आज आज सुबह का मुख्य समाचार जो इस तरीके से सारे देश में और उत्तर प्रदेश की जनसंख्या बढ़ती हुई और उसके ऊपर योगी सरकार क्या कहना है

भारत एक ऐसा देश है जहां पर जनसंख्या से लेकर हर एक चीजों के ऊपर ध्यान देकर सभी लोग बातचीत आपस में कर रहे हैं और राजनीतिक ज्यादा भारत में ही चलता है और कोई भी बात को लेकर राजनीतिक तौर से लड़ाई अभी होती है

Jun 13, 2026 - 06:31
Updated: 2 days ago
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आज आज सुबह का मुख्य समाचार जो इस तरीके से सारे देश में और उत्तर प्रदेश की जनसंख्या बढ़ती हुई और उसके ऊपर योगी सरकार क्या कहना है
Jitendra Kumar
आज आज सुबह का मुख्य समाचार जो इस तरीके से सारे देश में और उत्तर प्रदेश की जनसंख्या बढ़ती हुई और उसके ऊपर योगी सरकार क्या कहना है
आज आज सुबह का मुख्य समाचार जो इस तरीके से सारे देश में और उत्तर प्रदेश की जनसंख्या बढ़ती हुई और उसके ऊपर योगी सरकार क्या कहना है

*प्रकाशनार्थ*

*मोदी बनाम नेहरू -- बड़ा कौन?*

*(आलेख : संजय पराते)*

नरेंद्र मोदी अपने आपको नेहरू से बड़ा दिखाने की हवस में यह प्रदर्शित करने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका प्रधानमंत्री का कार्यकाल नेहरू से ज्यादा हो गया है और ज्यादा चमकदार है। इतिहास का मिथ्याकरण इसे ही कहते हैं। वास्तविकता यह है कि 15 अगस्त 1947 को देश को आजादी मिलने के बाद 27 मई 1964 को अपनी मृत्यु तक जवाहरलाल नेहरू इस देश के लगातार प्रधानमंत्री रहे और उनका कुल कार्यकाल 6130 दिन (16 साल 9 महीने 12 दिन) का है। ये भारत में किसी भी प्रधानमंत्री का सबसे लंबा कार्यकाल है। नेहरू के इस रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए वर्तमान संघी प्रधानमंत्री मोदी को अभी कई पापड़ बेलने होंगे, क्योंकि प्रधानमंत्री बने हुए अभी उन्हें केवल 4400 दिन ही हुए हैं। नेहरू के इस रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए हमारी पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर 1733 चक्कर लगाने होंगे, यानी मोदी को 14,97,31,200 सेकंड (14 करोड़ 97 लाख 31 हजार 200 सेकंड) और अपनी कुर्सी के पायों को मजबूती से थामे रखना होगा, क्योंकि उनके नॉन-बायोलॉजिकल शरीर में इतनी क़ूबत नहीं है कि पृथ्वी की अपने अक्ष पर घूर्णन गति और सूर्य के चारों ओर की परिक्रमा गति को बढ़ाकर रात-दिन के कुल 24 घंटों और साल के 365 दिनों के समय को भी कुछ कम कर सके। गंगा मैया की अभी उन पर इतनी कृपा नहीं हुई है।

असल बात क्या है? सिर्फ इतना कि एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल नेहरू के बराबर हो गया है। यदि वे जीवित रहते, तो इसी बात की सबसे ज्यादा संभावना थी कि वे और ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री बने रहते और शायद मोदी भी उनके संभावित रिकॉर्ड को तोड़ नहीं पाते! खैर, मृत्यु पर किसी का बस नहीं होता और नरेंद्र मोदी अपने 12 साल के प्रधानमंत्रित्व के जश्न के जरिए वास्तव में नेहरू को इतनी जल्दी काल-कवलित हो जाने का धन्यवाद अदा कर रहे हैं।

मोदी और संघी गिरोह बहुत हड़बड़ी में है। वे नेहरू के पहले पांच वर्ष के कार्यकाल को इतिहास से मिटा देना चाहते हैं, जब उन्होंने इस देश के अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता संभाली थी। आजादी के समय देश में संविधान लागू नहीं हुआ था और हमारा देश भारत सरकार अधिनियम, 1935 तथा भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 से शासित था। संविधान सभा ने, जो एक निर्वाचित संस्था थी और जिसकी हैसियत संसद के बराबर ही थी, नेहरू को प्रधानमंत्री चुना था और लार्ड माउंटबेटन ने नेहरू को भारत का अंतरिम प्रधानमंत्री बनाकर कांग्रेस के हाथ में देश की सत्ता सौंपी थी, क्योंकि आजादी की लड़ाई के दौरान वही इस देश में सबसे बड़ा संगठन बनकर उभरा था।

