरिष्ठ पत्रकार नीलू व्यास के सौजन्य से 'द पब्लिक इंडिया' नामक चैनल पर हुई। उन्होंने एक ऐसा वीडियो लाइव किया, जिसकी हेडलाइन पढ़कर नासा (NASA) के वैज्ञानिक भी अपनी दूरबीन छोड़कर सिर खुजलाने लगे। शीर्षक था— "मोदी के पास बचे हैं सिर्फ 120 घंटे? मोदी-शाह की देश से निकलने की प्लानिंग!"

वाह! क्या बात है! मतलब टाइमर सेट हो चुका है। टिक-टिक-टिक... टिकटें बुक हो चुकी हैं, सूटकेस पैक हैं और बस अब 23वें घंटे में सीधे फ्लाइट!

अब ज़रा इस दावे की गहराई में उतरते हैं। इस '120 घंटे' वाली थ्योरी को सुनकर उन लोगों को सबसे ज़ोर का दौरा पड़ा है जिन्होंने भारतीय राजनीति को थोड़ा-बहुत भी पढ़ा या देखा है।

तथ्य यह है कि जिस नरेंद्र मोदी पर सालों तक गोधरा कांड के आरोपों की बौछार हुई, जब केंद्र में पूर्ण बहुमत वाली विरोधी सरकार थी, ए एजेंसियां पीछे लगी थीं, चौतरफा घेराबंदी थी... तब जो इंसान न हिला, न डरा, न झुका। उल्टा, गुजरात की सत्ता से सीधे देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर आ बैठा।

और दूसरी तरफ अमित शाह, जिन्हें कभी 'तड़ीपार' घोषित कर दिया गया था, उन्होंने ऐसी जिद पकड़ी, ऐसा पासा पलटा कि आज वो उसी देश के गृहमंत्री बनकर बैठे हैं।

जिस जोड़ी ने नक्सलियों को बैकफुट पर धकेल दिया, पाकिस्तान के घर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक करवा दी, बड़े-बड़े 'ऑपरेशनों' में विरोधियों को धूल चटा दी और कश्मीर से धारा 370 को ऐसे गायब कर दिया जैसे गधे के सिर से सींग... आज डिजिटल दुनिया के कुछ शूरवीर कह रहे हैं कि वो जोड़ी "120 घंटे में देश छोड़कर भाग जाएगी!"

इसे कहते हैं— "मुद्दे लाख बुरा चाहे तो क्या होता है, यूट्यूब पर तो वही होता है जो थंबनेल चाहता है!"

इस सनसनीखेज दावे के बाद सोशल मीडिया के राष्ट्रभक्तों और समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। एक भड़के हुए यूजर ने तो सीधे कह दिया: "बच्चों! अभी-अभी अंडे से बाहर निकले हो तुम। इन गंदगियों और कीड़ों ने मोदी-शाह को बहुत हल्के में ले लिया है।"

व्यंग्य की भाषा में कहें तो यह बात बिल्कुल सटीक बैठती है। आजकल के कुछ डिजिटल विश्लेषक राजनीति को 'लूडो का खेल' समझ बैठे हैं। उन्हें लगता है कि मोदी-शाह की छह नंबर की गोटी कटी नहीं कि दोनों सीधे बोर्ड छोड़कर भाग जाएंगे!

जिस जोड़ी ने राजनीति के बड़े-बड़े मगरमच्छों से लोहा लिया, उन्हें कुछ लोग 'नाली का कॉकरोच' बनकर डराने की कोशिश कर रहे हैं। भाई साहब, कॉकरोच से डैमेज केवल किचन में होता है, देश की सत्ता में नहीं! मोदी-शाह को हल्के में लेना ऐसा ही है जैसे 'ग्रेट खली' को देखकर यह कहना कि "बेटा, संभल के रहना, वरना मैं फूंक मार दूंगा।"

आइए अब उस कड़वे सच पर आते हैं जिसके कारण यह पूरा तमाशा रचा गया। इसे आधुनिक डिजिटल भाषा में कहते हैं— 'क्लिकबेट'।

यूट्यूब का एक सीधा नियम है: जब तक थंबनेल पर 'जलजला', 'महाविनाश', 'भाग गए', 'रो पड़े' जैसे शब्द न लिखे हों, तब तक जनता क्लिक नहीं करती। अगर नीलू व्यास लिखतीं कि "देश के राजनीतिक समीकरणों पर एक सामान्य चर्चा"—तो वीडियो पर ५०० व्यूज भी न आते।

लेकिन जैसे ही लिखा गया— "सिर्फ 120 घंटे बचे हैं!"... जनता ने तुरंत क्लिक किया कि 'चलो देखें, कहीं मोदी जी सूटकेस में डोकला और खाखरा तो पैक नहीं कर रहे?'

