राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े जनजाति सुरक्षा मंच और वनवासी कल्याण आश्रम ने हाल ही में दिल्ली में “जनजातीय सांस्कृतिक समागम” आयोजित किया, जिसमें देशभर से हजारों आदिवासियों
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में 32 लाख किसान कपास उत्पादन से जुड़े हुए हैं। वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा होगी। अधिकांश कपास उत्पादक किसान सीमांत और छोटे किसान ही हैं
*प्रकाशनार्थ*
*सांस्कृतिक समागम के नाम पर संस्कृति से खिलवाड़!*
*(आलेख : बृंदा करात)*
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े जनजाति सुरक्षा मंच और वनवासी कल्याण आश्रम ने हाल ही में दिल्ली में “जनजातीय सांस्कृतिक समागम” आयोजित किया, जिसमें देशभर से हजारों आदिवासियों को जुटाया गया। आयोजन को बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती से जोड़ा गया। समापन पर आयोजकों ने रेलवे मंत्रालय से लेकर केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों तक सरकारी तंत्र के सहयोग के लिए आभार जताया। गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि थे। इस तरह यह केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि अर्ध-सरकारी राजनीतिक मंच था। इसलिए वहां उठाए गए सवालों और गृह मंत्री की प्रतिक्रिया को गंभीरता से समझना जरूरी है।
जनजाति सुरक्षा मंच का मुख्य एजेंडा ईसाई आदिवासियों के खिलाफ है। उसकी प्रमुख मांग है कि ईसाई धर्म अपनाने वाले आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर किया जाए और उनसे संवैधानिक अधिकार छीने जाएं। यह दावा किया जाता है कि धर्म परिवर्तन के बाद वे आदिवासी पहचान खो देते हैं। इसी सोच के आधार पर मध्य भारत के कई राज्यों, खासकर छत्तीसगढ़ में, ईसाई आदिवासी परिवारों के खिलाफ हिंसक अभियान चलाए गए हैं। कई जगह उनके निजी कब्रिस्तानों से शव तक जबरन निकाले गए हैं। इस वर्ष फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों पर अंतरिम रोक लगाई थी, लेकिन भाजपा शासित राज्यों में ऐसी घटनाएं जारी हैं।
दिल्ली के सम्मेलन में यह मांग सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के संदर्भ में उठाई गई, जिसमें 1950 के राष्ट्रपति आदेश को बरकरार रखते हुए कहा गया कि हिंदू धर्म के अलावा अन्य धर्म को मानने वाले अनुसूचित जाति के लोग एससी के संवैधानिक लाभ नहीं पा सकते। जनजाति सुरक्षा मंच चाहता है कि यही सिद्धांत अनुसूचित जनजातियों पर भी लागू किया जाए। इसके लिए संविधान की उस बुनियादी व्यवस्था को बदलना होगा, जिसमें अनुसूचित जनजाति की पहचान को किसी भी धर्म से नहीं जोड़ा गया है।
सम्मेलन के मंच पर बिरसा मुंडा की तस्वीर के साथ “भारत माता” की हिंदुत्ववादी छवि और पूर्व सांसद कार्तिक उरांव का चित्र भी लगाया गया था। कार्तिक उरांव ने कभी यह कहते हुए याचिका दायर की थी कि ईसाई उरांव आदिवासी अनुसूचित जनजाति सीट से चुनाव नहीं लड़ सकते। लेकिन 1963 में पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि आदिवासी पहचान धर्म पर आधारित नहीं होती ; वह जातीय और सामुदायिक संबंधों पर आधारित होती है। अदालत ने साफ कहा था कि कोई उरांव हिंदू, ईसाई या बौद्ध होने पर भी उरांव ही रहता है। अदालत ने यह भी माना था कि धर्म परिवर्तन के बाद भी आदिवासी अपने सामुदायिक त्योहारों और सामाजिक जीवन में भाग लेते हैं।
आज जनजाति सुरक्षा मंच इसी संवैधानिक समझ को पलटना चाहता है। उसकी रणनीति बेहद खतरनाक है — पहले ईसाई आदिवासी परिवारों को सामाजिक रूप से अलग-थलग करो, उन्हें गांव के त्योहारों और ग्रामसभा से बाहर करो, फिर उसी बहिष्कार को यह साबित करने के लिए इस्तेमाल करो कि उन्होंने आदिवासी संस्कृति छोड़ दी है। यानी पहले बहिष्कार थोपो, फिर उसे प्रमाण बताओ।
