आज सुबह के मुख्य सामाचार अगर 30 करोड़ का पाकिस्तान "इस्लामिक' राष्ट्र हो सकता है। तो 100 करोड़ से ऊपर वाला भारत "हिन्दू राष्ट्र" क्यो नही? चुपी तोड़ो हिन्दुओ

जिनको बहन- बेटी- माँ - पत्नी का भेद करना पसंद नहीं वो सनातनी होकर ईसाई- मोमिन बन जाते है ..भका- भक 😡😄

Jun 30, 2026 - 06:12
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आज सुबह के मुख्य सामाचार अगर 30 करोड़ का पाकिस्तान "इस्लामिक' राष्ट्र हो सकता है।  तो 100 करोड़ से ऊपर वाला भारत "हिन्दू राष्ट्र" क्यो नही?  चुपी तोड़ो हिन्दुओ
Jitendra Kumar

Jeetu dehati: भ्रमित हिंदू है ।

नपुंसक नहीं ।

ज्ञानी -

बुद्धिमान- समर्थ- सक्षम हिंदू ने कभी उन हिंदुओं की सुध नहीं ली ।

ईसाइयों ने ली वे ईसाई बन गए ।

उनको अधर्मी- विधर्मी- वामपंथियों ने सिख - समझ - साथ- सहयोग किया वे विधर्मी - सेक्युलर होते गए ।

Jeetu dehati: उत्तराखंड के कर्णप्रयाग बाज़ार में सिर्फ बाइक पार्क करने और राहगीर को चोट लगने पर बहस शुरू हुई थी, जहाँ कुछ नीले कपड़े पहने निहंग आए थे.. . देखते ही देखते निहंगों ने नंगी तलवारें से प्राणघातक हमले करने शुरू कर दिए और लोग जान बचा कर भागने लगे!

इस खूनी झड़प के बाद पुलिस ने 4 निहंगों को अरेस्ट तो कर लिया, लेकिन उत्तराखंड पुलिस को क्या पता था कि जिनको उन्होंने गिरफ़्तार किया है वो संविधान में विशेष छूट पाये... और क़ानून से ऊपर के लोग है! 

गिरफ़्तारी के विरोध में दूसरे निहंगों ने तुरंत गुरुद्वारे पर कब्ज़ा करके पुलिस को ही घुटनों पर लाने की तैयारी कर ली।

उत्तराखंड में चार निहंगों की गिरफ़्तारी की खबर पंजाब पहुंची, तो पंजाब से पूरा जत्था निहंगों का उत्तराखंड की ओर निकल पड़ा अपने चार साथियों को छुड़ाने के लिए.....

मतलब यहाँ क़ानून और संविधान से कोई लेना देना नहीं था कि उन चारों ने क्या अपराध किया है....

और क्यों गिरफ्तारी हुई है....

बद्रीनाथ हाईवे पर स्थित है नागरासू गुरुद्वारा..........अचानक एक 'रणक्षेत्र' में बदल गया। हाथों में लंबे भाले, नंगी तलवारें और पारंपरिक ढालें लिए निहंगों के जत्थे गुरुद्वारे की तीसरी मंजिल और छतों पर तैनात हो गए। और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया.

पूरे गुरुद्वारे की किलेबंदी (बैरिकेडिंग) कर दी गई। जो भी पुलिसिया मूवमेंट नीचे दिखती, छत से नारों की गूंज और हथियारों की खनक से उसका जवाब दिया जाता। ऊपर से पत्थरबाजी की जा रही थी पुलिस के ऊपर.

मुझे समझ नहीं आ रहा था हमारे देश की पुलिस निहंग सरदार, किसी भीमवादी को देख कर इतना निरुत्साह और सरेंडर MODE में क्यों चली जाती है.

गुरुद्वारे की छत पर सात निहंग खड़े थे.... और नीचे पुलिस माइक लेकर उनको मना रही थी ?

पर किसलिए ?

दरवाज़े तोड़ के घुसो और पकड़ लो.. हाफ एनकाउंटर कर दो...

ये भी नहीं हो रहा था.. तो भाई उनको वैसे ही छत पर छोड़ दो.. कुल सात निहंग आदि थे....दस दिन में भूख प्यास से वहीं बेहोश हो जाएँगे... या ख़ुद बिलबिलाते हुए दरवाज़े खोल कर नीचे आ जाएँगे...