26 जनवरी 1950 को हमारे देश में संविधान लागू हुआ, जिसने हमारे देश को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित किया। इस संविधान को "हम भारत के लोगों" ने अपने आपको आत्मार्पित किया है। संविधान लागू होने के दो वर्ष बाद भारत में पहले आम चुनाव हुए, जिसके बाद जवाहरलाल नेहरू निर्वाचित प्रधानमंत्री बने।

दुनिया के किसी भी देश का इतिहास बताता है कि आजादी मिलने के दूसरे दिन ही निर्वाचित सरकार का गठन नहीं हो जाता। आजादी के बाद से पहले निर्वाचन तक का समय कितना कांटों भरा था, देश को मिली नई-नई आजादी को संजोने का जतन कितना मुश्किल था, यह तो वही लोग बता सकते हैं, जिन्होंने देश की आजादी की लड़ाई लड़ी थी। जो लोग इस संघर्ष से बाहर थे और वास्तव में अंग्रेजों के हाथ मजबूत कर रहे थे, देश को धर्म के आधार पर विभाजित करने का मंत्र दे रहे थे, वे लोग आज भी खा तो रहे हैं बाबा साहेब के संविधान की कसम, लेकिन कर रहे हैं हिंदू-मुस्लिम ही!, ताकि वोटो की भरपूर फसल काटी जा सके, जो उन्हें सत्ता में बैठाए रखेगी और वे सत्ता की ताकत का इस्तेमाल बुलडोजर चलाने और हिंदू राष्ट्र निर्माण के लिए रास्ता बनाने के लिए कर सके। तो देश की आजादी के बाद 1952 में पहले आम चुनाव हुए और नेहरू पांच सालों तक अंतरिम प्रधानमंत्री बने रहे, तो इसमें उनकी क्या गलती?

लेकिन एक निर्वाचित प्रधानमंत्री से क्या वे कमतर थे? अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में रहते हुए क्या वे एक निर्वाचित प्रधानमंत्री की शक्तियों से महरूम थे? नहीं। मंत्रिमंडल का गठन, नीतियों का निर्माण, विदेश नीति का निर्धारण और वे सब शक्तियां उनके पास थी, जो एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के पास होती है। इसलिए संघी गिरोह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नेहरू के अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में, पहले पांच सालों के कार्यकाल को न गिनना राजनैतिक अनैतिकता और इतिहास के साथ धोखाधड़ी है। 

उल्लेखनीय है कि संघी गिरोह बाबा साहेब अम्बेडकर के नेतृत्व में बनाए गए इस संविधान के पक्ष में ही नहीं था। इसका मतलब ही यह है कि वह इस संविधान के बुनियादी मूल्यों -- लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, समानता, धर्मनिरपेक्षता और वयस्क मताधिकार -- के आधार पर भारतीय समाज का पुनर्निर्माण नहीं करना चाहता था। उसके लिए तो वह मनुस्मृति ही पवित्र ग्रन्थ था, जिसे वह संविधान का दर्जा देना चाहता था और वर्ण व्यवस्था के आधार पर सामंती मूल्यों के साथ समाज का पुनर्गठन करना चाहता था। आज भी उसके लिए मनुस्मृति ही पथ-प्रदर्शक ग्रंथ है और केंद्र की सत्ता में आने के 12 सालों का इतिहास बताता है कि रोजमर्रा के जीवन में उसने मनुस्मृति को हमारे समाज पर लादा है और संविधान और उसके बुनियादी मूल्यों को उसने कमजोर किया है। उसका हर एक सधा कदम हमारे देश को मनुवाद के ढांचे में जकड़ने के लिए उठ रहा है।

लेकिन क्या इस बात का जश्न मनाया जा सकता है कि कौन से प्रधानमंत्री ने अतीत के किस प्रधानमंत्री से ज्यादा समय तक राज किया है? यह बेशर्मी की हद है! लेकिन संघी गिरोह और मोदी सरकार में कोई राजनैतिक शर्म ही कहां बची है?