वीडियो के अंदर भले ही वही पुरानी घिसी-पिटी राजनीतिक बातें हों, वही बेरोजगारी और विपक्ष की मजबूती का रोना हो, लेकिन बाहर का रैपर ऐसा चमकीला बनाया गया कि देखने वाला भी चकरा जाए।

कृपया अफवाहों से बचें और पॉपकॉर्न खाएं

तो भाइयों और बहनों, इस पूरे '120 घंटे' के महा-महा-आंदोलन का सार यही है कि देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री कहीं नहीं जा रहे हैं। वो यहीं हैं, और अगले कई सालों तक विरोधियों के बीपी (ब्लड प्रेशर) की दवाइयां बिकवाने का इंतजाम कर रहे हैं।

जो लोग अंडों से अभी-अभी बाहर निकलकर देश की राजनीति बदलने का दावा कर रहे हैं, उन्हें हमारी सलाह है: थोड़ा व्यावहारिक बनिए। थंबनेल चमकाने से सरकारें नहीं बदला करतीं। और रही बात जनता की, तो आप आराम से पॉपकॉर्न खाइए, यूट्यूब के इन 'ज्योतिषियों' के मजे लीजिए, क्योंकि इनके पास '120 घंटे' का ड्रामा खत्म होने के बाद 'अगले 72 घंटे' का नया थंबनेल तैयार मिलेगा!

Tejraftarnews.in: *खाना खाना बंद करके, भोजन लेना प्रारंभ करें*  

*इस्लामिक शब्द "खान" से खाना बना है!*

 

*दोहा:* 'खाना' खाते खल सभी, संत करें 'आहार'!  

सज्जन 'भोजन' को करे, भाषा क्रिया प्रकार! 

*अर्थात:* खाना *दुष्ट* लोग खाते हैं, भोजन *सज्जन* लोग करते हैं और आहार *संत* लोग करते हैं।

1.*खाना - खाया जाता है...* 

2.*भोजन - किया जाता है...*

3.*आहार - लिया जाता है..*

खाना - काँटे चम्मच से खाया जाता है ..

भोजन - एक दाहिने हाथ से किया जाता है ..

आहार - दोनों हाथ से लिया जाता है.

दूसरों का पेट काटकर अपना पेट भरना - खाना

जीवन जीने के लिए पेट भरना - भोजन 

त्याग, तपस्या, संयम और साधना के लिए पेट भरना - आहार

*तो आज से हम सभी भोजन करेंगे और करवाएंगे*🚩

Tejraftarnews.in: *'पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं', ट्रंप ने की तारीफ, बोले- भारत-अमेरिका के बीच जल्द होगा व्यापार समझौता*

*'पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं', ट्रंप ने की तारीफ, बोले- भारत-अमेरिका के बीच जल्द होगा व्यापार समझौता*

* अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें अपना "अच्छा दोस्त" बताया।

* ट्रंप ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और दोनों देशों के बीच जल्द ही एक बड़ा समझौता हो सकता है।

*उन्होंने कहा कि पीएम मोदी एक मजबूत नेता हैं और उनके साथ उनके व्यक्तिगत संबंध काफी अच्छे हैं।*

* ट्रंप के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक, रणनीतिक और व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।

* उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देशों के अधिकारी कई व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं और जल्द ही किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं।

* ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को और गहरा करना चाहता है, क्योंकि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा हितों के आधार पर मजबूत साझेदार हैं।

* भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से टैरिफ, बाजार पहुंच (Market Access), कृषि उत्पादों और औद्योगिक वस्तुओं को लेकर चर्चा चल रही है।

* प्रस्तावित व्यापार समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने, निवेश को प्रोत्साहन मिलने और आर्थिक सहयोग मजबूत होने की उम्मीद है।

* ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत-अमेरिका संबंध रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग के कारण नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं।

*विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यापार समझौता होता है तो इससे दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।*

Tejraftarnews.in: *'भारत से चाहते हैं अच्छे संबंध', साइप्रस को ब्रह्मोस मिसाइलें मिलने के डर ने बदले तुर्की के सुर, पाकिस्‍तान पर भी दी सफाई*

* ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया था, जिससे भारत-तुर्की संबंधों में तनाव बढ़ गया।

* भारत में तुर्की के खिलाफ नाराजगी बढ़ी और कई स्तरों पर बहिष्कार की मांग उठी।

*अब तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा है कि उनका देश भारत के साथ अच्छे और सकारात्मक संबंध चाहता है।*

* तुर्की ने भारत को एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति और बड़ा आर्थिक साझेदार बताया।

* भारत ने हाल के महीनों में ग्रीस और साइप्रस के साथ अपने रणनीतिक और रक्षा संबंध मजबूत किए हैं।

*साइप्रस ने भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने में रुचि दिखाई है।*

* ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे खतरनाक और तेज क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है।

* साइप्रस को ब्रह्मोस मिलने की संभावना ने तुर्की की रणनीतिक चिंताएं बढ़ा दी हैं।

* तुर्की के मीडिया और रक्षा विशेषज्ञों ने इस संभावित सौदे को लेकर चिंता व्यक्त की है।

* ग्रीस और साइप्रस, दोनों ही तुर्की के क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं।

* भारत-ग्रीस-साइप्रस की बढ़ती नजदीकियों को तुर्की-पाकिस्तान गठजोड़ के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

* तुर्की ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों पर सफाई देते हुए कहा कि वह भारत के खिलाफ नहीं है।

* तुर्की ने कहा कि वह भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है।

* भारत की बढ़ती आर्थिक और सैन्य ताकत ने तुर्की को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है।

* भारत की रक्षा निर्यात क्षमता, खासकर ब्रह्मोस मिसाइल, अब यूरोप और भूमध्यसागर क्षेत्र में भी प्रभाव डाल रही है।

*साइप्रस को ब्रह्मोस मिलने की संभावना और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका ने तुर्की को भारत के प्रति नरम रुख अपनाने पर मजबूर किया है।*

Tejraftarnews.in: *बंगाल ही नहीं, गुजरात में भी बांग्लादेशियों की बड़ी घुसपैठ*

*अवैध बांग्‍लादेशियों की शामत, अब तक 500 हिरासत में लिए गए, ऑपरेशन डेल्‍टा हंट में ताबड़तोड़ एक्‍शन*

* अवैध रूप से भारत में घुसे बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ देशभर में कार्रवाई जारी है।

* गुजरात में इस अभियान के लिए ऑपरेशन डेल्टा हंट शुरू किया गया है।

* ऑपरेशन के तहत अब तक 500 से अधिक अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया है।

* राज्य के विभिन्न जिलों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त अभियान चला रही हैं।

* संदिग्ध लोगों के दस्तावेजों और पहचान की जांच की जा रही है।

* बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की भी पड़ताल हो रही है, जिन पर अवैध प्रवासियों को आश्रय या रोजगार देने का आरोप है।

* अधिकारियों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई करना है।

* ऑपरेशन डेल्टा हंट के तहत आगे भी कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।

*बांग्लादेशी नंबरों से संचार के लिए इस्तेमाल किए गए भारतीय मोबाइल नंबरों का एक डेटाबेस तैयार किया गया है। इस प्रक्रिया के माध्यम से 6200 से अधिक संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों से संबंधित जानकारी इकट्ठा की गई और इसका उपयोग अवैध नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के लिए किया गया।*

Tejraftarnews.in: *'पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं', ट्रंप ने की तारीफ, बोले- भारत-अमेरिका के बीच जल्द होगा व्यापार समझौता*

*'पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं', ट्रंप ने की तारीफ, बोले- भारत-अमेरिका के बीच जल्द होगा व्यापार समझौता*

* अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें अपना "अच्छा दोस्त" बताया।

* ट्रंप ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और दोनों देशों के बीच जल्द ही एक बड़ा समझौता हो सकता है।

*उन्होंने कहा कि पीएम मोदी एक मजबूत नेता हैं और उनके साथ उनके व्यक्तिगत संबंध काफी अच्छे हैं।*

