Water Crisis Cities: पानी की कमी से क्यों जूझ रहे चेन्नई-केपटाउन और मेक्सिको सिटी जैसे शहर? जानें इसके पीछे की वजह

Feb 27, 2026 - 09:26
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Water Crisis Cities: पानी की कमी से क्यों जूझ रहे चेन्नई-केपटाउन और मेक्सिको सिटी जैसे शहर? जानें इसके पीछे की वजह

Water Crisis Cities: दुनिया के कई बड़े शहर पानी के खतरनाक संकट का सामना कर रहे हैं. यूनाइटेड नेशंस के हाल ही में किए गए ग्लोबल वॉटर बैंकरप्सी असेसमेंट के अनुसार दुनिया एक ऐसे दौर में आ चुकी है जहां कई शहर अपने नेचुरल सिस्टम की क्षमता से ज्यादा पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत में चेन्नई, दक्षिण अफ्रीका में केप टाउन और मेक्सिको में मेक्सिको सिटी सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में से हैं. 

वॉटर बैंकरप्सी और डे जीरो क्या हैं?

वॉटर बैंकरप्सी का मतलब एक ऐसी स्थिति है जहां पानी की डिमांड लगातार सप्लाई से ज्यादा हो जाती है. इससे धीरे-धीरे रिजर्व कम हो जाते हैं. समय के साथ नेचुरल रिचार्ज काफी नहीं होता और पानी के सिस्टम पर ऐसा दबाव पड़ता है जिसे ठीक ही नहीं किया जा सकता. संकट का सबसे गंभीर नतीजा डे जीरो है. वह पॉइंट जब म्युनिसिपल वॉटर सिस्टम पाइपलाइन से पानी सप्लाई नहीं कर पाते उसे डे जीरो कहा जाता है. चेन्नई, बेंगलुरु और मैक्सिको सिटी जैसे शहर हाल के सालों में ऐसे हालात के काफी करीब आ चुके हैं. 

ग्राउंडवॉटर का कम होना इस संकट की सबसे बड़ी वजह है. जैसे भारत दुनिया में ग्राउंडवाटर निकलने वाला सबसे बड़ा देश है. काफी ज्यादा पंपिंग से जमीन के नीचे का स्टोरेज हमेशा के लिए कम हो जाता है. इसका मतलब है कि नॉर्मल बारिश भी पानी के रिजर्व को पूरी तरह से ठीक नहीं कर सकती.

मानसून पर निर्भरता 

चेन्नई का पानी का संकट काफी हद तक मौसमी बारिश पर इसकी निर्भरता से ही जुड़ा हुआ है. यह शहर अपने रिजर्व को भरने के लिए नॉर्थ ईस्ट मॉनसून पर काफी ज्यादा निर्भर है. जब मानसून फेल हो जाता है या फिर कमजोर पड़ जाता है तो रिजर्व जल्दी सूख जाता है. ऐसा 2016 और 2018 के बीच हुआ था. 

इसी के साथ ग्राउंडवॉटर के ज्यादा इस्तेमाल ने यहां की स्थिति को और भी ज्यादा खराब कर दिया है. लगभग दो तिहाई घर प्राइवेट बोरवेल पर निर्भर करते हैं. इस वजह से अंडरग्राउंड वॉटर लेवल खतरनाक रूप से नीचे गिर रहा है. शहरी विस्तार ने भी हजारों कुदरती झील, तालाब और वेटलैंड्स को खत्म कर दिया है. यह सभी ग्राउंडवॉटर को रिचार्ज करने में मदद करते थे.

रिपोर्ट्स के मुताबिक सिर्फ चेन्नई ही नहीं बल्कि दूसरे भारतीय शहरों में भी पानी का गहरा संकट है. कोलकाता 9वें, मुंबई 12वें और बेंगलुरु 24वें स्थान पर हैं. इतना ही नहीं बल्कि हैदराबाद, अहमदाबाद, सूरत और पुणे में भी पिछले कई सालों में पानी की काफी कमी हुई है. इसकी मुख्य वजह तेजी से शहरीकरण, ग्राउंडवाटर पर काफी ज्यादा निर्भरता और अनियमित बारिश है.

सूखा, आबादी का बढ़ना और इकोलॉजिकल वजह 

केप टाउन ने 2015 और 2018 के बीच मॉडर्न हिस्ट्री के सबसे गंभीर शहरी सूखे में से एक का अनुभव किया था. डैम में पानी का लेवल क्रिटिकल लेवल से नीचे चला गया था. इस वजह से शहर डे जीरो के करीब आ गया. क्लाइमेट चेंज ने इसमें एक बड़ी भूमिका निभाई. इस वजह से बारिश काफी कम हुई. इसके अलावा आसपास के कैचमेंट एरिया में इनवेसिव पौधों की किस्म काफी ज्यादा पानी सोख लेती हैं. इस वजह से जलाशयों में पानी का बहाव कम हो जाता है. इतना ही नहीं बल्कि दो दशकों में शहर की आबादी 50% से भी ज्यादा बढ़ी है. लेकिन पानी का इंफ्रास्ट्रक्चर उतनी रफ्तार से नहीं बढ़ सका. यही वजह है कि सप्लाई डिमांड का अंतर बढ़ गया.

ग्राउंडवाटर की कमी और डूबती जमीन 

मेक्सिको सिटी को पानी के ज्यादा इस्तेमाल का एक अनोखा और खतरनाक नतीजा भुगतना पड़ रहा है. यह फिजिकल डूब रहा है. एक पुरानी झील की जगह पर बना हुआ यह शहर ग्राउंडवॉटर पर काफी ज्यादा निर्भर है. यह इसकी पानी की जरूरतों का लगभग 70% पूरा करता है. काफी ज्यादा पानी निकालने की वजह से कुछ इलाकों में जमीन हर साल लगभग 20 इंच धंस रही है. साथ ही पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर से काफी ज्यादा पानी बर्बाद होता है. इसमें लीक की वजह से सप्लाई में लगभग 40% पानी का नुकसान होता है.

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला