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[06/06, 11:20 pm] +91 87870 48603: भानु सप्तमी व्रत आज
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भानु सप्तमी हिंदू धर्म में सूर्य देव की उपासना का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह में दो सप्तमी तिथि आती हैं, जब रविवार के दिन सप्तमी तिथि का संयोग बनता है, तो उसे 'भानु सप्तमी' कहा जाता है। चूंकि रविवार सूर्य देव का दिन है और सप्तमी उनकी प्रिय तिथि, इसलिए यह दिन 'सूर्य ग्रहण' के समान ही प्रभावशाली और पुण्यदायी माना जाता है।
भानु सप्तमी का महत्व
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आरोग्य की प्राप्ति: शास्त्रों में कहा गया है— 'आरोग्यं भास्करादिच्छेत्' अर्थात् अच्छे स्वास्थ्य की कामना सूर्य देव से करनी चाहिए। भानु सप्तमी का व्रत करने से गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है।
पितृ दोष से मुक्ति: इस दिन तर्पण और दान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
मान-सम्मान: सूर्य सफलता और तेज का कारक है। इस दिन पूजा करने से समाज में यश और पद-प्रतिष्ठा बढ़ती है।
भानु सप्तमी पूजा विधि
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ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: इस दिन सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।
सूर्य अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय 'ॐ सूर्याय नमः' का जाप करें।
आदित्य हृदय स्तोत्र: अर्घ्य के बाद वहीं खड़े होकर 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ करें। यह शत्रुओं पर विजय और आत्मविश्वास के लिए अचूक है।
दीपदान और भोग: सूर्य देव के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक जलाएं और उन्हें गुड़ या लाल फल अर्पित करें।
उपवास: इस दिन बिना नमक का भोजन करने या केवल फलाहार करने का विशेष महत्व है।
व्रत के लाभ
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मानसिक शांति: यह व्रत मन की चंचलता को दूर कर एकाग्रता बढ़ाता है।
त्वचा रोगों से मुक्ति: धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से सूर्य पूजा करने पर चर्म रोगों में लाभ होता है।
सौभाग्य में वृद्धि: महिलाओं के लिए यह व्रत अखंड सौभाग्य और संतान सुख देने वाला माना गया है।
स्मरण शक्ति: विद्यार्थियों के लिए भानु सप्तमी का व्रत और सूर्य ध्यान बुद्धि को प्रखर बनाता है।
क्यों मनाई जाती है भानु सप्तमी? (पौराणिक कथा)
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन ही सूर्य देव पहली बार अपने रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड में प्रकट हुए थे। उन्होंने इसी दिन अपने सात घोड़ों के रथ से संसार को आलोकित (प्रकाशित) किया था। इसीलिए इसे सूर्य देव के जन्म उत्सव के रूप में भी देखा जाता है।
राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
मो. 9116089175
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[07/06, 1:47 am] +91 94250 54214: *मित्रो, यह कहने को “कॉकरोच” हैं..!*
*लेकिन आवारा कुत्तों से कम नहीं हैं..!*
*जो केवल भोंकना जानते हैं..!*
*1000 - 800 लोग..!*
*करोड़ों Gen Z को भड़काने चले थे..!*
*अभिजीत दिपके को पता नहीं था, कि सामने अमित शाह है..!*
*जिसने उसकी हवा निकाल दी..!*
*दिपके की “कॉकरोच जनता पार्टी” का लक्ष्य, संसद मार्ग थाने जाकर उत्पात करना था..!*