जरूरत क्या है इतना HYPE बनाने की ?

आखिरकार ३ दिन बाद पंजाब से इन्हीं निहंगों का SENIORS वहाँ पहुँचे जो ऊपर जाकर उन सात लोगों को समझाये......फिर प्रशासन ने भी उनके शर्तों को मान लिया जो हास्यास्पद है और प्रशासन को बैकफुट पर आते हुए केस चमोली से हटाकर हरिद्वार ट्रांसफर करने और मामले की "निष्पक्ष जांच" का लिखित भरोसा देना पड़ा।

क्या सचमुच देश का कानून सबके लिए बराबर है?

कानून की दुहाई देने वाले कहेंगे कि "संविधान के आर्टिकल 25 में सिखों को कृपाण रखने की आज़ादी है।" भाई, संविधान धार्मिक प्रतीक के रूप में एक तय साइज़ की 'कृपाण' की बात करता है। 3-4 फीट की नंगी तलवारें, भाले और नेजा लेकर बाज़ारों में घूमना, खूनी झड़पें करना या पुलिस के सामने हथियार चमकाना किसी संविधान में नहीं लिखा है।

बात सिर्फ आस्था और इतिहास की है, तो फिर...

👉 भगवान परशुराम का कोई परम भक्त संत बन जाए, तो क्या पुलिस उसे हमेशा हाथ में फरसा लेकर किसी मॉल या बस-ट्रेन में घूमने देगी?

👉 क्या कोई हिंदू अपनी आस्था के नाम पर चौबीसों घंटे त्रिशूल या तलवार लेकर सड़क पर चल सकता है?

जवाब सबको पता है—बिल्कुल नहीं। पुलिस तुरंत आर्म्स एक्ट के तहत अंदर कर देगी . हो सकता है सीधे एनकाउंटर ही कर दे.

वैसे भी हम देख रहे हैं कि ये लोग कैसे गुरुद्वारे में जाने वाले लोगों को थप्पड़ मारते हैं.. अपमानित करते हैं... लात मारते हैं ...

आज के परिदृश्य में भी देशहित में इनको शक्तिप्रदर्शन करते किसी ने देखा है क्या ? 

टोपी वालो पर तो विशेष कृपा रहती है और ईसाइयों का तो कहना ही क्या...

 पूरा पंजाब येशु येशु हो रखा है... तो धर्म की इस वास्तविक हानि पर ये निहंग क्या कर रहे हैं ?

*इनको बस हिंदी भाषी राज्य और लोगों से दुश्मनी है क्या।*?

Jeetu dehati: उत्तराखंडियों को फालतू गिरी करने की जरूरत नहीं।।

किसी भी निहंग को पास बुलाकर कुछ सवाल पूछो ।

आपने हिंदुओं को बचाने के लिए कौन सी लड़ाई लड़ी ??

कोई एक लड़ाई बता दो। जबकि पंजाबीयो को बचाने के लिए राजपूत मराठा हमेशा पंजाब पहुंचे।

जब गुरु शहीद हो रहे थे तो आप लोग कहां पर थे??

कौन लोग थे जो खुद लड़ने की बजाय अपने धर्म गुरुओं को शहीद होने के लिए दिल्ली भेज दिए थे ??

बाद में उनके पवित्र शरीर को लेने तक नहीं पहुंचे।

पाकिस्तान किन लोगों ने लिया??

वही पंजाबी जो मुसलमान बन चुके थे। आज पाकिस्तान में सबसे बड़ी ताकत पंजाबी ही है। जबकि बलोच सिंधी और पठान पाकिस्तान की लड़ाई नहीं लड़े।

तो आप इतने मुसलमान बन ही क्यों ??

 कि भारत के विभाजन हो गया।

पंजाबी लोग 80% मुसलमान बने (आज पाकिस्तान में 14 करोड़ है भारतीय पंजाब में सिर्फ 3 करोड़) 

जबकि पहाड़ी 2% ही मुस्लिम बने।

फिर बताओ कौन किसका बाप है। बहादुर कौन है ??

आप लोग सिर्फ 6 हजार ही पाकिस्तान में क्यों रह गए??