फिर भी सवाल अपनी जगह है। कौन बड़ा -- नेहरू या मोदी? इस सवाल का जवाब तो नेहरू और मोदी के कामों की तुलना से ही मिल सकता है। यह नेहरू ही थे, जिन्होंने आजादी के बाद देश को विभाजन की पीड़ा से बाहर निकाला। इस पीड़ा में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की संघी गिरोह द्वारा हत्या भी शामिल है। यह नेहरू ही थे, जिन्होंने देश के विकास के लिए वैज्ञानिक शिक्षा के प्रचार पर बल दिया और देश के आधुनिक विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाओं और सार्वजनिक क्षेत्र की बुनियाद रखी। यह नेहरू ही थे, जिनके नेतृत्व में भारत पिछड़े और गरीब देशों की आवाज बना और जिसकी आवाज गुटनिरपेक्ष आंदोलन के जरिए पूरी दुनिया सुनती थी, क्योंकि उन्होंने साम्राज्यवाद के किसी भी दबाव में आने से इंकार किया था।यह नेहरू ही थे, जिनके समय भारत ने मानव विकास संकेतकों की सीढ़ी पर चढ़ना शुरू किया था और जिन्होंने एक गुलाम अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था में ढालने का काम किया था। और हां, इन सब उपलब्धियों को याद करते हुए यह याद रखना भी जरूरी है कि वे किसी प्रकार का "गोदी मीडिया" भी नहीं पाल रहे थे।

और मोदी की उपलब्धियां? जिस संविधान की कसम खाकर वे सत्ता में आए हैं, उसे निष्प्रभावी बनाने के काम में मनोयोग से लगे हैं। एक संप्रभु देश को अमेरिका के अधीनस्थ रणनीतिक सहयोगी में बदल रहे हैं। सांप्रदायिक सद्भाव की विरासत को नफरत भरी हिंदू-मुस्लिम कट्टरता में ढाल रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को बेच-बेचकर देश चलाने के लिए राजकोषीय घाटे को पाटने की कला में पारंगत हो रहे हैं। उनके राज में जितनी जीडीपी बढ़ रही है, उससे ज्यादा आय और संपत्ति की असमानता बढ़ रही है। मानव विकास सूचकांक की सीढ़ी से हर मामले में देश का ढ़ुलकना जारी है। यह मोदी ही है, जो अडानी-अंबानी की गुलामी के लिए दुनिया के राजनयिकों के बीच कही ढोल पीट रहे हैं, कहीं नाच रहे है और 'मेलोडी है चॉकलेटी' का तमाशा करके भारत की गरिमा को गरिमा को गिरा रहे हैं। मोदी राज में हमारा भारत एक लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष गणराज्य का चरित्र खो रहा है और बड़ी तेजी से कट्टर हिंदूवादी-फासीवादी तानाशाह राज्य में बदल रहा है, जहां अल्पसंख्यक और गरीब नागरिकों के लिए दोयम दर्जे की अधिकारविहीन नागरिकता ही बची है। लेकिन हां, नरेंद्र मोदी और संघी गिरोह के पास कॉर्पोरेट और हिंदुत्व के गठजोड़ से पैदा एक गोदी मीडिया जरूर है, जो उन पर लगे दाग को भी चंद्रमा की खूबसूरती की तरह बताने में दिन-रात एक किए हुए हैं।

हां, इतिहास का एक और तथ्य नहीं भूलना चाहिए। वह यह कि नेहरू जीवन पर्यंत कांग्रेस के पूर्ण बहुमत वाली सरकार के प्रधानमंत्री थे और उनका प्रधानमंत्रित्व किसी दल-विशेष की कृपा पर टिका हुआ नहीं था। नरेंद्र मोदी पिछले 12 सालों से गठबंधन सरकार के ही मुखिया है और अपने तीसरे कार्यकाल में तो उनकी पार्टी भाजपा बहुमत से इतनी दूर है कि उनकी कुर्सी टिकाए रखने के लिए दो बैसाखियों की जरूरत है।

सारतः, नेहरू का युग भारत को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का युग था, तो मोदी राज के पिछले 12 बरस हमारे देश को प्रकाश से अंधकार की ओर ले जाने का युग है, सभ्यता से असभ्यता और बर्बरता की ओर ले जाने का युग है।

लेकिन किसी देश और सभ्यता के इतिहास में ऐसे अंधेरे भरे क्षण भी आते हैं, जिनसे आज हमारा देश गुजर रहा है। लेकिन अंधकार के क्षण स्थायी नहीं होते। स्थायी तो वह प्रकाश ही है, जिसके कारण मानव जाति आदिम सभ्यता से निकलकर आधुनिक सभ्यता तक पहुंच चुकी है और अतीत में भी अंधकार की कोई दीवार विकासमान सभ्यता के प्रकाश को रोक नहीं पाई है। नेहरू काल की दीप्ति को मोदीकाल का अंधेरा हरने की स्थिति में नहीं है। नरेंद्र मोदी और संघ की बौखलाहट, नेहरू के प्रति उनकी नफरत इसी कारण से है। जितनी वे नेहरू की लकीर को मिटाने की कोशिश करेंगे, उतनी ही उनकी ही लकीर और ज्यादा छोटी होती जाएगी।