* ट्रंप के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक, रणनीतिक और व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।

* उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देशों के अधिकारी कई व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं और जल्द ही किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं।

* ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को और गहरा करना चाहता है, क्योंकि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा हितों के आधार पर मजबूत साझेदार हैं।

* भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से टैरिफ, बाजार पहुंच (Market Access), कृषि उत्पादों और औद्योगिक वस्तुओं को लेकर चर्चा चल रही है।

* प्रस्तावित व्यापार समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने, निवेश को प्रोत्साहन मिलने और आर्थिक सहयोग मजबूत होने की उम्मीद है।

* ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत-अमेरिका संबंध रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग के कारण नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं।

*विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यापार समझौता होता है तो इससे दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।*

Tejraftarnews.in: *'भारत से चाहते हैं अच्छे संबंध', साइप्रस को ब्रह्मोस मिसाइलें मिलने के डर ने बदले तुर्की के सुर, पाकिस्‍तान पर भी दी सफाई*

* ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया था, जिससे भारत-तुर्की संबंधों में तनाव बढ़ गया।

* भारत में तुर्की के खिलाफ नाराजगी बढ़ी और कई स्तरों पर बहिष्कार की मांग उठी।

*अब तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा है कि उनका देश भारत के साथ अच्छे और सकारात्मक संबंध चाहता है।*

* तुर्की ने भारत को एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति और बड़ा आर्थिक साझेदार बताया।

* भारत ने हाल के महीनों में ग्रीस और साइप्रस के साथ अपने रणनीतिक और रक्षा संबंध मजबूत किए हैं।

*साइप्रस ने भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने में रुचि दिखाई है।*

* ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे खतरनाक और तेज क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है।

* साइप्रस को ब्रह्मोस मिलने की संभावना ने तुर्की की रणनीतिक चिंताएं बढ़ा दी हैं।

* तुर्की के मीडिया और रक्षा विशेषज्ञों ने इस संभावित सौदे को लेकर चिंता व्यक्त की है।

* ग्रीस और साइप्रस, दोनों ही तुर्की के क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं।

* भारत-ग्रीस-साइप्रस की बढ़ती नजदीकियों को तुर्की-पाकिस्तान गठजोड़ के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

* तुर्की ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों पर सफाई देते हुए कहा कि वह भारत के खिलाफ नहीं है।

* तुर्की ने कहा कि वह भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है।

* भारत की बढ़ती आर्थिक और सैन्य ताकत ने तुर्की को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है।

* भारत की रक्षा निर्यात क्षमता, खासकर ब्रह्मोस मिसाइल, अब यूरोप और भूमध्यसागर क्षेत्र में भी प्रभाव डाल रही है।

*साइप्रस को ब्रह्मोस मिलने की संभावना और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका ने तुर्की को भारत के प्रति नरम रुख अपनाने पर मजबूर किया है।*

Tejraftarnews.in: *'He is a good friend of mine': Trump praises PM Modi, says US and India will get to a trade deal*

Trump says India-US trade deal likely soon, ‘we are making a lot of money with India’

*Trump Praises PM Modi, Signals India-US Trade Deal*

* US President Donald Trump praised Indian Prime Minister Narendra Modi, calling him “a good friend of mine.”

* Trump expressed confidence that the United States and India will reach a trade agreement in the near future.

* He said discussions between the two countries are progressing and that both sides are working toward a mutually beneficial deal.

*Trump highlighted the strong personal relationship between himself and PM Modi as a positive factor in bilateral ties.*

* The remarks come amid ongoing negotiations aimed at expanding trade and economic cooperation between India and the US.

* India and the US are seeking to resolve tariff and market-access issues while strengthening strategic and commercial partnerships.

*Trump's comments signal optimism about the future of India-US economic relations and broader cooperation between the two democracies.*

Tejraftarnews.in: *Cyprus’s desire to buy BrahMos, Kamikaze drones from Bharat alarms Turkey*

*Turkish officials have recently indicated interest in maintaining dialogue and improving relations with India, especially after tensions linked to Turkey-Pakistan cooperation and regional geopolitical disputes.*

* Cyprus has reportedly expressed interest in acquiring India's BrahMos missile system, along with Indian drones and other defence equipment. 