*लेकिन दिल्ली पुलिस ने उसे Permission letter पकड़ा दिया..!*
*जिसमें कहा गया कि, जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सकते हो..!*
*इसी से सारे मंसूबों पर पानी फिर गया..!*
*Gen Z को विद्रोह के लिए उकसाने चले थे..!*
*लेकिन मुश्किल से 1000 - 800 लोग ही जुड़ पाए, दिपके के साथ..!*
*और लोग भी ऐसे, जिन्हे पता नहीं, क्या बोलना है..!*
*सारी भीड़ में इन थोड़े से कॉकरोचों के अलावा, 200 पत्रकार थे..!*
*500 कैमरामैन..!*
*1000 यूटूबर..!*
*और 5000 पुलिस वाले..!*
*कॉकरोचों को ये भी नहीं पता था, कि अभिजीत का सहयोगी सौरभ दास कौन है, जिसे पहले ही पुलिस ने रगड़ा दे रखा था..!*
*एक लड़की चीख रही थी, 5वीं - 6ठी फेल मंत्री बने हुए है, जो अपने बच्चो को विदेश में पढ़ाते हैं..!*
*जब उसे पूछा कि, अभिजीत दिपके कौन है..!*
*तो कहती है...!*
*वो अमेरिका में रहते हैं, पढ़ते हैं..!*
*लेकिन इससे, उनके नागरिक होने के अधिकार ख़त्म नहीं होते..!*
*और तो और, यह भी कह दिया..!*
*सुभाषचंद्र बोस ने भी, विदेश में रह कर देश की सेवा की थी..!*
*यानी एक टुच्चे अभिजीत दिपके की तुलना, सुभाषचंद्र बोस से कर दी..!*
*और फिर मंत्री के बच्चे, अगर, सरकारी स्कूल में भेजना चाहते हो तो, दिपके अमेरिका में क्यों पढ़ रहा है..!*
*इससे भी बड़ी बात..!*
*NEET का मतलब भी नहीं बता सकी..!*
*एक अर्धनग्न सी लड़की कह रही थी..!*
*“हम अपनी डिमांड मांगने आए हैं कि, धर्मेंद्र प्रधान को हटाओ”*
*अब बताओ, डिमांड मांगी जाती है या की जाती है..!*
*उनका नेता दिपके, गर्मी के मारे, प्रदर्शन छोड़ कर भाग खड़ा हुआ..!*
*इसलिए मैंने कहा कि, कहने को तो ये कॉकरोच हैं..!*
*लेकिन भौंकने वाले, आवारा कुत्तों से कम नहीं हैं..!*
*जो भारत को, नेपाल और बांग्लादेश समझकर Gen Z को भड़काना चाहते हैं..!*
*इनके बाप केजरीवाल की पार्टी, अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है..!*
*ये तो अभी आए हैं..!*
*और पहला ही प्रदर्शन फेल हो गया..!*
*जबकि किसान आंदोलन तो, डेढ़ साल चला..!*
*लेकिन उसके नेता, पंजाब चुनाव में, अपनी जमानत भी नहीं बचा सके..!*
*विपक्ष, खुद कुछ कर नहीं सका..!*
*मोदी को हटाने के लिए तो, इन कॉकरोचों से उम्मीद लगाए बैठा है..!*
*जबकि, विपक्ष का इंडी गठबंधन, छिन्न-भिन्न हो रहा है..!*
*राहुल गांधी, आस लगाए बैठा है..!*
*एक साल में, मोदी सरकार, गिर जाएगी..!*
*वो ज्योतिषियों की बात पर भरोसा कर रहा है..!*
*और कल उसकी, मुंहफट सुप्रिया श्रीनेत से, जब पूछा गया कि, सरकार कैसे गिरेगी..!*
*तो कहती है, मोदी जी खुद ही, पद छोड़ देंगे..!*
*अब भारत का Gen Z क्यों खड़ा होगा..!*
*जब भारत की जीडीपी, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, सबसे तेज गति से बढ़कर, 2025 - 2026 में, 7.7% रही है..!*
*जिसमें सबसे बड़ा योगदान, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का रहा है..!*
*और ये योगदान, Gen Z और उद्योगों की वजह से होता है..!*
*लेकिन राहुल गांधी को..!*
*जनता का सारा पैसा, अडानी की जेब में जाता दिखाई देता है..!*
*इतना ही नहीं, जिस मोदी को हटाने की मुहिम, चला रहा राहुल गांधी, विपक्ष और अब ये कॉकरोच पार्टी, उसके लिए कल पुतिन ने कहा है कि..!*
*मोदी मजबूत नेता हैं..!*
*उन्हें कोई दबा नहीं सकता..!*
*और भारत, हमारा सबसे भरोसे वाला मित्र है..!*
*इतना ही नहीं, 5th Generation fighter jets, SU 57 भी, भारत को देने का वादा करते हुए, यह भी कहा कि..!*