उसमें से भी काफी लोग अपना धर्म बचाने राजपूतों के गढ़ सिंध के अमरकोट में क्यों शिफ्ट हो गए हो?? 

जहां आज भी 50 लाख हिंदू मुश्किल हालात में भी अपने धर्म साथ जुड़े हुए है।

आज पाकिस्तान में एक भी निहंग क्यों नहीं??

क्या आखिरी निहंग 1949 में ही मुसलमान बन गया था? 

श्री करतारपुर साहब पंजाब बॉर्डर से सिर्फ 2 किलोमीटर दूर पाकिस्तान में है। आप उसको पंजाब में मिलने की मांग क्यों नहीं करते ? आप लोग मुसलमानो से इतना क्यों डरते हो ??

जबकि हिंदुओं से लड़ने के लिए कहीं भी पहुंच जाते हो। 

 "श्री हरमंदिर साहब की नींव मुस्लिम फकीर साईं मिया मीर ने रखी। ये झूठी कहानी आपने क्यों जोड़ी"। क्या सिर्फ मुसलमानो को खुश करना था।

 क्या नींव रखने वाले गुरु रामदास की छवि धूमिल नहीं की गई ??

गुरु परिवार शहीद करने वाले और गुरु परिवार की महिलाओं की इज्जत से खिलवाड़ करने वाले नवाब शेर मोहम्मद अली खान के नाम का मलेरकोटला में आपने गुरुद्वारा क्यों बना दिया ??

क्या कोई हिंदू औरंगजेब का मंदिर बनाने की सोच भी सकता है??।

मुसलमानो की चमचागिरी करने में इतने गिर जाओगे।

साफ दिख रहा अगर आप सारे पाकिस्तान में रह जाते तो कब की सलवारे पहन के मुसलमान हो चुके होते।

हिंदू भारत में सुरक्षित हो। सब बकवास भी आपकी बर्दाश्त भी कर लेते। इसलिए शांत रहो। जियो और जीने दो ।

Jitendra Kumar: *Narendra Modiji के आने के बाद आज देश को पहली बार पता चला है कि कश्मीर वैली की population 53 लाख है। जम्मू रीजन की population 69 लाख है, और लद्दाख की population 5 लाख है।*

*कश्मीर का एरिया, राज्य के टोटल Area का 16%, जम्मू का Area 25%, बाकी का 59% Area लद्दाख का है।*

*सोचने वाली बात ये है कि ना कश्मीर वैली एरिया के हिसाब से ज्यादा है, ना पोपुलेशन के हिसाब से, लेकिन नेहरू ने कश्मीर वैली को 47 सीट विधान सभा में दे दी, तथा जम्मू व लद्दाख को मिलाकर 43 सीट।*

*मतलब अगर कोई जम्मू व लद्दाख की सारी सीट भी जीत ले, तब भी सत्ता नहीं पा सकता, ताकि मुख्यमंत्री कश्मीर से कोई मुस्लिम ही बने।*

ऐसा घिनौना खेल देश और जम्मू में हिंदुओं के साथ खेला गया।

           चमचों को समर्पित

*#कांग्रेस_पर_थुकता_है_भारत।

इसलिये मोदी जी परिसिमन बिल लाने वाले है

Jitendra Kumar: जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन अब 8वें दिन में प्रवेश कर चुका है।

पूरे दिन वहाँ लगभग 150 लोग मौजूद रहते हैं (यूट्यूबर्स समेत), लेकिन खाने के समय यह संख्या करीब 300 तक पहुँच जाती है।

रोज़ाना खाने-पीने का अनुमानित खर्च:

नाश्ता: ₹100 × 300 = ₹30,000

दोपहर का खाना: ₹200 × 300 = ₹60,000

शाम का नाश्ता: ₹100 × 300 = ₹30,000

रात का खाना: ₹200 × 300 = ₹60,000

फल, फ्रूटी और अन्य स्नैक्स: ₹100 × 300 = ₹30,000

अन्य दैनिक खर्च तम्बू बम्बू आदि...