इस आलेख का समापन एक बाल कथा से। मेंढकों के झुंड के एक सरदार पर हर प्राणी से बड़ा बनने-दीखने का भूत सवार हुआ। हर समय वह यही पूछता था -- सबसे बड़ा कौन रे भैया, सबसे बड़ा कौन? मेंढकों का समूह कोरस में जवाब देता था -- आप हुजूर, आप! एक दिन एक मेंढक को एक बैल दिखा और उसने हिम्मत करके सरदार को उस प्राणी की ओर इशारा कर दिया। मेंढ़को के सरदार ने अब उस बैल से मुकाबला करने के लिए गुब्बारे की तरह अपने शरीर को फूलाना शुरू किया और अंततः उसका पूरा शरीर फट गया। यही हाल मोदी का है, जो पूछ रहे हैं -- सबसे बड़ा कौन रे भैया, सबसे बड़ा कौन? और गोदी मीडिया कोरस में जवाब दे रहा है -- आप हुजूर, आप!

गोदी मीडिया द्वारा फुलाए जा रहे इस गुब्बारे का हश्र सभी को मालूम है, सिवा मोदी और संघी गिरोह को छोड़कर। हर फासीवादी तानाशाह का यही हश्र होना है।

*(लेखक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के *🌸

🌾दोपहर शाम की देश राज्यों से बड़ी खबरें*

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*1* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की नारीशक्ति की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि विज्ञान, अंतरिक्ष और नए आविष्कारों जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की सफलता देखकर उन्हें बहुत खुशी होती है। ड्रोन तकनीक जैसे आधुनिक क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से देश के विकास की तस्वीर बदल रही है। यह बदलाव प्रगति के नए रास्ते खोल रहा है।

*2* पीएम मोदी ने बताया कि सरकार स्वयं सहायता समूहों को सक्रिय रूप से सहयोग दे रही है। इन समूहों की मदद से महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बन रही हैं। पिछले 12 वर्षों के दौरान एनडीए सरकार ने महिलाओं के नेतृत्व में होने वाले विकास को प्राथमिकता दी है। आज इसका असर समाज के हर छोटे-बड़े क्षेत्र में साफ दिखाई देता है

*3* सरकार ने उद्योगों के पेट्रोल पंप से तेल खरीदने पर रोक लगा दी है। अब वे थोक केंद्रों से ही तेल खरीद सकेंगे। वहीं पेट्रोल पंप पर एक ग्राहक या वाहन के लिए डीजल की सीमा 200 लीटर तय की गई है। यह फैसला आम जनता को तेल की कमी और कालाबाजारी से बचाने के लिए लिया गया है।

*4* केंद्र सरकार, असम व नागालैंड के बीच समझौता, अगले साल एक-दो राज्यों को छोड़ पूरे पूर्वोत्तर से हटेगा AFSPA

*5* देशभर में 21 जून को मेडिकल कॉलेजों में भर्ती के लिए होने वाली परीक्षा नीट का दोबारा आयोजन किया जाना है। गृह मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद सीआरपीएफ और सीआईएसएफ को परीक्षा के दौरान कई तरह की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई हैं

*6* भारतीय सेना को मिले 106 कामिकाजे ड्रोन, 180 किमी की रेंज, 450kmph की रफ्तार; न जैमिंग का असर, न टारगेट से भटकेंगे

*7* मीनाक्षी नटराजन को 'सुप्रीम' झटका, कोर्ट ने कहा- चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकते

*8* नामांकन रद्द होने के खिलाफ मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोलीं- पहले वोट चोरी होती थी, इस बार सीट चोरी हुई

*9* दिल्ली के तुगलकाबाद में बिल्डिंग में आग, 3 मौतें, 6 झुलसे, पार्किंग में टू-व्हीलर में आग लगी, 5वीं मंजिल तक फैली; छत के रास्ते रेस्क्यू

*10* शूटर जसपाल राणा का निधन, कॉमनवेल्थ गेम्स में 9 गोल्ड जीते, अपने कोच के निधन का पता चलते ही मनु भाकर ने ट्रेनिंग रोकी