* Turkish media and security analysts have openly discussed concerns that Indian weapons in Cyprus or Greece could alter the military balance in the Eastern Mediterranean. 

* India and Greece signed a defence cooperation declaration earlier this year, laying the foundation for deeper military-industrial cooperation. 

*Why is Turkey concerned?*

* Turkey has long-standing disputes with Greece over the Aegean Sea and with Cyprus over the island's division and maritime boundaries. Turkey views any major military strengthening of Greece or Cyprus with caution. 

*Reports that Cyprus may acquire BrahMos missiles have triggered debate in Turkish strategic circles because the missile is regarded as one of the world's most capable supersonic cruise missiles.*

* India's closer engagement with Greece and Cyprus is also being viewed by some analysts as a response to Turkey's close relations with Pakistan and Ankara's frequent comments on Kashmir. 

*Has Turkey sought better ties with India?*

* Turkish officials have recently indicated interest in maintaining dialogue and improving relations with India, especially after tensions linked to Turkey-Pakistan cooperation and regional geopolitical disputes. 

*Turkey backed Pakistan on several international issues, including Kashmir.*

* India responded by expanding strategic partnerships with Greece and Cyprus.

* Greece and Cyprus increased defence cooperation with India.

* Cyprus reportedly showed interest in purchasing BrahMos missiles, kamikaze drones, and other Indian defence systems.

* Turkish media described the potential deal as a strategic challenge.

* Analysts in Turkey warned that Indian missiles in the Eastern Mediterranean could affect regional military calculations.

* India-Greece defence cooperation has also deepened through a new bilateral defence roadmap.

* As regional dynamics shift, Turkey has shown interest in keeping diplomatic channels with India open.

*Cyprus has shown a keen desire to procure BrahMoS cruise missiles and unmanned aerial vehicles from India. Cypriot President Nikos Christodoulides’ recent visit to New Delhi has set the stage for this potential acquisition.*

Tejraftarnews.in: *Operation Delta Hunt:*

*Detect, Delete, Deport: Gujarat Police Detain 501 Illegal Bangladeshi Migrants In 48-Hour Crackdown*

* Gujarat Police launched a statewide crackdown under Operation Delta Hunt against illegal immigration.

*A total of 501 Bangladeshi nationals were detained during the operation.*

* Authorities are conducting verification of more than 6,200 individuals suspected of lacking proper documentation.

* Police are also investigating people who allegedly provided shelter, employment, or assistance to undocumented migrants.

* The operation is being carried out across multiple districts of Gujarat.

* Officials said the drive aims to identify, detain, and take legal action against illegal immigrants and their local facilitators.

* Verification and investigation efforts are ongoing, with further action expected based on the findings.

*Operation Delta Hunt is part of the state's broader effort to strengthen border security and curb illegal immigration.*

Tejraftarnews.in: देख लो इस धूर्त मारीच कालनेमी सुअर के पिल्ले केजरीवाल को इसी ने ब्लूमबर्ग की झूठी खबर को हिंदुस्तान में फैलाया और लोगो को गुमराह किया 

और अब यही ब्लूमबर्ग ने गोल्ड बेचने की झूठी ख़बर पर माफी मांग कर पोस्ट को डिलीट कर दिया 

और अभी भी इस दल्ले केजरीवाल के फॉलोअर्स, कांग्रेस के गुलाम चमचों की फौज, वामपंथी सूअरों की भीड़ , यादमुल्ले अखिलेश यादव के सपोर्टर पिल्ले, तेजस्वी यादव के सपोर्ट, सभी देश के गद्दार मुल्ले जम कर अभी भी इस झूठी खबर को जम कर शेयर कर रहे है.... मोदी सरकार ने सोना बेच दिया 

क्या यह केजरीवाल, अखिलेश यादव, राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और सभी विपक्षी दल माफी मांग कर इस झूठी खबर का खंडन करेंगे 

नहीं यह लोग देश को ओर देश की जनता को गुमराह करते रहेंगे

Tejraftarnews.in: हमारा देश लगभग 1000 वर्षों तक गुलाम रहा — कभी मुगलों के अधीन, कभी अंग्रेजों के अधीन। इसका सबसे बड़ा कारण बहुत सीधा और स्पष्ट था। हम समस्या की जड़ पर कभी प्रहार नहीं करते थे। हम हमेशा ऊपर-ऊपर से पत्ते-पत्तियां काटते रहते थे। जड़ जस की तस रहती थी, और पेड़ फिर से हरा हो जाता था।