टेंट और स्टेज: ₹3,000 प्रतिदिन

माइक और साउंड सिस्टम: ₹2,000 प्रतिदिन

शौचालय सफाई: ₹1,500 प्रतिदिन

छात्र संघ सहायता: ₹200 × 150 = ₹30,000 प्रतिदिन

पीने का पानी: 150 लोग × 5 बोतल = 750 बोतल × ₹20 = ₹15,000 प्रतिदिन

सिगरेट: ₹3,000 प्रतिदिन

हिसाब लगाइए:

खाना-पीना: ₹2.10 लाख प्रतिदिन

अन्य व्यवस्थाएँ: ₹54,500 प्रतिदिन

कुल खर्च: ₹2.64 लाख प्रतिदिन

8 दिन का कुल अनुमानित खर्च: ₹21.16 लाख

सूत्रों के अनुसार आयोजक यानी जुनैद मियाँ मोबाइल रिपेयर की दुकान चलाते हैं...

अब सवाल यह है कि क्या एक मोबाइल रिपेयर शॉप वाला 8 दिनों में ₹21 लाख से अधिक का खर्च आराम से उठा सकता है?

या फिर इस आंदोलन की "बैटरी" कहीं और से चार्ज हो रही है? 🤔

कनेड़ा... या लाहौर... या कहीं और से?

Jeetu dehati: 🇮🇳 नागरिकता पर भ्रम नहीं, कानून पढ़िए!

आजकल सोशल मीडिया पर नागरिकता को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि भारत में नागरिकता का निर्धारण संविधान और नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अनुसार होता है। 

नागरिकता केवल किसी एक पहचान पत्र से सिद्ध नहीं होती। आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज़ महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे अपने आप में नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माने जाते। नागरिकता का निर्धारण कानून, जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर किया जाता है। 

इसलिए किसी भी वायरल पोस्ट, आधी-अधूरी जानकारी या अफवाह पर भरोसा करने से पहले कानून को समझिए।

📖 पहले पढ़िए, फिर राय बनाइए।

यदि हम जिम्मेदार नागरिक हैं, तो हमारा कर्तव्य है कि तथ्य साझा करें, भ्रम नहीं।

🇮🇳 देशहित में जागरूक बनें, कानून जानें और दूसरों को भी सही जानकारी दें।

जय हिंद! 🇮🇳

#CitizenshipAct1955 #IndianConstitution #KnowTheLaw #FactCheck #CitizenAwareness #India #जयहिंद #नागरिकता #संविधान #देशहित

Jitendra Kumar: न्यूज लॉन्ड्री (Newslaundry) वाले तब तो बहुत हंस रहे थे जब TMC के शासन में चुनाव नतीजों के बाद बम हमलों में लोग मारे जा रहे थे?

लेकिन अब जब लोग TMC पर अंडे फेंक रहे हैं, तो न्यूज लॉन्ड्री वाले इतने परेशान हैं!

जबरदस्त पाखंड और दर्द साफ दिख रहा है.

यह लोग कोई पत्रकार नहीं है पत्रकारिता के नाम पर कलंक है

Jitendra Kumar: साभार....

अगर कोई संपत्ति या जमीनी विवाद आपका कोर्ट में है...

तीन फेक्टर सबसे मायने रखते हैं....

1. जमीन पर काबिज कौन है...

2. आपकी राजनैतिक पकड़ कितनी है..

3. आपके कागज़ कितने मज़बूत हैं..

दोहों,चौपाइयों,श्लोक सुना कोर्ट के फैसले न होते हैं न बदलते हैं..

राम मंदिर अगर आज है..

तो पहला महत्वपूर्ण काम किया था अशोक सिंघल और लाल कृष्ण आडवाणी जी ने..

इन्होने इस मुद्दे को जन भावना से जोड़ राजनैतिक किया... और उस जगह पर ताक़त के जोर से कब्ज़ा जमाया...

दूसरा काम यानी राजनैतिक दबाव और जोर लगाने वाला फेक्टर बने नरेंद्र मोदी... इन्होने सत्ता की ताक़त का खुला इस्तेमाल कोर्ट में किया.... बिना इसके सीधा फैसला संभव न था..

तीसरा काम यानी मज़बूत कागज़... सबूत.. मालिक़ाना हक़ को साबित करना...