दूसरी ओर, मंच यह प्रचार भी कर रहा है कि आदिवासी व्यापक “सनातन परिवार” का हिस्सा हैं। सम्मेलन में नेताओं ने कहा कि आदिवासी “राम की संतान” हैं और “सनातन के विशाल वृक्ष की छाया” में रहते हैं। तथाकथित “घर वापसी” कार्यक्रमों में आदिवासी प्रतीकों की जगह हिंदुत्व के प्रतीकों का इस्तेमाल होता है। गांवों में मंदिर बनाना, स्थानीय देवताओं को विष्णु, शिव या दुर्गा का रूप बताना, गांवों के प्रवेश द्वार पर हनुमान प्रतिमाएं स्थापित करना — यह सब आदिवासी आस्था के हिंदूकरण की सुनियोजित प्रक्रिया है।
संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को धर्म मानने और बदलने की स्वतंत्रता देता है। आदिवासी चाहे हिंदू हों, ईसाई हों या किसी अन्य धर्म को मानें, उनकी आदिवासी पहचान पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। यह बुनियादी संवैधानिक सिद्धांत है। यह कहना कि राम की पूजा आदिवासी संस्कृति है, लेकिन यीशु की पूजा उससे विचलन है, संविधान और इतिहास — दोनों के साथ छल है।
आदिवासी समाज लंबे समय से अपनी विशिष्ट धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान की मान्यता की मांग करता रहा है। झारखंड विधानसभा अलग जनगणना कॉलम की मांग का प्रस्ताव पारित कर चुकी है, ताकि आदिवासी अपने प्रकृति आधारित विश्वासों को दर्ज करा सकें। अनेक आदिवासी बुद्धिजीवियों और संगठनों ने भी यह मांग उठाई है, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे लगातार नजरअंदाज किया है।
गृह मंत्री अमित शाह ने इस पूरे अभियान को “नया उलगुलान” बताया। यह बिरसा मुंडा की विरासत का अपमान है। बिरसा का उलगुलान औपनिवेशिक शासन के खिलाफ विद्रोह था। उन्होंने मिशनरियों का विरोध इसलिए किया, क्योंकि वे उन्हें औपनिवेशिक सत्ता का हिस्सा मानते थे। आज उनकी विरासत का इस्तेमाल सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है। शाह ने यह भी कहा कि सनातनी भी प्रकृति उपासक हैं और जल-जंगल-पहाड़ उनकी आस्था का केंद्र हैं।

जब दिल्ली में यह भाषण हो रहा था, उसी समय ओडिशा के रायगड़ा जिले के सिजिमाली में आदिवासी समुदाय अपनी पवित्र पहाड़ी को बॉक्साइट खनन से बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था। छत्तीसगढ़ के हसदेव क्षेत्र में हजारों आदिवासी वर्षों से अपने जंगलों को निजी खनन कंपनियों के हवाले किए जाने का विरोध कर रहे हैं। लाखों पेड़ काटे जा चुके हैं, जिनमें साल और करम जैसे पवित्र वृक्ष भी शामिल हैं। जो लोग दिल्ली में प्रकृति पूजा की बात कर रहे हैं, वही जमीन पर प्रकृति विनाश के सबसे बड़े संरक्षक बने हुए हैं।
आज आदिवासियों के सामने असली सवाल वनाधिकार कानून को कमजोर किए जाने, ग्रामसभा की शक्तियों के क्षरण, पेसा कानून की अवहेलना, आरक्षित नौकरियों में भारी रिक्तियों, छात्रवृत्तियों के बकाये, छात्रावासों की बदहाली और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव का है। लेकिन जनजाति सुरक्षा मंच ने कभी इन सवालों पर आवाज नहीं उठाई। उसने जल-जंगल-जमीन पर कॉरपोरेट कब्जे के खिलाफ संघर्षरत आदिवासियों का साथ नहीं दिया। उलटे धार्मिक आधार पर समुदाय को बांटकर उसने उन्हीं ताकतों की मदद की है, जो आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल कर रही हैं।
दिल्ली का यह सम्मेलन और उसे मिला सरकारी समर्थन आने वाले समय की चुनौती का संकेत है। इसका जवाब आदिवासी समाज की एकता, लोकतांत्रिक शक्तियों के साझा संघर्ष और बिरसा मुंडा समेत महान आदिवासी नायकों की प्रतिरोध की परंपरा से ही दिया जा सकता हैl
(लेखिका माकपा और जनवादी महिला समिति की वरिष्ठ नेत्री और राज्यसभा की पूर्व-सदस्य हैं।)
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आज शाम 5:00 बजे शांतिपूर्वक कैंडल मार्च नित मोर से कारगिल चौक तक चलेगा , रोशन कर के समस्त साहित्य छात्र , आप लोग लिए और हम लोग सब चलेंगे ,