*11* ममता की हार के 14 दिन बाद ही TMC टूटी, बागियों का 18 मई को स्पीकर को भेजा लेटर सामने आया, इसमें 19 सांसदों के दस्तखत

*12* राम मंदिर के चढ़ावे पर क्यों उठे सवाल, पद्मनाभ मंदिर में जज के सामने खुलती है दानपेटी, सांवलिया सेठ में पब्लिक कर सकती है गिनती

*13* ट्रम्प बोले- ईरान के साथ आज जंग खत्म हुई, वे कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे; ईरान बोला- अभी हमने कोई फैसला नहीं लिया

*14* नेतन्याहू को भी नहीं पता था ईरान को लेकर ट्रंप का प्लान, रिपोर्ट में दावा- समझौते के एलान से इजरायल हैरान

*15* सेंसेक्स 1400 अंक चढ़कर 75,200 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी 380 अंक ऊपर 23,530 पर पहुंचा; मेटल और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी

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: *चंबा में सफाई कर्मचारियों ने सफाई ठेकेदार पर लगाए शारीरिक शोषण के आरोप*

*चंबा।* पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कालेज में सफाई ठेकेदार पर उनकी महिला कर्मियों ने शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाया है। *वीरवार को महिला सफाई कर्मी ठेकेदार के खिलाफ शिकायत लेकर महिला थाने पहुंची।*

*उन्होंने पुलिस को बताया कि पिछले दो सालों से उनका शोषण कर रहा था।* जब वह विरोध करती थी तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता था। नौकरी से निकालने के नाम पर कई बार उन्हें अपनी हवस का शिकार बनाया। उनके कहे अनुसार नहीं करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती। गरीबी के कारण उन्हें अपना परिवार चलाने के लिए इस नौकरी की काफी जरूरत थी। यही वजह रही कि न चाहते हुए भी उन्हें ठेकेदार की मनमानी का शिकार बनना पड़ा। पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने बताया कि महिला सफाई कर्मी अपनी शिकायत को लेकर महिला थाने आई थी। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आगामी निष्पक्ष जांच कर रही है।

JitendraKumar: *केंद्र सरकार की इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल यूजर्स को पेट्रोल पंप से पेट्रोल और डीजल खरीदने से रोक* 

नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार ने आज शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. जानकारी के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को लेकर केंद्र सरकार ने देश के पेट्रोल पंप से भारी मात्रा में इंडस्ट्रियल पेट्रोल और डीजल को खरीदने पर पाबंदी लगा दी है

सरकारी आदेश के मुताबिक इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल यूजर्स को पेट्रोल पंप से पेट्रोल और डीजल खरीदने से रोक दिया है और इसके बजाय उनसे अपनी जरूरत का सामान बल्क सेल पॉइंट (थोक बिक्री केंद्रों) से खरीदने को कहा है.

यह रोक 90 दिनों तक लागू रहेगी. ये रोक कुछ इलाकों में, खासकर डीजल की डिमांड में बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी के बाद लगाई गई हैं, क्योंकि कीमतों में अंतर के कारण बल्क यूजर्स ने पेट्रोल पंप से फ्यूल खरीदना शुरू कर दिया है. दिल्ली में पेट्रोल पंप पर डीजल की कीमत Rs 95.20 प्रति लीटर है, जबकि बल्क में इसकी कीमत 134.50 रुपये प्रति ली. है.

Jitendra Kumar: *महिलाओं को होममेकर नहीं, राष्ट्र निर्माता कहें*

सुप्रीम कोर्ट बोला, परिवार की नींव करती हैं मजबूत

महिला के काम की कीमत हर महीने 30 हजार रुपए जितनी

एक्सिडेंट पर मुआवजा तय करते हुए यही होगा आधार

देशभर में सडक़ हादसों में जान गंवाने वाली गृहिणियों के परिवारों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि घर संभालने वाली महिलाओं को राष्ट्र निर्माता (नेशन बिल्डर) का दर्जा मिलना चाहिए। उनके काम की तुलना किसी पेशेवर से करके उनके योगदान को कम नहीं आंका जा सकता। जस्टिस संजय करोल और न्यायाधीश एन कोटिस्वर सिंह की बैंच ने कहा कि किसी हादसे में गृहिणियों की मौत होने पर, उनके द्वारा की जाने वाली परिवार की देखभाल और घरेलू काम की कीमत कम से कम 30 हजार रुपए प्रति महीना (3.6 लाख रुपए सालाना) मानी जाएगी। यह रकम प्रणय सेठी मामले में तय अन्य सभी मुआवजा नियमों के अलावा होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक गृहिणी का काम केवल खाना बनाना, बच्चों की देखभाल और घर संभालना नहीं है। वह परिवार की नींव को मजबूत बनाती है, अगली पीढ़ी तैयार करती है। जब किसी दुर्घटना के कारण गृहिणी की मौत हो जाती है, तब उसका मुआवजा तय करते उसके योगदान का आकलन जरूरी है।