ये करने वाला व्यक्ति रहा "चम्पत राय"

जिसे इसी के चलते उपनाम मिला "अवध का पटवारी" या "रामलला का पटवारी"

चम्पत राय अगर सिर्फ दूसरे ग्रुप से हाथ मिला लेता..... मुंहमांगी दौलत... दुनियाँ में जहाँ कह देता मिल जाती..... बाबरी उनके लिए वाकई इतनी कीमती थी...

जितना ये मंदिर तुम्हारे लिए कभी न हो पायेगा 

तुममें उतना जुड़ाव होता ही नहीं अपने धर्म और उसके स्थलों के लिए... सीधी बात है 

तो अगर कोई गर्म तवे पर अपनी गां$ रख मुझसे कहे कि चम्पत राय चोरी कर सकता है 

में नहीं मानूंगा...

आज के ये ढेरों कथित ह्रदय सम्राट तब फ्रेम में भी न थे जब वो जान हाथ पर रख ये लड़ाई लड़ रहा था..

और मेरा सवाल अब भी वहीं है 

कोषाध्यक्ष पर कोई एक्शन क्यूँ नहीं.... जबकि प्रथम जिम्मेदारी तो उसी की थी...

खैर न तो मुझे रत्ती भर अब अयोध्या पर आरही बातों में कोई यक़ीन... न उसपर हो रही जाँच और कार्यवाही पर...

बस इतना पता है के कुछ हग लिया गया था जिसे अब लीपा जा रहा है....

SIT का मूल उदेश्य किसी को पकड़ना नहीं... बचाना है....!

TRN Live: अंतर

1- कांग्रेस में नेहरू गांधी परिवार को पूजा जाता है।यह उनकी कम्पनी है।

2- स.पा. मुलायम परिवार की संपत्ति है।

3- ब.स.पा. मायावती परिवार के भतीजे की जायदाद है।

4- R.J.D. लालू परिवार की कम्पनी है।

5- T.M.C. ममता परिवार की जायदाद है।

6- शिवसेना में ठाकरे परिवार की वंश परम्परा है।

7- N.C.P. पवार परिवार की धरोहर है।

8- J.D.S. देवेगौड़ा परिवार अमानत है।

9- T.R.S. चन्द्रशेखर राव परिवार को पूजा जाता है।

10- T.D.P. चन्द्रबाबू नायडू परिवार की जायदाद है।

11- अकालीदल बादल परिवार का ट्रस्ट है।

12- N.C. फारूख अब्दुल्ला परिवार की संपत्ति है।

13- P.D.P. मुफ्ती परिवार पाकिस्तानी एजेन्सी है।

14- Y.S.R.C.P. राजशेखर रेड्डी परिवार को पूजा जाता है।

15- B.J.D. बीजू पटनायक परिवार की कम्पनी है।

16- L.J.P. रामविलास पासवान परिवार की पूजा होती है।

17- J.M.M. में शिबू सोरेन परिवार की प्रार्थना होती है ।

18- R.L.D. में अजीत सिंह परिवार को भगवान माना जाता है।

19- I.N.L.D. चौटाला परिवार की अमानत है।

20- D.M.K. में करुणानिधि परिवार को पूजा जाता है !

21-आप पार्टी में कजरु ठग पूजा जाता है।

22-एआईएमआईएम ओबैसी परिवार की जायदाद है।

                     

- B.J.P. में *"भारत माता"* को पूजा जाता है।

इसलिये हम भक्त है

Jeetu dehati: साभार...

अब एक और नया एंटोनिआ रोना....

हाय अग्निवीर बलिदानी को कुछ न मिलता..

न पढ़ना है.. न जानना है 

बस मुंह उठा हुआ हुआ करना है 

भ्रम फैलाया जाता है कि यदि अग्निवीर युद्ध में शहीद हो जाएँ तो उनके परिवार को रेगुलर सैनिकों की तुलना में कम सहायता मिलती है।तथ्य इसके विपरीत हैं।

यदि कोई अग्निवीर सैन्य ड्यूटी के दौरान शहीद होता है, तो उसके परिवार को:

• ₹48 लाख का गैर-अंशदायी जीवन बीमा

• ₹44 लाख की अतिरिक्त एक्स-ग्रेशिया सहायता

• सेवा निधि (अग्निवीर और सरकार दोनों के अंशदान सहित)