आज हम लोग का कर्म है रोशन सर का साथ देना उन्हें रिहा करवाना
और झूठे इंसान को जेल भेजवाना जिसने बिहार को बदनाम किया
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Tejraftarnews.in: कष्टों से मुक्ति एवं धन प्राप्ति के उपाय
पं वेद प्रकाश तिवारी ज्योतिष एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ
Tejraftarnews.in निशुल्क परामर्श उपलब्ध
१__ गाय को प्रतिदिन तेल लगाकर रोटियां अवश्य खिलाएं प्रत्येक बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाएं इससे आपके धन आने के रास्ते में जो बाधाएं हैं वह दूर हो जाए
२__ प्रतिदिन अपने माता-पिता का आशीर्वाद लें एवं घर के बड़े बुजुर्गों की सेवा करें उन को प्रसन्न रखें और उनका आशीर्वाद लें
३__ सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय 48 मिनट के अंदर एक माला गायत्री मंत्र का जाप करें एवं दीपक जलाएं सभी कष्टों से छुटकारा मिलेगा
४__ अपने जन्मदिन पर रुद्राभिषेक करवाएं ,अपने जन्म नक्षत्र का उपाय करके घर से बाहर निकलने से आपको सभी कामों में सफलता मिलेगी
५__ एक तांबे का सिक्का लंबी यात्रा के दौरान बहते हुए जल में प्रवाहित करें ,कहीं घर से बाहर जाना हो काम के सिलसिले में तो घर के बड़े बुजुर्गों को प्रणाम करके चरण स्पर्श करके घर से बाहर निकलें उनका आशीर्वाद लेकर
६__ किसी विशेष काम से घर से निकलना हो तो हींग हाथ में लेकर अपने ऊपर से उतारकर उत्तर दिशा में फेंक दें फिर घर से बाहर जाएं आपका कार्य सिद्ध हो जाएगा
७__ यात्रा के समय एक लाल धागा अपने पास अवश्य रखें लौटने के बाद में उसको तुलसी के पेड़ में
८__ यात्रा में जाते समय नाभि में शहद लगाकर जाएं कार्य सिद्ध होगा
९__ विशेष कार्य के लिए जाने पर सफेद धागे पर तुलसी के रस को लगा कर ले जाएं
१०__ कठिन कार्य सिद्धि के लिए जाते समय एक सुपारी में कलावा लपेट कर उसकी पूजा करके साथ में लेकर जाएं कार्य सिद्ध होगा
११__ गुड़ और सफेद इलायची वाली चाय पीकर जाने से आकर्षण बढ़ता है
१२_ निर्जन एवं सुनसान स्थानों पर बैठकर शांति मन से अपने पूर्वजों को याद कर प्रार्थना करें एवम पंचतत्वों वायु जल अग्नि आकाश पृथ्वी से प्रार्थना करें अपनी समस्या के समाधान के लिए मन ही मन निवेदन करें ऐसा करते हुए 5 अगरबत्तियां चलाएं जब तक कार्य सिद्ध ना हो जाए तब तक यह प्रयोग करते रहे
१३__ महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से सूर्यादि नवग्रह सभी देवी देवता प्रसन्न होते हैं जाप करने से बहुत सी परेशानियां स्वता ही समाप्त हो जाती हैं
१४__ धन प्राप्ति के लिए जल में शहद मिलाकर अभिषेक करें एवं महामृत्युंजय का नियमित जाप करें
१५__ शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए काले घोड़े की नाल का छल्ला बनवाएं एवं सिद्ध करके मध्यमा अंगुली में धारण करने से शनिदेव के कोप शांत होते हैं
१६__ काले रंग के 11 कंबल दान करने से सभी परेशानियां खत्म हो जाती है इन उपायों से सभी परेशानियां 1 वर्ष में समाप्त होना शुरू हो जाती है
धन वृद्धि के उत्तम टोटके
१__ धन वृद्धि के लिए लाल कपड़े में मोती शंख बांधकर तिजोरी में रखें इससे घर में बरकत होगी धन की वृद्धि होगी
२__ कुछ नोटों पर चंदन का इत्र लगाकर तिजोरी में रखें बरकत के रूप में घर में धन की कमी कभी नहीं रहेगी
३__ रात में एक गिलास दूध चढ़ाने रखें सुबह उठकर उसे बबूल के वृक्ष में डाल दें आर्थिक स्थिति में सुधार होने लग जाएगा क्या कार्य कम से कम चार 41 दिन अवश्य करें
४__ एकाक्षी नारियल पूजा करके सिद्ध कराकर लाल वस्त्र में लपेटकर लक्ष्मी स्वरूप मानकर व्यापार स्थल के तिजोरी में रख दें धन आने में रुकावट दूर होगी
५__ सात मोर पंख लेकर उसमें गुलाब का इत्र लगाकर रेशमी वस्त्र में बांधकर तिजोरी का धन रखने के स्थान पर रख दें बरक्कत होना प्रारंभ हो जाएगी
६__ घर में जो झाड़ू लगाते हैं उस में काला धागा बांधकर झाड़ू लगाने के बाद छुपा के रख दे मां लक्ष्मी की कृपा आनी प्रारंभ हो जाएगी घर में धन की कमी नहीं रहेगी
७__ सुबह ब्रह्म मुहूर्त में तीन झाड़ू चुपचाप किसी भी मंदिर में रख कर चले जाएं पीछे मुड़कर ना देखें व्यापार में घाटा बना धीरे-धीरे बंद हो जाएगा
८__व्यापार स्थल में शुद्ध स्फटिक यास पारद का श्री यंत्र स्थापित करें प्रतिदिन धूप दीप नैवेद्य से पूजा करें
९__ व्यापार स्थल पर किसी ब्राह्मण द्वारा गोपाल सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ नित्य करवाने से व्यापार में बरक्कत होती है धन-धान्य की स्थिति मजबूत होती है व्यापार वृद्धि की ओर बढ़ता है व्यापार में लाभ होता है
१०___ शनिवार या मंगलवार को पीपल के 12 पत्ते तोड़ना सभी में सीताराम लिखें 11 पत्ते की माला बनाएं और एक पत्ते में सफेद बर्फी का भोग हनुमान जी को लगाएं एवं माला हनुमान जी को पहनाकर 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें सभी मनोकामनाएं पूर्ण होना प्रारंभ हो जाएंगी धन की कमी दूर होना प्रारंभ हो जाएगी
११_ लक्ष्मी प्राप्ति के लिए बिल्ली के नाल शुभ मुहूर्त में शुद्ध करवा कर अपने पास रखें धन-धान्य की कमी नहीं रहेगी
[Tejraftarnews.in: "द्वारपाल"
पुराने साधु,संत, सिद्ध कहा करते थे कि सत्य के द्वार पर कोई देवता नहीं बैठा,वहाँ एक द्वारपाल बैठा है और उसका नाम है, भय।
जैसे ही साधक भीतर उतरना शुरू करता है, भय उसके सामने खड़ा हो जाता है।कभी मृत्यु का भय, कभी अकेले हो जाने का भय, कभी सब कुछ खो देने का भय।
Jitendra Kumar
Tejraftarnews.in: *शाम की देश-राज्यों से बड़ी खबरें..*
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*1* रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीएफपीडीएस-2026 जारी किया। इसके तहत रक्षा खरीद और परियोजनाओं के लिए वित्तीय शक्तियां बढ़ाई गई हैं। नई व्यवस्था से निर्णय प्रक्रिया तेज होगी, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता मजबूत होगी
*2* राजनाथ सिंह ने इस पहल के लिए रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इससे रक्षा खरीद प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी होगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था से फील्ड कमांडरों को अधिक अधिकार मिलेंगे। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और सैन्य तैयारियां मजबूत होंगी
*3* खराब मौसम के चलते अल्मोड़ा नहीं पहुंच सके कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फोन के माध्यम से जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश नीति, जीएसटी और कृषि-शिक्षा से जुड़ी नीतियों पर तीखा हमला बोला।
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*4* राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अमेरिका के सामने पूरी तरह सरेंडर कर दिया है। उन्होंने कहा कि आज हमारे देश की विदेश नीति को अमेरिका कंट्रोल कर रहा है।
*5* प्रधानमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था बर्बाद की, कीमत युवा पीढ़ी चुका रही है, NEET छात्रा की खुदकुशी पर राहुल का हल्लाबोल
*6* CJI बोले- शहरों में व्यक्ति भीड़ में भी अकेला, गांवों में समुदाय अब भी जीवन का केंद्र, हमें जीवन को बैलेंस करना सीखना होगा
*7* तेलंगाना को बड़ी सौगात, मोदी सरकार ने हजारों करोड़ के हाईवे विस्तार योजना को दी मंज़ूरी
*8* बिहार के मुजफ्फरपुर में हॉस्पिटल में आग, 5 की मौत, कुछ मरीजों के गायब होने पर लोगों का हंगामा; पुलिस बोली- दूसरे अस्पताल में हैं
*9* कॉकरोच जनता पार्टी बोली- CBSE चेयरमैन का ट्रांसफर सिर्फ दिखावा, सरकार से बातचीत को तैयार; दिल्ली में पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की, 6 जून को प्रदर्शन