*Jets का प्रोडक्शन, रूस भारत के साथ, भारत में ही करेगा..!*
*उधर डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा, कि मोदी मेरे सबसे अच्छे मित्र हैं..!*
*और अमेरिका - भारत की ट्रेड डील जल्दी ही साइन हो जाएगी..!*
*ऐसे में जब, भारत, आर्थिक रूप से सशक्त है..!*
*तो Gen Z क्या, पागल है, जो उन बेवकूफों के बहकावे में आकर भारत में विद्रोह करेगा..!*
*संजय अग्रवाल 'हाईवे'*
*राष्ट्रहित सर्वोपरि..!*
*भारत माता की जय*
*वंदे मातरम - जय हिंद*
🪷 🇮🇳 🙏 🇮🇳 🪷
[07/06, 1:47 am] +91 94250 54214: *मित्रो, कल मुझे मालूम पड़ा कि, INDI गठबंधन का कोई भी सदस्य, ममता बनर्जी का फोन नहीं उठा रहा..!*
*कुछ महीने पहले तक, यह सोचा भी नहीं जा सकता था..!*
*लेकिन यह तो, आने वाली घटनाओं की, सिर्फ एक झलक है..!*
*पश्चिम बंगाल का नतीजा..!*
*सिर्फ एक चुनावी नतीजा नहीं है..!*
*यह एक वैचारिक भूकंप है..!*
*जिसके झटके, अगले दशक तक, भारतीय राजनीति में महसूस किए जाएंगे..!*
*भाजपा का बंगाल जीतना, सिर्फ ममता को हराने, या टीएमसी के लंबे शासन को, खत्म करने के बारे में नहीं है..!*
*यह इससे, कहीं बड़ा है:-*
*भारतीय राजनीति के, केंद्रीय व्याकरण के रूप में, हिंदू चेतना का, पूर्ण रूप से, मुख्यधारा में आना..!*
*दशकों तक, भारत को बताया गया कि, हिंदू दावे खतरनाक हैं..!*
*सनातन गौरव, सांप्रदायिक है..!*
*मंदिर की राजनीति, प्रतिगामी है..!*
*और एकमात्र स्वीकार्य राजनीति..!*
*तथाकथित सेक्युलर राजनीति है..!*
*तुष्टिकरण, अल्पसंख्यक वीटो, चुनिंदा आक्रोश, और हिंदू अपराध-बोध की राजनीति..!*
*बंगाल ने, उस पूरे तंत्र को, ध्वस्त कर दिया है..!*
*एक राज्य, जिसे कभी, हिंदुत्व-विरोधी राजनीति का, बौद्धिक गढ़ कहा जाता था..!*
*उसने अब ऐसा फैसला दिया है..!*
*जो कहता है कि, भारतीय मतदाता, अब सभ्यतागत पहचान को लेकर, माफी नहीं मांगेगा..!*
*मतदाता, अब यह स्वीकार करने को, तैयार नहीं कि, सेक्युलरिज्म के नाम पर, हिंदू स्वाभिमान को दबाया जाना चाहिए..!*
*और लगभग तुरंत, तमिलनाडु में जो हो रहा है उसे देखिए..!*
*DMK, जो सनातन-विरोधी बयानबाज़ी का सबसे मुखर राजनीतिक मंच था, ढह गई है..!*
*DMK के नेता, अब खुलकर कह रहे हैं कि, INDI गठबंधन लगभग खत्म हो गया है..!*
*यह सिर्फ गठबंधन का टूटना नहीं है..!*
*यह पूरे भाजपा-विरोधी मोर्चे के, वैचारिक विघटन की शुरुआत है..!*
*INDI गठबंधन, कभी विचारों का गठबंधन नहीं था..!*
*यह डर का गठबंधन था..!*
*मोदी का डर...!*
*भाजपा का डर...!*
*आरएसएस का डर...!*
*उस हिंदू मतदाता का डर..!*
*जिसने चुप रहना, बंद कर दिया था..!*
*उस भारत का डर, जो अब वंशवादियों, द्रविड़ अभिजात्यों, वाम बुद्धिजीवियों और ड्राइंग-रूम सेक्युलरों से उपदेश सुनने को तैयार नहीं था..!*
*उस डर ने, उन्हें कुछ समय के लिए जोड़े रखा..!*
*लेकिन डर कभी, राष्ट्रीय दृष्टि, नहीं बन सकता..!*
*ममता का, भाजपा से, नफरत के अलावा, कुछ साझा नहीं था..!*
*DMK का, कांग्रेस से, सुविधा के अलावा, कुछ साझा नहीं था..!*
*कांग्रेस का, क्षेत्रीय दलों से, प्रासंगिक दिखने की बेताब जरूरत के अलावा, कुछ साझा नहीं था..!*
*पूरा ढांचा, किसी को रोकने की, नकारात्मक ऊर्जा पर बना था..!*
*कुछ बनाने की, सकारात्मक ऊर्जा पर नहीं..!*
*अब वह ढांचा चटक रहा है..!*
*और इसके साथ ही, भारत की तथाकथित, सेक्युलर राजनीति की पुरानी परत भी, ढह जाएगी..!*
*क्योंकि, साफ शब्दों में कहें:-*