यदि किसी सडक़ दुर्घटना में गृहिणी घायल हो जाती है या उसकी मौत हो जाती है, तो परिवार को केवल उसकी आय न होने के आधार पर कम मुआवजा नहीं दिया जा सकता। मुआवजा न तो किसी के लिए अचानक छप्परफाड़ लॉटरी जैसा होना चाहिए और न ही इतनी कम रकम होनी चाहिए कि पीडि़त का मजाक बने। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सडक़ दुर्घटना के दावों का निपटारा आमतौर पर एक साल के भीतर हो जाना चाहिए। अगर पीडि़तों को दशकों तक इंतजार करना पड़े, तो कानून का मकसद ही खत्म हो जाता है।

Tejraftarnews.in: *चम्बा मे काम के सिलसिले में घर से निकला व्यक्ति रास्ते में हो गया भयानक हादसा, 2 बच्चों के सिर से उठा पिता का साया*

हिमाचल प्रदेश के जिला चम्बा से दुखद खबर सामने आई है। जिले के अंतर्गत आती बख्तपुर पंचायत में ढांक से गिरने से व्यक्ति की मौत हो गई। व्यक्ति की पहचान पंकज कुमार पुत्र विदो राम निवासी गांव बख्तपुर के तौर पर की गई है। पुलिस ने घटना के कारणों की जांच आरंभ कर दी है। पंकज कुमार शुक्रवार सुबह रोजमर्रा की तरह काम के सिलसिले में घर से निकला था। इसी दौरान रास्ते में पांव फिसल गया और अनियंत्रित होकर गहरी ढांक में जा गिरा। पंकज कुमार को गिरता देखकर मौके पर पहुंचे परिजनों ने तुरंत पुलिस को सूचित किया। वहीं ग्रामीणों के सहयोग से पंकज कुमार को घायलावस्था में उठाकर मैडीकल कालेज चम्बा पहुंचाया।

जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मैडीकल कालेज पहुंची और शव को कब्जे में लिया, साथ ही परिजनों के बयान दर्ज किए। फिलहाल पुलिस ने आरंभिक जांच व परिजनों के बयान के आधार पर बीएनएसएस की धारा 194 के तहत कार्रवाई अमल में लाई है। बख्तपुर पंचायत के प्रधान प्रवेद कृष्ण कपूर ने बताया कि उपमंडलीय प्रशासन की ओर से मृतक के परिजनों को 25 हजार रुपए की फौरी राहत प्रदान कर दी गई है। वह अपने पीछे पत्नी व दो बच्चे छोड़ गया है। उधर, एसपी विजय कुमार सकलानी ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है

Tejraftarnews.in: प्रेम देई w/o रविन्द्र गाँव किरहा डा. घर भाडियां कोठी तहसील चम्बा हिमाचल प्रदेश की निवासी है। प्रेम देई जी पांगी से है इनके दिमाग में खून के थक्के जम रहे है। डॉक्टरों ने जल्दी ऑपरेशन करने की सलाह दी है। इन्हें चम्बा अस्पताल से टाण्डा अस्पताल और टाण्डा से चडीगढ भेज दिया यहाँ ऑपरेशन का खर्चा 8 लाख से10 लाख बताया है । इतनी धन राशि इनके परिवार जुटा नहीं पा रहा ।. आप सभी से अग्रह है कि आप जीतने सक्षम है इनके परिवार की आर्थिक रुप से सहायता करें। ताकि इनका इलाज जल्दी हो सके।

G pay no t prem singh 

Account number : t           

Account holder Baby kumari 

IFSC code PUNB0HPGB04

Tejraftarnews.in: *समझौते के बेहद करीब अमरीका-ईरान, कुछ ही दिनों में हस्ताक्षर होने की उम्मीद: ट्रंप*

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने ‘ईरान के साथ युद्ध का एक शानदार समझौता तय किया है’ और अगले कुछ दिनों में इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। श्री ट्रंप ने गुरुवार को ह्वाइट हाउस में पत्रकारों को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि सप्ताहांत पर यूरोप में एक हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया जायेगा। इसमें अमरीका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि दस्तावेज ‘अंतिम रूप’ में हैं और यह समझौता प्रक्रिया ‘बेहद जल्द पूरी हो जाएगी। यह पूछे जाने पर कि क्या ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई इस समझौते के लिए सहमत हो गये हैं? श्री ट्रंप ने कहा कि मेरी समझ से इसका जवाब हां है।