• शेष कार्यकाल का पूरा वेतन

इन सभी को मिलाकर परिवार को लगभग ₹1 करोड़ या उससे अधिक की आर्थिक सहायता प्राप्त होती है।

साथ ही,सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार और शहादत का सम्मान भी दिया जाता है।

हाँ,एक अंतर अवश्य है—अग्निवीर स्थायी सैनिक नहीं होते,इसलिए सामान्य परिस्थितियों में उन्हें और उनके परिवार को रेगुलर सैनिकों जैसी दीर्घकालिक पेंशन व्यवस्था प्राप्त नहीं होती।लेकिन युद्ध या सेवा-संबंधी शहादत की स्थिति में तत्काल आर्थिक सहायता और सम्मान के मामले में उन्हें कमतर नहीं माना जाता।

किसी भी नीति पर बहस हो सकती है,लेकिन बहस तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए,भ्रांतियों के आधार पर नहीं।

TRN Live: राजनीति है, चलती रहती है, लेकिन बीजेपी कितनी सूक्ष्म स्तर पर काम करती है, यह समझने के लिए कृपया इसे जरूर पढ़ें।

इस रणनीति में TMC की गुप्त चालों की जानकारी निकाली गई।

इसमें काम आया PK... यानी प्रशांत किशोर।

PK के पास अपार पैसा था... भारत में इतना पैसा सीधे रास्ते से नहीं आता।

ED ने उस पर दबाव बनाया, उसने बिहार में झुकाव दिखाया, वह खत्म हो गया, लेकिन TMC की सारी जानकारी बीजेपी तक पहुंच गई। इसके बदले उसे संरक्षण दिया गया।

PK खत्म हुआ... उससे I-PAC की जानकारी मिली।

और TMC को झटका लगना शुरू हुआ।

CAA के विरोध में ममता बनर्जी उतर गईं। वह अनावश्यक था। लेकिन उससे विचार-मंथन शुरू हुआ। और संघ का मंथन मतलब बहुत खतरनाक तैयारी होती है।

साधारण कपड़े पहने, पैरों में साधारण चप्पलें डाले हुए सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी / जिला परिषद के रिटायर्ड शिक्षक जैसे दिखने वाले साधारण, बिना पहचान वाले लोग... बैठते हैं... बात करते हैं... फिर अपनी-अपनी थालियां लेकर आलू की सब्जी, रोटी, दाल-चावल खाते हैं, अपनी थालियां खुद धोकर जगह पर रखते हैं और बातचीत करते हुए निकल जाते हैं।

इसी दौरान इन साधारण लोगों को समझ आया कि संसदीय शस्त्रागार में एक जंग लगा हुआ महाशस्त्र मौजूद है।

#SIR

यही वह हथियार था... इसे पूरी तरह संसदीय नियमों के अनुसार चलाया गया। पहली परीक्षा बिहार में हुई। इसके बाद ममता सतर्क हो गईं।

उनके पास बांग्लादेशी घुसपैठियों का आधार था। मरे हुए और बाहर रहने वाले लोगों के नाम पर वोट डाले जाते थे। उस हथियार को निष्क्रिय कर दिया गया।

आगे “छापा वोट” का तरीका था। विरोधी लोगों को मतदान के लिए बाहर निकलने ही नहीं देना, और ममता के मुस्लिम पुलिसकर्मी खुद बटन दबाते रहते थे।

किसके दम पर? प्रशासनिक और पुलिस तंत्र के बल पर...

वहां चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को आगे रखते हुए कई उपाय करके नई सख्त व्यवस्था बनाई।

वहां की समानांतर मुस्लिम पुलिस समर्थक व्यवस्था को तोड़ दिया गया।

क्लब व्यवस्था डर दिखाती थी, तो वहां केंद्रीय बल तैनात किए गए।

I-PAC पर छापे के दौरान ममता ने जो फाइलें तेजी से हटाई थीं, उसकी पूरी जानकारी PK ने दी ही थी, लेकिन वहां के I-PAC अधिकारी चंदेल और जैन को ED ने पकड़ लिया। और आधा काम पूरा हो गया।

92 लाख कथित बांग्लादेशी मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। यह काम कठिन तो था ही, लेकिन अद्भुत भी था... क्योंकि ममता की मुस्लिम और जिहादी पुलिस नेटवर्क की बड़ी श्रृंखला तोड़नी थी।