*भारत में अब कोई ऐसी, जैविक जन-राजनीति नहीं बची..!*
*जो सनातन धर्म को, गाली देकर..!*
*हिंदू रीति-रिवाजों का, मज़ाक उड़ाकर..!*
*मंदिरों का अपमान करके, जीत सके..!*
*और फिर चुनाव से पहले, जनेऊ पहन ले..!*
*वह युग, समाप्त हो रहा है..!*
*भारतीय राजनीति के, अगले 100 साल, इस बात पर होंगे..!*
*कि कौन ज्यादा जड़ों से जुड़ा..!*
*ज्यादा सभ्यतागत...!*
*ज्यादा सांस्कृतिक रूप से..!*
*आत्मविश्वासी, और ज्यादा खुलकर, हिंदू-चेतन दिख सकता है..!*
*हर पार्टी, अब हिंदू-फर्स्ट पार्टी का, कोई न कोई संस्करण बनने की कोशिश करेगी..!*
*कोई इसे भद्दे तरीके से करेगा..!*
*कोई कॉस्मेटिक तरीके से..!*
*कोई मंदिर जाएगा..!*
*कोई शास्त्र उद्धृत करेगा..!*
*कोई त्योहार खोज निकालेगा..!*
*कोई अचानक याद करेगा..!*
*कि उसकी दादी, बहुत आध्यात्मिक थीं..!*
*कोई दिखावा करेगा, कि उसने कभी सनातन का, अपमान किया ही नहीं..!*
*लेकिन उन सबके लिए, एक समस्या है..!*
*वह वैचारिक जगह, पहले से ही भरी हुई है..!*
*RSS और भाजपा, हिंदू राजनीति में, चुनावी मौसम की, पोशाक पहनकर नहीं आए..!*
*वे इसी आधार पर बने थे..!*
*और उन्होंने, यह जगह, दशकों में, कैडर, अनुशासन, त्याग, वैचारिक स्पष्टता, मंदिर आंदोलनों, सांस्कृतिक कार्य, सामाजिक पहुंच, और उस समय, स्टैंड लेने के साहस से बनाई..!*
*जब उन स्टैंड का, सत्ता-प्रतिष्ठान मज़ाक उड़ाता था..!*
*आप 50 साल, हिंदू राजनीति को, गाली देकर, एक चुनावी चक्र में, उसके मालिक नहीं बन सकते..!*
*इसीलिए, किसी भी राजनीतिक दल को, भाजपा के खिलाफ, उस जगह में, विश्वसनीय रूप से वोट मांगने में, सौ साल लग सकते हैं..!*
*क्योंकि सभ्यतागत राजनीति में, विश्वसनीयता रातोंरात नहीं बनती..!*
*शिवसेना को देखिए...!*
*बालासाहेब ठाकरे ने, महाराष्ट्र में, एक स्वाभाविक हिंदू, राजनीतिक प्रवृत्ति बनाई थी..!*
*वह कच्ची, सीधी, भावनात्मक, और स्पष्ट रूप से, जड़ों से जुड़ी थी..!*
*उद्धव ठाकरे ने, उस विरासत को, भाजपा-विरोधी सम्मान के लिए, बेच दिया..!*
*और अपने पिता द्वारा, बनाई गई जगह को ही, खत्म कर दिया..!*
*यही चेतावनी, अब हर पार्टी के लिए है..!*
*आप अपनी वैचारिक रीढ़, आउटसोर्स नहीं कर सकते..!*
*आप चुनावी मौसम के लिए "हिंदू पहचान" उधार लेकर, नतीजों के बाद, सेक्युलर पाखंड पर, नहीं लौट सकते..!*
*बंगाल ने, भविष्य दिखा दिया है..!*
*तमिलनाडु ने, दरार दिखा दी है..!*
*घबराहट निकट है..!*
*तथाकथित सेक्युलर सहमति, मर रही है..!*
*नई भारतीय राजनीति, हिंदू-चेतन, राष्ट्रीय रूप से मुखर, सभ्यतागत रूप से जड़-सहित, और बिना माफी के होगी..!*
*जिन्होंने इसे जल्दी समझ लिया..!*
*वे पहले से नेतृत्व कर रहे हैं..!*
*जिन्होंने इसका मज़ाक उड़ाया..!*
*वे अब दशकों तक, इसकी नकल करने की, कोशिश करेंगे..!*
*और जिन्होंने, अपनी पूरी राजनीति, सनातन को गाली देने पर बनाई..!*
*वे जान जाएंगे....!*
*कि भारत कई चीज़ें माफ कर देता है..!*
*लेकिन सभ्यतागत अपमान, नहीं भूलता..!*
*संजय अग्रवाल 'हाईवे'*
*राष्ट्रहित सर्वोपरि..!*
*भारत माता की जय*
*वंदे मातरम - जय हिंद*
🪷 🇮🇳 🙏 🇮🇳 🪷
[07/06, 5:32 am] +91 94583 58022: *卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐*
*🌞 दिनांक - 07 जून 2026*
*⛅दिन - रविवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2083*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - ग्रीष्म*
*⛅मास - अधिक ज्येष्ठ*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - सप्तमी प्रातः 03:24 जून 08 तक तत्पश्चात् अष्टमी*