इस संभावित समझौते को ‘थोड़ा वैचारिक’ करार देते हुए श्री ट्रंप ने कहा कि यह ‘एक बेहद मजबूत सहमति पत्र’ है और ‘ऐसा कुछ है, जो पूरा होने जा रहा है।’ ईरान ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि वह युद्ध विराम के लिए अमेरिकी शर्तों पर सहमत हो गया है। गौरतलब है कि अमेरिका-इजरायल ने बीते 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ यह युद्ध शुरू किया था। इससे पहले गुरुवार को श्री ट्रंप ने लगातार तीसरे दिन ईरान पर हमला करने का संकल्प लिया था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन्होंने घोषणा की कि अमरीका ने इस कार्रवाई को रद्द कर दिया है।

Tejraftarnews.in: *भूकंप को आधार मानकर 15 जून को होगी मेगा मॉक एक्सरसाइज- अमित मैहरा*

*राष्ट्रीय एवं राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ अतिरिक्त उपायुक्त ने की टेबल टॉप एक्सरसाइज*

*चंबा, जून 12*

अतिरिक्त उपायुक्त अमित मैहरा ने आज 15 जून को प्रस्तावित 10वीं राज्य स्तरीय मेगा मॉक एक्सरसाइज के तहत राष्ट्रीय एवं राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सौजन्य से आयोजित वर्चुअल टेबल टॉप एक्सरसाइज में भाग लिया। *उन्होंने इस दौरान ज़िला में मेगा मॉक एक्सरसाइज के सफलता पूर्वक आयोजन से संबंधित तैयार की गई कार्य योजना की जानकारी भी रखी।*

 टेबल टॉप एक्सरसाइज में ज़िला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से संबद्ध विभिन्न विभागीय अधिकारियों सहित केंद्रीय सशस्त्र बलों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। 

 अमित मैहरा ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में 15 जून को राज्य स्तर पर भारी भूकंप को आधार मानकर एक मेगा मॉक एक्सरसाइज का आयोजन किया जा रहा है । इसके तहत ज़िला चंबा के सभी उपमंडलों में सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक दो चिन्हित स्थानों पर प्राकृतिक आपदा की स्थिति को आधार मानकर राहत एवं बचाब कार्यों का पूर्वाभ्यास किया जाएगा। 

 उन्होंने बताया कि ज़िला मुख्यालय में चार विभिन्न स्थानों पर आपदा पूर्वाभ्यास किया जाएगा। उपमंडल डलहौजी के तहत वन आगजनी को आधार मानकर अतिरिक्त रूप से सांय 6 से 9 बजे तक राहत एवं बचाव गतिविधियां संचालित की जाएगी। 

 अतिरिक्त उपायुक्त ने साथ में यह भी बताया कि मॉक ड्रिल के लिए स्टैजिंग एरिया राष्ट्रीय जल विद्युत निगम (एनएचपीसी) की विद्युत परियोजना चमेरा चरण-2 के हेलीपैड करियां में स्थापित किया जाएगा। मॉक ड्रिल में आपदा मित्र, एनसीसी, एनएसएस, एनबाईकेएस के स्वयंसेवी तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों को शामिल किया जाएगा।

 अमित मैहरा ने आवश्यक प्रबंधों को सुनिश्चित बनाने के लिए सभी संबंधित हित धारक विभागों के अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी जारी किए । 

 एसडीएम चंबा प्रियांशु खाती, पुलिस उपाधीक्षक बलदेव दत्त , उप आदेशक सीआईएसएफ पवन कुमार, ज़िला नियंत्रक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति कर्ण कुमार, उप मंडलीय प्रबंधक एचआरटीसी शुगल सिंह, सहायक आचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ. विनोद भारद्वाज, ज़िला कार्यक्रम अधिकारी स्वास्थ्य डॉ. करण हितेषी, वरिष्ठ प्रबंधक एनएचपीसी आलोक रंजन, सहायक अभियंता जल शक्ति दीपक भारद्वाज, लोक निर्माण दिनेश कुमार, विद्युत बोर्ड अमित ठाकुर सहित विभिन्न विभागीय एवं हितधारक अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित रहे । 