आज NEET परीक्षा का पेपर लीक होता है। पूरा देश हंगामा मचाता है। हम शिक्षा मंत्री से इस्तीफा मांगने लगते हैं, सरकार कोसते हैं, सड़कों पर उतर जाते हैं। लेकिन इस पूरी कहानी के मुख्य किरदारों को हम भूल जाते हैं। 

*सबसे बड़ा अपराधी कौन है?*  

मेरे हिसाब से सबसे पहले दोषी वो छात्र और उनके माता-पिता हैं जो पेपर खरीद रहे हैं। करोड़ों रुपए देकर सीट खरीद रहे हैं। सोचिए, अगर कोई पेपर खरीदने वाला ही न हो, तो पेपर लीक करने वाला पेपर लीक क्यों करेगा? डिमांड ही नहीं होगी तो सप्लाई कहां से आएगी? ये वही लोग हैं जो मेरिट की हत्या कर रहे हैं। एक मेहनती छात्र की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं।

*दूसरे नंबर के दोषी कौन?*  

वो गिरोह जो छात्रों से करोड़ों रुपए लेकर उन्हें पेपर उपलब्ध कराने का वादा करते हैं। ये माफिया हैं। शिक्षा को व्यापार बना चुके हैं। ये लोग बच्चों का भविष्य भी बेच देते हैं और देश की प्रतिभा भी।

*तीसरे नंबर के दोषी कौन?*  

वो कर्मचारी और अधिकारी जो प्रिंटिंग प्रेस से लेकर पेपर के ट्रांसपोर्टेशन तक में शामिल हैं। जो तिजोरी की चाबी रखते हुए भी तिजोरी लुटवा देते हैं। ये अंदर के गद्दार हैं।

अब सच ये है कि शिक्षा मंत्री या कोई भी मंत्री 24 घंटे हर परीक्षा केंद्र, हर प्रिंटिंग प्रेस के साथ खड़ा नहीं हो सकता। सिस्टम को मजबूत करना सरकार का काम है, लेकिन सिस्टम को तोड़ने वाले हम खुद हैं।

इसलिए मेरा मानना है कि अगर आंदोलन करना है तो दिशा सही रखिए। शिक्षा मंत्री के पुतले जलाने से पहले उन छात्रों के खिलाफ आवाज उठाइए जो पेपर खरीद रहे हैं। उन माता-पिता के खिलाफ बोलिए जो शॉर्टकट के चक्कर में अपने बच्चे का चरित्र गिरवी रख रहे हैं। उन दलालों और उन भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ उतरिए जो इस पूरे खेल के सूत्रधार हैं।

*जहरीले पौधे को खत्म करना है तो उसकी जड़ पर कुल्हाड़ी चलानी होगी, न कि तितली की तरह इधर-उधर उछल-कूद करनी होगी।* 

समस्या की जड़ पर वार करेंगे, तभी देश बचेगा।

Tejraftarnews.in: चमचा मीडिया हर खबर झूठी और अफवाह फैलाता हैँ.... लेकिन ये पूरी कांग्रेसी IT सेल ईमानदार पत्रकार हैँ....

आज एक झूठी खबर फैला दी की सोना बेच दिया RBI नें.....RBI ने आधिकारिक बयान जारी करके कहा कि यह दावा गलत है और उसका भौतिक स्वर्ण भंडार 880.52 टन पर अपरिवर्तित है।

भारत सरकार की Press Information Bureau (PIB) ने भी इस खबर को फर्जी (fake) बताया है।...

ये पूरा गिरोह ही हरदम झूठी और फर्जी खबरें फैलाता है.. लेकिन गोदी मीडिया तो दूसरे लोग हैँ... इन कांग्रेसी दलालों के अनुसार ...