*⛅नक्षत्र - धनिष्ठा प्रातः 07:55 तक तत्पश्चात् शतभिषा*
*⛅योग - वैधृति सुबह 10:02 तक तत्पश्चात् विष्कम्भ*
*⛅राहुकाल - शाम 05:30 से शाम 07:11 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 05:40*
*⛅सूर्यास्त - 07:11 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:16 से प्रातः 04:58 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:59 से दोपहर 12:53 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:05 से मध्यरात्रि 12:47 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - भानु सप्तमी, रविवारी सप्तमी (सूर्योदय से जून 08 प्रातः 3:24 तक)*
*🌥️विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है, तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
🌻 अच्छा बर्ताव और निश्छल प्रेम का व्यवहार करके सब में प्रेम और भलाई का वितरण करो। यही सच्ची सहायता और सच्चा आश्वासन है।
🌻कितना सामर्थ्य छुपा है शब्दों में ! किताबें पढ़कर, लकीर के फकीर होकर अथवा अनपढ़ होकर भी क्या करोगे ? न अधिक ऐहिक पढ़ाई अच्छी है, न अनपढ़ रहना अच्छा है। अच्छे में अच्छा तो परमात्मदेव का ज्ञान है, परमात्मप्रीति है, परमात्मरस है, वही सार है। अतः उसी का नाम-स्मरण करो, उसी के शब्द सुनो, उसी की ओर ले जाने वाले शब्द बोलो-सोचो और उसी की शांति, आनंद पाने का पूरा-पूरा प्रयत्न करो, मुक्तात्मा हो जाओ। ॐ आनन्द…. ॐ शांति….. ॐ… ॐ…..ॐ…..
🌻विचारशून्य होकर गुरु की आज्ञा का पालन करना चाहिए। गुरु-वचनों में पूर्ण विश्वास, पूर्ण श्रद्धा होगी तो पूर्ण प्रकाश भी होगा।
*🙏🚩🚩 " ll जय श्री राम ll "* 🚩🚩🙏
[07/06, 5:32 am] +91 94583 58022: 🌹*सुप्रभात*🌹
🌹*राधे राधे*🌹
*एक बार की बात है, किसी नगर में एक बड़ा हिंसक मनुष्य रहता था, वो लोगों को लूटता और बड़ी निर्ममता से लोगों के प्राण हरता, इसमें उसको बहुत सुख मिलता। एक बार एक सुनसान रास्ते से एक संत भगवान जा रहे थे, वो लुटेरा उनके सामने आ गया उनको मारने के इरादे से, मगर उन संत के मुख पर इतना तेज था कि लुटेरा उनके ऊपर दृष्टि नहीं रख पा रहा था। संत भगवान ने उस लुटेरे से कहा "तुम ऐसा क्यों करते हो लोगों के साथ", लुटेरा बोला "मुझे सुख मिलता है", संत बोले "तुम्हें पता ही नहीं है सुख किसे कहते हैं", उस लुटेरे ने प्रश्न किया "किसे कहते हैं सुख", संत ने उत्तर दिया " तुम सुख का अनुभव तब तक नहीं कर सकते जब तक तुम निष्पाप नहीं हो जाते, निष्पाप होने के लिए अपने देश मे जितने तीर्थ हैं उनकी यात्रा करो"। लुटेरे ने शंका जाहिर की " कैसे ज्ञात होगा कि मैं निष्पाप हो गया हूँ", संत ने उस लुटेरे को एक सूखी लकड़ी की डंडी दी और कहा "जब ये डंडी हरी हो जाये तो समझ जाना तुम निष्पाप हो चुके हो"। संत को प्रणाम कर के लुटेरा तीर्थ करने चल दिया।*
*तीर्थ के लिए चलते चलते मार्ग में रात्रि आई और वह लुटेरा एक वृक्ष के नीचे आराम करने लगा। उस वृक्ष पर चार चोर पास वाले गांव को लूटने का और सारे गांव मे आग लगा कर ,सब गांव वालों को मारने की योजना बना रहे थे। उस वृक्ष के नीचे विश्राम करते लुटेरे ने उन चोरों की बात सुन ली और उन चारों को मार दिया। उन चारों को मारते ही जैसे ही उसने संत द्वारा दी हुई वो सूखी लकड़ी की डंडी देखी वो पूरी हरी हो गयी। उस लुटेरे को बड़ा आश्चर्य हुआ और वो संत के पास वापस लौट गया। संत ने उसको देख कर कहा कि "हमें मालूम था तुम तीर्थ नहीं कर पाओगे क्योंकि तुम्हारा स्वभाव लूटने का है"। उस लुटेरे ने जवाब दिया कि "आपकी आज्ञा अनुसार इस डंडी के हरी होने पर ही आपके पास लौट के आया हूँ", संत ने पूछा "कौन से तीर्थ गए थे", लुटेरे ने उत्तर दिया "तीर्थ नहीं चार चोरों को मार के आया हूं", फिर लुटेरे ने पूरा वृतांत सुनाया, तब संत ने उससे कहा:*