भूकंप की संभावित पूर्व चेतावनी यह सेटिंग करें ऑन

अतिरिक्त उपायुक्त अमित मैहरा ने बताया कि भूकंप की संभावित पूर्व चेतावनी प्राप्त करने के लिए एंड्रॉयड फोन उपयोगकर्ता सेफ्टी एवं इमरजेंसी फीचर के अंतर्गत उपलब्ध अर्थक्वेक अलर्ट सेटिंग को अवश्य ऑन रखें। इससे भूकंप के दौरान आवश्यक सावधानियां अपनाने का अवसर मिल सकता है। 

मॉक एक्सरसाइज के अंतर्गत यह रहेंगे सिमुलेशन स्थल 

ज़िला मुख्यालय चंबा 

ज़िला विकास कार्यालय (डीआरडीए) के समीप ऊपरी क्षेत्र में बादल फटने की घटना,कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय मैहला के समीप भूकंप, चंबा-जोत मार्ग में मंगला के पास भूस्खलन, चंबा-तीसा मार्ग के तहत गत्ति घार के निकट भूस्खलन एवं बस दुर्घटना 

उपमंडल सलूणी 

सलूणी बाजार में भूकंप, चकोली नाला में आकस्मिक बाढ़ 

*उपमंडल तीसा*

*राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बैरागढ़ के समीप बादल फटने की घटना, पीएम श्री राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तीसा के पास आकस्मिक बाढ़*

उपमंडल डलहौजी

तहसील भवन डलहौजी के समीप वनाग्नि तथा पधर नाला बनीखेत में बादल फटने की घटना  

उपमंडल भटियात

टिक्कर गला-लाहड़ू के समीप बादल फटने की घटना, किड्स कैंप स्कूल चुवाड़ी के पास भूकंप

उपमंडल भरमौर

पंचायत भवन सचूईं के पास वनाग्नि तथा सचूईं नाला में आकस्मिक बाढ़

उपमंडल पांगी

किलाड़ हेलीपैड में बादल फटने की घटना तथा लघु सचिवालय किलाड़ के पास आकस्मिक बाढ़  

 रात्रिकालीन मॉक एक्सरसाइज

उपमंडल डलहौजी के अंतर्गत सायं 6 से रात्रि 9:30 बजे तक खिरड़ी धार के समीप वनाग्नि को आधार मानकर आपदा पूर्वाभ्यास किया जाएगा ।

Tejraftarnews.in: *चंबा होम वर्क न करने पर अध्यापिका ने विद्यार्थी पीटे! वीडियो वायरल होने पर अभिभावकों में रोष*

चम्बा जिले के जनजातीय क्षेत्र पांगी के एक विद्यालय में एक अध्यापिका द्वारा विद्यार्थियाें के साथ कथित रूप से मारपीट करने का मामला सामने आया है। *घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। विद्यालय के छठी कक्षा के कुछ विद्यार्थी निर्धारित होम वर्क पूरा करके स्कूल नहीं पहुंचे थे।*

आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर एक अध्यापिका ने छात्रों को डंडे से पीटा। विद्यालय में छुट्टी होने के बाद जब बच्चे अपने-अपने घर पहुंचे तो वे रो रहे थे और उनके हाथों व शरीर के अन्य हिस्सों में चोट के निशान दिखाई दे रहे थे। बच्चों ने परिजनों को बताया कि स्कूल में अध्यापिका द्वारा उनकी पिटाई की गई है। परिजनों ने बच्चों के बयान का वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें बच्चे अपने साथ हुई कथित मारपीट की जानकारी देते नजर आ रहे हैं। इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

अभिभावकों का आरोप है कि अध्यापिका द्वारा बच्चों के साथ अत्यधिक सख्ती बरती गई और डंडे से मारपीट की गई। कुछ अभिभावकों ने दावा किया है कि घटना में दो बच्चों के हाथों में गंभीर चोटें आई हैं। हालांकि चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसलिए इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। अभिभावकों का कहना है कि यदि बच्चों ने गृह कार्य पूरा नहीं किया था तो उन्हें समझाया जा सकता था, लेकिन शारीरिक दंड किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

घटना के बाद अभिभावकों ने विद्यालय प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करवाई है। साथ ही मामले को पांगी प्रशासन के ध्यान में भी लाया गया है। अभिभावकों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर उचित कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए पांगी प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। इस संबंध में पांगी के आवासीय आयुक्त अमनदीप ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है और संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य को आवश्यक कार्रवाई करने तथा पूरे प्रकरण की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन मामले के सभी पहलुओं की जांच करेगा और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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Jeetu dehati

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