सूदखोरी पर सरकार का प्रहार... जबरन वसूली पर 5 साल की जेल व भारी जुर्माना

Feb 27, 2026 - 09:24
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सूदखोरी पर सरकार का प्रहार... जबरन वसूली पर 5 साल की जेल व भारी जुर्माना
गरीबों को सूदखोरों से बचाव, गुंडों की वसूली से सुरक्षा वाला कानून बन गया। अब बिहार में माइक्रो फाइनांस कंपनियों की मनमानी बंद होगी। विशेष न्यायालयों का गठन होगा। कानून का उल्लंघन करने की सजा 3 से 5 साल की जेल और 5 से 10 लाख तक जुर्माना होगा। बिहार विधानसभा ने सूदखोरों पर शिकंजा कसने और जबरन वसूली पर रोक लगाने के उद्देश्य से ‘बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं (धन उधार विनियमन एवं प्रपीड़क कार्रवाई निवारण) विधेयक’ 2026 को पारित कर दिया। इससे माइक्रो फाइनांस कंपनियों पर लगाम लगेगी। उनकी अनैतिक वसूली की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। सूद की मार से आत्महत्या के लिए मजबूर लोगों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए प्रत्येक जिले में विशेष न्यायालय गठित किए जाएंगे। वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने कहा कि इस कानून से उचित ब्याज दरों के साथ पारदर्शी ऋण संचालन सुनिश्चित किया जाएगा। छोटे अपराधों पर उद्योगपति, निवेशक अब जेल नहीं जाएंगे, आर्थिक दंड लगेगा प्रदेश में उद्योग, व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए दंडात्मक प्रावधानों को समाप्त कर उसे प्रशासनिक दंड/आर्थिक दंड में बदला जाएगा। छोटे अपराधों पर उद्योगपति/निवेशक/व्यवसायी अब जेल नहीं जाएंगे, सिर्फ उन पर आर्थिक दंड लगाए जाएंगे। सात निश्चय पार्ट-3 के अन्तर्गत “समृद्ध उद्योग- सशक्त बिहार” एजेंडे के तहत विधानसभा में बिहार जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक 2026 पारित हो गया। करीब 8 कानून से जुड़ी विसंगतियों एवं त्रुटियों को दूर कर ये विधेयक बनाया गया है। दंडात्मक प्रावधानों और लघु व तकनीकी प्रवृत्ति के अपराधों की जगह आर्थिक दंड का प्रावधान है। लगाम कैसे? माइक्रो फाइनांस कंपनियों को बिहार में ऋण वितरण शुरू करने से पहले राज्य सरकार के वित्त विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। उनको भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस लेने के बाद बिहार में कारोबार शुरू करने से पहले सांस्थिक वित्त निदेशक के पास पंजीकरण कराना होगा। सांस्थिक वित्त निदेशक नोडल अधिकारी बनाये गए हैं। दस्तावेजों की जांच के उपरांत 90 दिनों के भीतर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होगी। कानून की जरूरत क्यों? गांव की आम गरीब लाखों महिलाओं के साथ जीविका समूह से जुड़ी महिलाएं माइक्रो फाइनांस कंपनियों की जद में हैं। स्वयं सहायता समूहों और माइक्रो फाइनांस के नाम पर जरूरतमंद महिलाओं, पुरुषों को ये कंपनियां कर्ज देती हैं। फिर उनसे ऊंची ब्याज दर लेने के लिए जबरन वसूली और धमकी देती है। कई मामलों में वसूली के लिए बाहरी लोगों और स्थानीय दबंगों का इस्तेमाल किया जाता है। प्राइवेट प्रोफेशनल एजुकेशनल संस्थानों में फीस अब सरकार तय करेगी पटना | राज्य में प्राइवेट प्रोफेशनल एजुकेशनल संस्थानों में नामांकन और फीस अब सरकार तय करेगी। कानून विधानसभा में पारित हो गया है। इस कानून के बाद प्राइवेट संस्थान मनमाने तरीके से फीस नहीं ले सकेंगे। संस्थानों द्वारा कैपिटेशन फी लेना प्रतिबंधित रहेगा। उल्लंघन की स्थिति में 9 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति संस्थान को बंद करने की सिफारिश कर सकेगी। कैपिटेशन फी ली गई है तो उसे वापस करना होगा। उच्चतम न्यायालय द्वारा फीस नियंत्रण के लिए वैधानिक व्यवस्था बनाने के निर्देश के आधार पर यह कानून तैयार किया गया है। 9 सदस्यीय समिति करेगी निगरानी | समिति प्राइवेट प्रोफेशनल संस्थानों में नामांकन और फीस से जुड़े मामलों की निगरानी करेगी। समिति के अध्यक्ष प्रख्यात शिक्षाविद् या रिटायर सरकारी अधिकारी होंगे। स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव समिति के सदस्य सचिव होंगे। परीक्षा तक की फीस तय नामांकन से लेकर परीक्षा तक की सभी फीस समिति निर्धारित करेगी। इसमें लाइब्रेरी फी, लैब फी, कंप्यूटर फी, हॉस्टल फी, कॉशन मनी सहित अन्य शुल्क शामिल होंगे। बिहार विधानसभा... छह विधेयक पास फायदे क्या... निवेश, रोजगार सृजन और उद्यमिता को नई गति मिलेगी। सरल, पारदर्शी और विश्वास आधारित व्यवसायिक वातावरण बनेगा। श्रम-प्रधान उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा। सबसे युवा आबादी वाला राज्य होने के कारण बिहार को इस एप्रोच का व्यापक लाभ मिलेगा। जरुरत क्यों... अभी राज्य के विभिन्न अधिनियमों एवं नियमों में अनेक ऐसे प्रावधान विद्यमान हैं, जिनमें तकनीकी अथवा प्रक्रियागत त्रुटियों के लिए दंडात्मक/ कारावास में डालने का प्रावधान है। इससे व्यवसायी, उद्यमियों और कार्यरत कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इन्हीं कारणों से बीते कुछ दशकों में कई उद्योग बंद हुए हैं। बिहार में स्थिति क्या?... देश में सर्वाधिक बिहार में 2.2 करोड़ से अधिक ऋण खाते हैं। राज्य के लोगों पर माइक्रो फाइनांस कंपनियों का कुल 57712 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। औसतन प्रति उधारकर्ता पर 28,525 रुपये की देनदारी है। स्वनियामक संगठन ‘सा-धन’ के आंकड़ों के अनुसार राज्य के पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर माइक्रो फाइनांस लोन के सर्वाधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं

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Admin तेज रफ्तार न्यूज देश का बोलबाला