_*देखो जब तक तुम अपने स्वार्थ के लिए लोगों को मारते रहे तुम पापी रहे, तुमने जब गांव वालों की रक्षा के लिए चार चोरों के प्राण लिए तब तुम्हारा उद्देश्य पवित्र हो गया और तुम निष्पाप हो गए"। उसके बाद उस लुटेरे ने सारे बुरे कर्म छोड़ दिये और प्रभु भक्ति में अपना जीवन गुज़ारा।*_
🚩🚩🚩
👏👏👏
[07/06, 5:32 am] +91 94583 58022: *राधे - राधे ॥ आज का भगवद् चिन्तन ॥*
*०७.०६.२०२६*
🌟*|| कहना नहीं, करना सीखें ||*🌟
कोरा उपदेश भी तब तक किसी काम का नहीं, जब तक उसे चरितार्थ न किया जाए। वाणी के बजाय कार्य से दिए गए उदाहरण कई ज्यादा प्रभावी होते हैं। प्रत्येक सफल व्यक्तियों में एक बात की समानता मिलती है, कि उन्होंने केवल वाणी से नहीं अपितु अपने कार्यों से भी उदाहरण प्रस्तुत किये हैं। बिना पुरुषार्थ के हमारे महान से महान संकल्प भी केवल रेत के विशाल महल का निर्माण करने जैसे हो जाते हैं।
हमारे पास संकल्प रूपी मजबूत आधारशिला तो होनी ही चाहिए लेकिन पुरुषार्थ रूपी पिलर भी होने चाहिए, जिस पर सफलता रुपी गगनचुम्बी महल का निर्माण संभव हो सके। महत्वपूर्ण ये नहीं कि हम अच्छा कह रहे हैं अपितु महत्वपूर्ण तो ये है, कि हम अच्छा कर रहे हैं। सृजनात्मकता जीवन की माँग ही नहीं अपितु अनिवार्यता भी है। इसलिए केवल अच्छा कहना नहीं अपितु अच्छा करना भी हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
🙏 *जय श्री राधे कृष्ण* 🙏
[07/06, 5:32 am] +91 94583 58022: ........................🕉️🍁।।राम।।🍁........................
🍁 *विचार संजीवनी* 🍁
*..संसार नहीं है, भगवान् हैं..*
कलियुग में नामकी महिमा अधिक है। कारण कि जब किसी तरह की कोई योग्यता नहीं होती, तब पुकार होती है। नामजप एक पुकार है। सब तरह से अयोग्य बालक पुकारता है।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।।
-यह पुकार है। 'हरे' कहने में भाव रखें कि संसार हरा गया है, जा रहा है और 'राम' व 'कृष्ण' कहने में यह भाव रखें कि भगवान् रह रहे हैं। संसार बह रहा है, भगवान् रह रहे हैं। संसार नहीं है, भगवान् हैं।
*राम ! राम !! राम !!!*
-परम श्रद्धेय स्वामी जी
श्रीरामसुखदास जी महाराज
*साधन-सुधा-निधि* (पृष्ठ-५२९)
[07/06, 5:33 am] +91 94583 58022: 0️⃣7️⃣💧0️⃣6️⃣💧2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣
*🔥 आज की प्रेरणा प्रसंग 🔥*
*🌹 अच्छे इंसान का निर्माता 🌹*
एक 6 वर्षीय लड़का अपनी 4 वर्षीय छोटी बहन के साथ बाजार से जा रहा था। अचानक उसे लगा कि उसकी छोटी बहन पीछे रह गई है। वह रुका, पीछे मुड़कर देखा तो जाना, कि उसकी बहन एक खिलौने की दुकान के सामने खड़ी कोई चीज निहार रही है। लड़का पीछे से आता है और बहन से पूछता है -'कुछ चाहिए तुम्हें?' लड़की एक गुड़िया की तरफ उंगली उठाकर दिखाती है। बच्चा उसका हाथ पकड़ता है, एक जिम्मेवार बड़े भाई की तरह अपनी बहन को वह गुड़िया उठा कर दे देता है। बहन बहुत खुश हो गई। दुकानदार यह सब देख रहा था। बच्चे का प्रगल्भ व्यवहार देखकर आश्चर्यचकित भी हुआ। अब वह बच्चा बहन के साथ काउंटर पर आया और दुकानदार से पूछा- 'सर कितनी कीमत है इस गुड़िया की?'