“बाइक वाहिनी” दोपहिया वाहनों पर आतंक फैलाती थी, यह जानकारी पहले से थी। इसलिए मतदान से सिर्फ दो दिन पहले दोपहिया वाहनों पर रोक लगा दी गई। उन 48 घंटों में हर विधानसभा क्षेत्र के TMC अपराधियों को पकड़कर जेल में डाल दिया गया। करीब दस हजार इस्लामिक और जिहादी तत्व जेल भेजे गए।

मतदान के बाद EVM कैसे ले जाए जाते हैं, कहां रखे जाते हैं — इसमें पुलिस और I-PAC की मिलीभगत थी।

इसलिए वहां पुलिस को मतदान केंद्रों और उनके आसपास से हटाकर केंद्रीय बल तैनात किए गए।

TMC की हर छोटी-बड़ी जानकारी निकालकर यह रणनीति संघ के साधारण कार्यकर्ताओं ने छह-सात महीने पहले ही तय कर ली थी और समय आने पर लागू की।

जो सामान्य जनता की आंखों को दिखाई नहीं देता था, वही यहां बताया गया है...

जनता जो देख रही थी, पीड़ित हिंदू समाज जो सह रहा था... आज वह मुक्त हुआ। अगर बीजेपी सत्ता में नहीं आती, तो यह “बानो” कम से कम आधे हिंदुओं को खत्म कर देती, और बंगाल भारत का हिस्सा नहीं रहता... या फिर मुस्लिम बहुल राज्य बन गया होता।

मोदी और शाह ने हिंदुओं के लिए जो काम किया है, वह ऐतिहासिक है। बीजेपी के सभी 209 विधायक हिंदू हैं और विपक्ष में 70% मुस्लिम — यही नए बंगाल विधानसभा की तस्वीर है।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Jitendra Kumar: औरंगजेब अगर चाहता तो ज्ञानवापी मस्जिद की पिछली दीवार है उसको भी तुड़वाकर मस्जिद की दीवार बनवा सकता था, लेकिन उसने ऐसा जानबूझ कर नही किया। औररंगजेब ने हमारे लगभग ग्यारह सौ मंदिरो को तोड़कर मस्जिद बनवा दिया लेकिन वो मंदिरो को सिर्फ 3 तरफ से तोड़ता था और एक तरफ की दीवार को वो छोड़ देता था या फिर वो मंदिर के कुछ हिस्सों को छोड़कर मस्जिद का निर्माण करवाता था। औरंगजेब के कहना था अपने सत्रुओ को खत्म करने ज्यादा मजा है उनका मान मर्दन करने में उनके मान सम्मान और आत्मसम्मान को ठेस पहुचाने में । औरंगजेब ये चाहता था कि हिन्दू ये रोज देखकर तिल तिल मरे की उनके मंदिरो को रौंद कर उसपे मस्जिद बनवाया गया है। चाहे काशी विश्वनाथ का मंदिर हो, केशव देव मंदिर हो, विसेस्वर मंदिर हो ,विजय मंदिर हो , गोलकोंडा का मंदिर हो और फिर वो चाहे मथुरा या वृन्दावन का मंदिर हो, इन सभी मंदिरों को पूरा ध्वस्त नही किया गया है, बल्कि इनके ऊपर मस्जिद का निर्माण करवाया गया है। हिन्दू खुद अपने दिमाग से सोचें कि अगर उसे मस्जिद ही बनवाने का शौक होता तो देश में बहुत सारी खाली जमीने थी, लेकिन वो हिंदुओ के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाना चाहता था।

Jitendra Kumar: बेंजामिन नेतन्याहू विश्व की सबसे प्रतिष्ठित मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट‌ ऑफ टेक्नोलॉजी MIT से ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट है...

अमेरिका में कुछ बडी कंपनियों में बडे पदों पर काम करने के बाद वह अमेरिका में एक सफल बिजनेसमैन भी रह चुके हैं...

उनकी बुक सेल्फ में किताबें देखिए कीतनी है...

और सोनिया गांधी 9 वी फेल है और देखिए कि वह किस तरह किताबें सजा कर दुनिया को दिखाती है...

