नीट छात्रा की मौत का मामला : सीबीआई को शोकॉज, कोर्ट ने पूछा-जब पॉक्सो एक्ट लगा था तो अलग से केस दर्ज क्यों किया

Feb 27, 2026 - 09:24
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नीट छात्रा की मौत का मामला : सीबीआई को शोकॉज, कोर्ट ने पूछा-जब पॉक्सो एक्ट लगा था तो अलग से केस दर्ज क्यों किया
नीट छात्रा की मौत के मामले में बेउर जेल में बंद हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की जमानत पर पटना सिविल कोर्ट स्थित पॉक्सो कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। करीब सवा घंटा तक बहस के बाद कोर्ट ने मनीष को बेल नहीं दी। इस पर अगली सुनवाई 28 फरवरी को होगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस केस के सीबीआई के आईओ को फटकार लगाई। कहा-जब पॉक्सो का केस था तो अलग से केस क्यों दर्ज किया? कोर्ट ने सीबीआई को शोकॉज जारी कर आदेश दिया कि 28 फरवरी को सुनवाई के दौरान बताना होगा कि अलग से केस क्यों किया? पीएमसीएच की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने डेढ़ माह पहले मनीष को गिरफ्तार किया था। उसपर सबूत से छेड़छाड़ करने का शक था। कोर्ट ने अबतक की पुलिस की जांच पर भी सवाल उठाया है। लापरवाही सामने आने पर जांच अधिकारियों से कहा-क्यों न आप पर ही केस किया जाए? आरोपी मनीष को रिमांड पर क्यों नहीं लिया पॉक्सो कोर्ट के स्पेशल पीपी सुरेश चंद्र प्रसाद ने कोर्ट से कहा-एसआईटी और सीबीआई ने जांच में गड़बड़ी की है। मनीष रंजन को गिरफ्तार करने के बाद उससे कभी पूछताछ हुई ही नहीं। उसे रिमांड पर नहीं लिया। जब केस सीबीआई ने टेकओवर किया तो केस को मजिस्ट्रेट कोर्ट में ही भेज दिया। छात्रा नाबालिग थी तो केस को पॉक्सो कोर्ट में भेजना चाहिए था। एसआईटी से मांगा अबतक की जांच का ब्योरा कोर्ट ने एसआईटी को फटकार लगाते हुए कहा-छात्रा का कहां-कहां इलाज हुआ, किन-किन लोगों का बयान पुलिस ने दर्ज किया, किन-किन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ का बयान लिया गया, जांच में अबतक क्या हुआ...सारी रिपोर्ट की चेन बनाकर दें? एसआईटी को भी 28 फरवरी को बुलाया गया है। कोर्ट ने पुलिस से पूछा-मनीष रंजन को क्यों गिरफ्तार किया? इस पर पुलिस की ओर से बताया गया कि वही मास्टरमाइंड है। पीड़ित पक्ष ने कहा-पुलिस ने केस को उलझाया बेल पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में सीबीआई की ओर से केस की जांच कर रहे आईओ पवन कुमार श्रीवास्तव, छात्रा की मां और उनके वकील के अलावा एसआईटी की ओर से केस की आईओ रहीं एसडीपीओ वन डॉ. अनु कुमारी मौजूद थीं। मनीष के वकील कमलाकांत सिंह ने कोर्ट से कहा-उसने किराया पर हॉस्टल दिया था। उसका कोई कसूर नहीं है। छात्रा के परिजन की ओर से वकील दिल्ली से आए एसके पांडेय ने बेल का विरोध करते हुए कहा-पुलिस ने केस में छेड़छाड़ की है। साक्ष्य को मिटा दिया गया है। इसमें पुलिस से लेकर डॉक्टर तक की मिलीभगत है। यह केस नार्मल था, पर पुलिस ने उलझा दिया। विशेष लोक अभियोजक सुरेश चंद्र प्रसाद और सूचक के अधिवक्ता एसके पांडे ने भी बेल का विरोध किया।

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