दुकानदार एक शांत और गंभीर व्यक्ति था। उसने जीवन के कई उतार-चढ़ाव देखे थे। उसने बड़े प्यार और अपनत्व से बच्चे से पूछा - 'बताओ बेटे आप क्या दे सकते हो?' बच्चा अपनी जेब से वह सारी सीपें बाहर निकाल कर दुकानदार को देता है, जो उसने थोड़ी देर पहले, बड़ी मेहनत से, अपनी बहन के साथ, समंदर के किनारे से चुन-चुन कर बीनी थी ।
दुकानदार वह सब लेकर यों गिनता है,जैसे कोई पैसे गिन रहा हो। सीपें गिनकर वह बच्चे की तरफ देखने लगा, तो बच्चा बोला- 'सर कुछ कम है क्या?'
दुकानदार- 'नहीं- नहीं यह तो इस गुड़िया की कीमत से भी ज्यादा है, मैं वापस देता हूं', यह कहकर उसने चार सीपें रख ली और बाकी की बच्चे को वापस दे दी । बच्चा बड़ी खुशी से, सीपें अपनी जेब में रखकर, बहन को साथ लेकर चला गया। यह सब उस दुकानदार का कर्मचारी देख रहा था। उसने आश्चर्य से मालिक से पूछा- 'मालिक इतनी महंगी गुड़िया, आपने केवल 4 सीपों के बदले में दे दी।'
दुकानदार एक स्मित संतुष्टि वाला हास्य करते हुए बोला-' हमारे लिए यह केवल सीप है, पर उस 6 साल के बच्चे के लिए अति मूल्यवान हैं, और अब इस उम्र में वह नहीं जानता कि पैसे क्या होते हैं। पर जब वह बड़ा होगा ना... और जब उसे याद आएगा कि उसने सीपों के बदले बहन को गुड़िया खरीद कर दी थी, तब उसे मेरी याद जरूर आएगी। और फिर वह सोचेगा कि यह विश्व अच्छे मनुष्यों से भी भरा हुआ है। यह बात उसके अंदर सकारात्मक दृष्टिकोण बढ़ाने में मदद करेगी, और वह भी एक अच्छा इंसान बनने के लिए प्रेरित होगा।
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, वो पर्याप्त है।।*
[07/06, 5:33 am] +91 94583 58022: 0️⃣7️⃣❗0️⃣6️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣
*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*
*!! परिश्रम रूपी धन !!*
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किसी गांव में एक किसान रहता था। उसके चार बेटे थे। वे सभी आलसी और निक्कमे थे। जब किसान बुढ़ा हुआ तो उसे बेटों की चिंता सताने लगी।
एक बार किसान बहुत बीमार पड़ा। मृत्यु निकट देखकर उसने चार बेटों को अपने पास बुलाया। उसने उस चारों को कहा, “मैंने बहुत-सा धन अपने खेत में गाड रखा है। तुम लोग उसे निकाल लेना।” इतना कहते-कहते किसान के प्राण निकल गए।
पिता का क्रिया-क्रम करने के बाद चारों भाइयों ने खेत की खुदाई शुरू कर दी। उन्होंने खेत का चप्पा-चप्पा खोद डाला, पर उन्हें कही धन नहीं मिला। उन्होंने पिता को खूब कोसा। वर्षा ऋतु आने वाली थी। किसान के बेटों ने उस खेत में धान के बीज बो दिए। वर्षा का पानी पाकर पौधे खूब बढ़े। उन पर बड़ी-बड़ी बालें लगी। उस साल खेत में धान की बहुत अच्छी फसल हुई।
चारों भाई बहुत खुश हुए। अब पिता की बात का सही अर्थ उनकी समझ में आ गया। उन्होंने खेत की खुदाई करने में जो परिश्रम किया था, उसी से उन्हें अच्छी फसल के रूप में बहुत धन मिला था।
इस प्रकार श्रम का महत्व समझने पर चारों भाई मन लगाकर खेती करने लगे।
*शिक्षा:-*
परिश्रम ही सच्चा धन है।
*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*
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[07/06, 5:33 am] +91 94583 58022: ........................🕉️🍁।।राम।।🍁........................