जिस व्यक्ति के पास जो चीज नहीं होती है, वह कहीं से उधार लेकर उसका सिर्फ दिखावा करता है...

Jeetu dehati: ये है डेविड नवेल 

एक जर्मन नागरिक 

#गुजरात में घूमते हुए डेविड को एक कुत्ता काट लेता है

डेविड को बहुत चिंता हुई कि पता नहीं इलाज का कितना खर्च आएगा

जब इनको #सूरत के सरकारी हॉस्पिटल में टिटनेस और रेबीज के इंजेक्शन लगे तो इन्होंने डॉक्टर से बिल मांगा

तब डॉक्टर ने बताया कि भारत में रेबीज का इलाज मुफ़्त में होता है तो ये हैरान हो गए

क्योंकि जर्मनी में रेबीज के इलाज का खर्च $11,500 (यानि लगभग ₹11 लाख) रुपये आता हैं

फिर इन्होंने Vlog बनाकर भारत की चिकित्सा व्यवस्था की खूब तारीफ की

आपको ये सुनकर गर्व तो हुआ ही होगा ना❓

#ProudIndian

Jeetu dehati: जिस वातावरण- व्यवस्था- मनोदशा - चरित्र- व्यक्तित्व के समाज में हम रहते है वहाँ चोरी करना- होना दुर्भाग्य नहीं है ।

*चोरी पकड़ी जाना दुर्भाग्य है ।*

प्राप्ति के षड्यंत्र किस प्रकिया - कार्य- व्यवसाय में नहीं होते आए तथा हो रहे?

इकोसिस्टम का प्रपोगेंडा है । अख़लाक़ गाय चोर को लिंचिंग के रूप म स्थापित कर दिया जाता है तो अंकित शर्मा- कन्हेयालाल - चंदन गुप्ता की हत्या पर चुप्पी साध ली जाती है ।

इकोसिस्टम की अपनी एक रणनीति है वे एकजुट होकर गजवा ए हिन्द में जुटे है ।

जबकि भारतीय- सनातनी समाज व्यवस्था में निष्ठा- अनैतिकता के झूले में बैठकर उनके ही मंसूबे पूरे करने में उनके विरोधी होकर भी सैनिक बन जाते है ।

*अपने आजु- बाजू के कार्यकलाप से लेकर लेंन-देन, नाते- रिश्ते, मित्र- साथी सब केवल प्राप्ति के लिए कुछ भी करने उतावले है यह हर व्यक्ति भलीभाँति जानता समझता है*

अवसरवादिता पुरुषार्थ का पर्याय बन चुके समाज में भावना- आस्था- निष्ठा- नैतिकता- शुद्धता तो पूजा सामग्री के कुमकुम- हल्दी- गुलाल- अबीर- घी- दूध- दही तक में नहीं रही ।

Jitendra Kumar: निहरु इतना बड़ा गधा था .....?

अंडमान निकोबार द्वीप समूह में भारत के नौसेना का बड़ा अड्डा है ये तो सभी को ज्ञात है पर क्या आप ये जानते है के हमारे इस नौसैनिक अड्डे से सिर्फ 20 किलोमीटर दूर चीन का भी एक नौसैनिक अड्डा है.....!

जी हां भारत से सिर्फ 20 KM दूर... जहां से चीनी हमारी हर हरकत पर नज़र रखते है....!

इस चीनी नौसैनिक अड्डे का नाम है Coco Islands (तस्वीर देखें).....साल 1950 तक ये भारत का ही हिस्सा हुआ करता था......पर आज भारत के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है....अंडमान निकोबार सहित पूरा दक्षिण भारत, कोलकाता, चेन्नई जैसे बड़े शहर आज इस चीनी अड्डे की मिसाइलों की जद में है....ये भारत की वो कमजोर नस है जो चीन की उंगलियों के बीच दबी है....!

सबसे मजेदार चीज़ ये अड्डा चीन ने हमसे बिना लड़े बिना एक गोली खर्च किये बिना एक बूंद खून बहाए लिया है.....क्या कुछ अजीब लग रहा है........!

इस ऐतिहासिक मूर्खता को समझने को आपको कुछ साल पीछे लौटना होगा.....

सबसे पहले इस महा मूर

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Jeetu dehati

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