'सिर्फ कसरत नहीं, दैनिक अनुशासन है प्राणायाम', पतंजलि वेलनेस सत्र में बोले बाबा रामदेव
Pranayama Benefits: हाल ही में अपने फेसबुक चैनल पर एक लाइव इंटरेक्शन के दौरान, योग गुरु रामदेव बाबा ने शारीरिक संतुलन और मानसिक स्पष्टता बनाए रखने में प्राणायाम और केंद्रित श्वास की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की. हिमालय की तलहटी में स्थित 'वेद लाइफ पतंजलि वेलनेस' से प्रसारित इस सत्र में उन्होंने न केवल श्वास तकनीकों का प्रदर्शन किया, बल्कि अभ्यास के दौरान एकाग्रता के महत्व को भी रेखांकित किया.
रामदेव बाबा ने इस बात पर जोर दिया कि प्राणायाम केवल एक कभी-कभार की जाने वाली गतिविधि नहीं, बल्कि एक दैनिक अनुशासन होना चाहिए. लाइव प्रसारण के दौरान उन्होंने दर्शकों को मुद्रा (posture), श्वास की लय और जागरूकता के प्रति सचेत रहने के लिए प्रोत्साहित किया. उनके अनुसार, जब प्राणायाम को निरंतरता और फोकस के साथ किया जाता है, तभी यह सबसे प्रभावी होता है.
आधुनिक जीवन के दबावों के बीच, सचेत श्वास (conscious breathing) शरीर और मन को संरेखित करने और शांति बनाए रखने में सहायक होती है. उन्होंने साधकों को सलाह दी कि वे प्राणायाम को धैर्यपूर्वक अपनाएं और शरीर को धीरे-धीरे इसके अनुकूल होने दें. इस दौरान स्थिरता बनाए रखना और विकर्षणों से दूर रहना अनिवार्य है.
हिमालयी परंपरा से जुड़ाव
रामदेव बाबा ने अपनी चर्चा में 'देवभूमि' के रूप में विख्यात हिमालयी क्षेत्र से मिलने वाली प्रेरणा का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि 'वेद लाइफ पतंजलि वेलनेस' एक ऐसा स्थान है जहां योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और सनातन जीवन पद्धति के सिद्धांतों का एक साथ अभ्यास किया जाता है. उनके अनुसार, यह क्षेत्र आत्म-चिंतन और अनुशासित जीवन के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करता है, जहां पारंपरिक ज्ञान को केवल वैचारिक रूप से पढ़ने के बजाय व्यावहारिक रूप से अनुभव किया जा सकता है.
परंपरा का दैनिक जीवन में एकीकरण
सत्र के अंत में, रामदेव बाबा ने दर्शकों से आग्रह किया कि वे दुनिया में कहीं भी हों, योगिक प्रथाओं को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. उन्होंने दोहराया कि यदि एकाग्रता के साथ किया जाए, तो प्राणायाम कल्याण बनाए रखने का एक सरल लेकिन प्रभावी साधन है. यह न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि भारत की प्राचीन कल्याण परंपराओं से जुड़े रहने का एक सशक्त तरीका भी है.
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