🍁 *विचार संजीवनी* 🍁
*..संसार नहीं है, भगवान् हैं..*
कलियुग में नामकी महिमा अधिक है। कारण कि जब किसी तरह की कोई योग्यता नहीं होती, तब पुकार होती है। नामजप एक पुकार है। सब तरह से अयोग्य बालक पुकारता है।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।।
-यह पुकार है। 'हरे' कहने में भाव रखें कि संसार हरा गया है, जा रहा है और 'राम' व 'कृष्ण' कहने में यह भाव रखें कि भगवान् रह रहे हैं। संसार बह रहा है, भगवान् रह रहे हैं। संसार नहीं है, भगवान् हैं।
*राम ! राम !! राम !!!*
-परम श्रद्धेय स्वामी जी
श्रीरामसुखदास जी महाराज
*साधन-सुधा-निधि* (पृष्ठ-५२९)
[07/06, 5:33 am] +91 94583 58022: . *🦚आज का विचार 🦚*
. *🌸०७.०६.२०२६🌸*
*विषय सुखों की चाह ही मानव जीवन को सबसे अधिक दुःखी बनाती है। विषय सुख असंतोष को भी जन्म देते हैं और असंतोषी मन ही इस संसार का सबसे दुःखी मन है।*
*जिस मन में संतोष नहीं वह बहुत कुछ प्राप्ति के बावजूद भी अतृप्त ही रहेगा। धन के बल पर भोग अवश्य प्राप्त हो जाते हैं, लेकिन तृप्ति की प्राप्ति नहीं हो सकती है।*
*धन के बल पर पूरे संसार के भोगों को प्राप्त करने के बाद भी तुम अतृप्त ही रहोगे।*
*रिक्तता, खिन्नता, विषाद, अशांति तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ेगी।*
*असंतोष के कारण ही मानव पाप और निम्न आचरण करता है।*
*एक मात्र संतोष ही मानव मन को प्रसन्न रख सकता है।*
*खुद पर विश्वास हो तो अभाव में भी प्रत्येक क्षण आनन्द का अनुभव होगा।*
*विषय के लिए नहीं आत्मसम्मान के लिए जियो।*
*विषय भोग से आज तक कोई तृप्त नहीं हो पाया।*
*आत्मसंतोष के आश्रय से ही जीवन में तृप्ति का अनुभव किया जा सकता है।*
. *निर्णय आपका*
. 👏
. *◆●स्वयं विचार करें●◆*
. ☘️ *सुप्रभात*🌸
[07/06, 5:38 am] +91 94583 58022: भानु सप्तमी व्रत आज
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भानु सप्तमी हिंदू धर्म में सूर्य देव की उपासना का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह में दो सप्तमी तिथि आती हैं, जब रविवार के दिन सप्तमी तिथि का संयोग बनता है, तो उसे 'भानु सप्तमी' कहा जाता है। चूंकि रविवार सूर्य देव का दिन है और सप्तमी उनकी प्रिय तिथि, इसलिए यह दिन 'सूर्य ग्रहण' के समान ही प्रभावशाली और पुण्यदायी माना जाता है।
भानु सप्तमी का महत्व
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आरोग्य की प्राप्ति: शास्त्रों में कहा गया है— 'आरोग्यं भास्करादिच्छेत्' अर्थात् अच्छे स्वास्थ्य की कामना सूर्य देव से करनी चाहिए। भानु सप्तमी का व्रत करने से गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है।
पितृ दोष से मुक्ति: इस दिन तर्पण और दान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
मान-सम्मान: सूर्य सफलता और तेज का कारक है। इस दिन पूजा करने से समाज में यश और पद-प्रतिष्ठा बढ़ती है।
भानु सप्तमी पूजा विधि
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ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: इस दिन सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।
सूर्य अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय 'ॐ सूर्याय नमः' का जाप करें।
आदित्य हृदय स्तोत्र: अर्घ्य के बाद वहीं खड़े होकर 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ करें। यह शत्रुओं पर विजय और आत्मविश्वास के लिए अचूक है।
दीपदान और भोग: सूर्य देव के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक जलाएं और उन्हें गुड़ या लाल फल अर्पित करें।
उपवास: इस दिन बिना नमक का भोजन करने या केवल फलाहार करने का विशेष महत्व है।
व्रत के लाभ
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मानसिक शांति: यह व्रत मन की चंचलता को दूर कर एकाग्रता बढ़ाता है।
त्वचा रोगों से मुक्ति: धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से सूर्य पूजा करने पर चर्म रोगों में लाभ होता है।
सौभाग्य में वृद्धि: महिलाओं के लिए यह व्रत अखंड सौभाग्य और संतान सुख देने वाला माना गया है।
स्मरण शक्ति: विद्यार्थियों के लिए भानु सप्तमी का व्रत और सूर्य ध्यान बुद्धि को प्रखर बनाता है।
क्यों मनाई जाती है भानु सप्तमी? (पौराणिक कथा)
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन ही सूर्य देव पहली बार अपने रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड में प्रकट हुए थे। उन्होंने इसी दिन अपने सात घोड़ों के रथ से संसार को आलोकित (प्रकाशित) किया था। इसीलिए इसे सूर्य देव के जन्म उत्सव के रूप में भी देखा जाता है।
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