Tejraftarnews.in: ब्लूमबर्ग ने अपनी फर्जी स्टोरी पर माफी मांग लिया है उसने जो छपा था कि रिजर्व बैंक ने सोना बेचा है वह पूरी तरह से एक फर्जी स्टोरी थी

ब्लूमबर्ग ने स्वीकार किया कि उसके 2 जून के लेख में गलत दावा किया गया था कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने 22 मई, 2026 को समाप्त होने वाले दो सप्ताहों में 12 अरब डॉलर का स्वर्ण भंडार बेचा था।

 यह त्रुटि सोने के वैश्विक मूल्य में गिरावट और आरबीआई के मानक मूल्यांकन समायोजन के बीच अंतरराष्ट्रीय मानकों के बजाय घरेलू स्वर्ण मूल्यों का उपयोग करने के कारण हुई थी। 

आरबीआई ने पुष्टि की कि उसका भौतिक भंडार 880.52 टन पर स्थिर है, और विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा वास्तव में बढ़कर 16.85% हो गया है।

आजकल कांग्रेसी कुत्तों वामपंथी पिल्लों और पूरे विपक्ष का ऐसा खराब वक्त चलता है कि जैसे ही कोई चमचा कुत्ता मोदी को देखकर भौकता है यह सब तुरंत हीट में आ जाते हैं और अपना घाघरा और लहंगा उठा कर नाचने लगते हैं

 लेकिन तब तक वह कुत्ता इनको सूँघकर चला जाता है फिर यह कहते हैं हे राम हमको फिर सूँघकर छोड़ दिया

Tejraftarnews.in: 2014 में RBI गोल्ड रिज़र्व: 557 टन!

2026 में यह बढ़कर हुआ: 880 टन!  

सीधे 59% की शानदार वृद्धि।  

मोदी सरकार ने खजाने में 323 टन सोना और जोड़ा!

याद है 'पढ़े-लिखे' मनमोहन सिंह का वो दौर?

जब वित्त मंत्री रहते उन्हें देश का सोना ही गिरवी रखना पड़ा था!

यही है नए भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था! 🇮🇳🔥

Tejraftarnews.in: एक आदमी ने एक विज्ञापन दिया कि उसे उसकी चिन्ता करने वाला एक आदमी चाहिये। वेतन वो जो मांगेगा, मिलेगा।

विज्ञापन देखकर एक बेरोजगार तुरंत उसके पास गया और उसने उसके लिये चिन्ता करने वाली नौकरी के लिये 10000/ महीना सैलरी की मांग की। विज्ञापन देने वाले ने उसे 10000/ देना स्वीकार कर लिया और कहा कि तुम अभी से अपनी नौकरी शुरु कर सकते हो।

नौकरी शुरु हो गई। अब मालिक ने उसे अपनी सारी चिंताएं बता दी। 

मेरी महिने की आमदनी 50000है।

बच्चों की फिस 10000 महीना है।

मकान का भाडा 15000 महीना है।

घर का खाने पीने पर खर्च 15000 है।

मेरे रोज ऑफ़िस जाने का खर्च महिने भर का 5000 है।

धोबी का खर्च महिने का 3000 है।

काम वाली बाई को 2000 महीना देना होता है।

महिने मे एक बार हमलोग कहीं घुमने जाते हैं उसमे कम से कम 5000/ लग जाता है।

 अब चिन्ता करने वाला आदमी से बर्दाश्त नही हुआ, उसने कहा: मालिक आपका अभी तक का खर्च 55000 है और अभी आपने मेरा 10000सैलरी उसमे नही बताया है तो सब लेकर 65000हो गए, आमदनी आपकी 50000है, बाकी पैसा कहाँ से लाएंगे?

मालिक ने कहा उसी के लिये तो तुम्हे रखा है, अब तुम 10000ले रहे हो मेरी सारी चिन्ता करने के लिये तो मै क्यों चिन्ता करुँ, अब ये चिन्ता तुम करो कि बाकी पैसा कहाँ से आएगा।

नेताओं द्वारा खैरात बांटने की भी चिन्ता देशवासियों को ही करनी होगी क्योंकि नेता अपनी जेब से किसीको एक धेली नही देंगा। 

सारा पैसा हम देशवासियों से ही लिया जाएगा। टैक्स बढ़ेगा, फिर महंगाई बढेगी और देश का गरीब और निम्न मध्यम वर्ग उस महंगाई और टैक्स की चक्की में पिसेगा। 

देखियेगा कहीं 10000 महीना पाने के लालच में उस पैसे की व्यवस्था की चिन्ता में आप भी न पड़ जायें।

🙏🏼 🙏🏼

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User