*10* गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने गुरुवार को राज्य भर में घुसपैठियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन डेल्टा हंट को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन डेल्टा हंट के तहत गुरुवार सुबह 10 बजे तक राज्य भर में 501 अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया गया है। संभावना जताई जा रही है कि यह आंकड़ा देर रात तक और बढ़ सकता है।
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*11* संविधान विशेषज्ञ और पद्म भूषण डॉ. सुभाष कश्यप का निधन, 97 साल की उम्र में ली आखिरी सांस
*12* ललित मोदी बोले- मैं भगोड़ा नहीं, दुनिया घूम रहा हूं, सरकार के हाथ बहुत लंबे, उससे पंगा नहीं ले सकते; मेरे खिलाफ कोई केस नहीं
*13* मानसून केरलम पहुंचा, इस बार लेट, 7 दिन तक भारी बारिश का अनुमान; MP-राजस्थान समेत 24 राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट
*14* ईरान जंग रोकने का प्रस्ताव अमेरिकी हाउस में पास, संसद की मंजूरी बिना सैन्य कार्रवाई पर रोक की मांग; ट्रम्प ने कहा था- जंग मेरा फैसला
*15* गिरावट के बाद संभला भारतीय शेयर बाजार सेंसेक्स निफ्टी दोनों हरे निशान पर बंद
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Tejraftarnews.in: ड्रीम लैंड मेले में पार्किंग और दुकानों से 'अवैध वसूली' का खेल, सरकारी जमीन पर दबंगई का आरोप
बस्ती। जनपद के प्रतिष्ठित सेकसरिया सरकारी कॉलेज के मैदान में इन दिनों 'ड्रीम लैंड मेला प्रदर्शनी' का आयोजन किया जा रहा है। मनोरंजन और खरीदारी के नाम पर शुरू हुआ यह मेला अब भारी विवादों के घेरे में आ गया है। स्थानीय नागरिकों और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मेले के नाम पर यहां बड़े पैमाने पर अवैध वसूली का खेल चल रहा है।पार्किंग के नाम पर खुली लूट मेले में आने वाले दर्शकों का आरोप है कि फोर-व्हीलर और थ्री-व्हीलर वाहनों की पार्किंग के नाम पर मनमाने पैसे वसूले जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पार्किंग पर्ची (रसीद) साफ बयां करती है कि ड्रीम लैंड मेला पार्किंग स्टैंड के नाम पर प्रति वाहन 60 रुपये तक की वसूली की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया एक सरकारी शैक्षणिक संस्थान के खेल मैदान में चल रही है, जहां इस तरह के व्यावसायिक स्टैंड के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया है। दुकानदारों से भी उगाही का आरोपसूत्रों के हवाले से खबर है कि यह अवैध वसूली सिर्फ पार्किंग तक ही सीमित नहीं है। मेले के भीतर दुकान लगाने वाले छोटे-मोटे व्यापारियों और ठेला संचालकों से भी ड्रीम लैंड मेले के मालिक राकेश शुक्ला और उनके सहयोगियों द्वारा कथित तौर पर भारी-भरकम राशि वसूली जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें दुकान हटाने की धमकी दी जाती है। सरकार की छवि धूमिल करने का प्रयासस्थानीय प्रबुद्ध वर्ग और जनता का कहना है कि सरकारी संपत्ति का इस तरह व्यावसायिक दोहन और दबंगई के बल पर अवैध वसूली करना सीधे तौर पर शासन-प्रशासन को चुनौती देना है। इस तरह के कृत्य से न सिर्फ आम जनता का शोषण हो रहा है, बल्कि वर्तमान सरकार की साफ-सुथरी छवि को भी धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि शहर के बीचों-बीच एक सरकारी कॉलेज के फील्ड में इतने दिनों से यह खेल चल रहा है, लेकिन उच्च अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? जनता अब मुख्यमंत्री और जिले के शीर्ष अधिकारियों से मांग कर रही है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध वसूली करने वाले इन दबंगों पर तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
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